Thu, 08 Oct 20266:02 PM
Thu, Oct 8, 2026Updated 6:02 PM IST
होम › छत्तीसगढ़

बैकुंठपुर कंज्यूमर कोर्ट का बड़ा फैसला: खराब नेटवर्क के लिए रिलायंस जियो को देना होगा 14 हजार रुपये मुआवजा, ऑनलाइन क्लास से वंचित छात्र की शिकायत पर सुनवाई

WhatsAppFacebookX

छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में स्थित बैकुंठपुर उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (कंज्यूमर कोर्ट) ने दूरसंचार क्षेत्र की प्रमुख कंपनी रिलायंस जियो के खिलाफ एक महत्वपूर्ण और चर्चित फैसला सुनाया है। आयोग ने रिलायंस जियो को अपनी सेवाओं में कमी का दोषी मानते हुए उसे एक उपभोक्ता को कुल 14,000 रुपये का मुआवजा देने का स्पष्ट आदेश दिया है। यह मामला एक छात्र द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा हुआ है, जो कंपनी के खराब नेटवर्क और इंटरनेट सेवाओं में लगातार आ रही बाधाओं के कारण अपनी ऑनलाइन कक्षाओं में नियमित रूप से शामिल नहीं हो पा रहा था। इस फैसले को उपभोक्ता अधिकारों के संरक्षण की दिशा में एक अत्यंत सशक्त कदम माना जा रहा है, जिससे अन्य दूरसंचार कंपनियों को भी अपनी सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए सख्त संदेश गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला कोरिया जिले के मुख्यालय बैकुंठपुर का है। एक छात्र ने रिलायंस जियो की मोबाइल और इंटरनेट सेवाओं का उपयोग करने के लिए कंपनी का सिम कार्ड और रिचार्ज योजनाएं ली थीं। छात्र का मुख्य उद्देश्य अपने शैक्षणिक कार्यों को सुचारू रूप से चलाना और विशेषकर ऑनलाइन कक्षाओं में बिना किसी रुकावट के भाग लेना था। वर्तमान समय में शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल माध्यमों की अनिवार्यता को देखते हुए, एक स्थिर और तेज इंटरनेट कनेक्शन हर छात्र की मूलभूत आवश्यकता बन चुका है। हालांकि, छात्र ने आरोप लगाया कि रिलायंस जियो के नेटवर्क में बार-बार गिरावट आ रही थी और इंटरनेट की स्पीड इतनी धीमी हो जाती थी कि वह अपनी ऑनलाइन कक्षाओं से जुड़ ही नहीं पा रहा था। कई बार क्लास के बीच में ही नेटवर्क पूरी तरह से गायब हो जाता था, जिसके कारण उसकी पढ़ाई का भारी नुकसान हो रहा था और उसका शैक्षणिक भविष्य प्रभावित होने की स्थिति उत्पन्न हो गई थी।

नेटवर्क की इस गंभीर समस्या से परेशान होकर छात्र ने सबसे पहले रिलायंस जियो के कस्टमर केयर और संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया। उसने कंपनी को अपनी समस्या से अवगत कराते हुए नेटवर्क को ठीक करने और बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने की मांग की। लेकिन, छात्र का आरोप था कि कंपनी की ओर से उसकी शिकायतों पर कोई संतोषजनक समाधान या उचित कार्यवाही नहीं की गई। जब सभी विकल्प समाप्त हो गए और कंपनी ने कोई राहत नहीं दी, तब छात्र ने न्याय के लिए बैकुंठपुर उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का दरवाजा खटखटाया। छात्र ने आयोग के समक्ष एक औपचारिक परिवाद दायर करते हुए कहा कि कंपनी ने उससे शुल्क तो वसूला, लेकिन बदले में वादे के अनुसार गुणवत्तापूर्ण सेवाएं प्रदान नहीं कीं, जो सीधे तौर पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत ‘सेवा में कमी’ की श्रेणी में आता है।

बैकुंठपुर कंज्यूमर कोर्ट में इस मामले की विस्तृत सुनवाई हुई। आयोग ने दोनों पक्षों के तर्कों और प्रस्तुत किए गए तथ्यों को गहराई से परखा। छात्र की ओर से पेश किए गए सबूतों और उसके द्वारा झेली गई शैक्षणिक परेशानियों का संज्ञान लेते हुए, आयोग ने इस बात को स्वीकार किया कि रिलायंस जियो अपनी सेवाओं को निर्धारित मानकों के अनुसार उपलब्ध कराने में विफल रहा है। आयोग ने अपने विस्तृत आदेश में स्पष्ट रूप से कहा कि जब कोई दूरसंचार कंपनी उपभोक्ता से सेवा का शुल्क लेती है, तो उसे उसी अनुपात में निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण सेवा देने की कानूनी जिम्मेदारी होती है। यदि कंपनी ऐसा करने में असमर्थ रहती है, तो इसे उपभोक्ता के प्रति सेवा में कमी (Deficiency in Service) माना जाएगा।

अंततः, आयोग ने रिलायंस जियो को सेवा में कमी का दोषी करार दिया। कोर्ट ने कंपनी को आदेश दिया कि वह पीड़ित छात्र यानी उपभोक्ता को कुल 14,000 रुपये का मुआवजा भुगतान करे। यह राशि छात्र को हुई शैक्षणिक क्षति, मानसिक परेशानी और मामले को लेकर उसे जिला मुख्यालय पर आने-जाने तथा कानूनी प्रक्रिया में हुए खर्चों की पूर्ति के लिए निर्धारित की गई है। आयोग ने कंपनी को यह राशि एक निश्चित समय सीमा के भीतर उपभोक्ता को भुगतान करने का सख्त निर्देश दिया है।

उपभोक्ता अधिकारों के जानकारों और कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि बैकुंठपुर कंज्यूमर कोर्ट का यह फैसला आम उपभोक्ताओं के लिए एक बहुत बड़ी मिसाल कायम करता है। अक्सर देखा जाता है कि बड़ी दूरसंचार कंपनियां छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्याओं को लेकर उपभोक्ताओं की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लेती हैं। ऐसे में लोग यह मानकर चल देते हैं कि बड़ी कंपनियों के खिलाफ शिकायत करने का कोई फायदा नहीं है। लेकिन, इस ताजा फैसले ने यह साबित कर दिया है कि उपभोक्ता कानून हर नागरिक को समान अधिकार देता है और अगर किसी कंपनी की सेवा में कमी पाई जाती है, तो न्यायालय उपभोक्ता को उचित मुआवजा दिलाने में पूरी तरह सक्षम हैं।

यह मामला उन लाखों छात्रों और उपभोक्ताओं के लिए एक प्रेरणा है जो खराब इंटरनेट सेवाओं और नेटवर्क समस्याओं से जूझ रहे हैं। कोरिया जैसे जिले में, जहां शिक्षा के लिए अब डिजिटल माध्यमों पर निर्भरता काफी हद तक बढ़ गई है, वहां टेलीकॉम कंपनियों की जिम्मेदारी और भी अधिक बढ़ जाती है। रिलायंस जियो को दिए गए इस आदेश से अन्य सेवा प्रदाता कंपनियों को भी यह स्पष्ट संदेश मिलता है कि उन्हें अपने नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना होगा और ग्राहकों की शिकायतों का समयबद्ध तरीके से निस्तारण करना होगा, अन्यथा उन्हें कानूनी कार्रवाई और आर्थिक दंड का सामना करना पड़ सकता है। वंदे भारत न्यूज़ की यह रिपोर्ट उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने का एक सतत प्रयास है।