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Fri, Oct 9, 2026Updated 4:34 PM IST
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भोपाल: रिटायर्ड आईबी अधिकारी रवींद्र डोंगरे पर BDA का प्लॉट हड़पने की कोशिश का मामला दर्ज, फर्जी बंटान दस्तावेज तैयार करने का आरोप

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भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक सनसनीखेज और चर्चित मामला सामने आया है, जिसमें केंद्रीय खुफिया ब्यूरो (आईबी) के एक सेवानिवृत्त अधिकारी पर गंभीर धोखाधड़ी के आरोप लगे हैं। भोपाल पुलिस ने इस पूर्व अधिकारी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कर ली है। आरोप है कि इस रिटायर्ड अधिकारी ने भोपाल विकास प्राधिकरण (BDA) के एक बहुमूल्य भूखंड को अवैध रूप से हड़पने की नीयत से फर्जी बंटान दस्तावेज तैयार किए थे। इतना ही नहीं, इन जाली दस्तावेजों को असली कागजात के रूप में प्रस्तुत कर सरकारी जमीन पर अपना दावा ठोकने की साजिश रची गई थी। इस पूरे मामले में शाहपुरा थाना पुलिस ने संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की है और आरोपी सेवानिवृत्त आईबी अधिकारी को हिरासत में लेकर उससे पूछताछ शुरू कर दी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला भोपाल के शाहपुरा थाना क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। शाहपुरा थाना पुलिस ने जो प्राथमिकी दर्ज की है, उसके मुताबिक आरोपी रवींद्र डोंगरे, जो कि केंद्रीय खुफिया ब्यूरो (IB) से सेवानिवृत्त अधिकारी बताए जा रहे हैं, ने BDA के एक भूखंड पर कब्जा करने की योजना बनाई थी। इस योजना को अंजाम देने के लिए उन्होंने कथित तौर पर फर्जी बंटान दस्तावेज तैयार करवाए। बंटान दस्तावेज का उपयोग आमतौर पर किसी संपत्ति या जमीन के बंटवारे को कानूनी रूप देने के लिए किया जाता है। आरोप है कि रवींद्र डोंगरे ने ऐसे दस्तावेज तैयार करवाए जो पूरी तरह से जाली थे, लेकिन उन्हें इस तरह से पेश किया गया जैसे वे बिल्कुल असली और वैध हों। इन फर्जी कागजातों के आधार पर BDA के भूखंड को अपने नाम करने या उस पर अधिकार जमाने की कोशिश की गई।

जब इस धोखाधड़ी और जालसाजी की भनक संबंधित विभाग और प्रशासन को लगी, तो मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को सूचना दी गई। इसके बाद शाहपुरा थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए रिटायर्ड आईबी अधिकारी रवींद्र डोंगरे के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में भी ले लिया है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इस धोखाधड़ी में आरोपी के अलावा कोई अन्य व्यक्ति या बिचौलिया भी शामिल था या नहीं। पुलिस हिरासत में लिए गए आरोपी से लगातार पूछताछ कर रही है ताकि इस पूरे षड्यंत्र की तह तक पहुंचा जा सके और सभी पहलुओं की बारीकी से जांच की जा सके।

इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी व्यक्ति कोई आम नागरिक नहीं, बल्कि देश के सबसे प्रतिष्ठित और संवेदनशील खुफिया विभाग यानी केंद्रीय खुफिया ब्यूरो (IB) का सेवानिवृत्त अधिकारी है। आईबी का काम देश की आंतरिक सुरक्षा और खुफिया जानकारी जुटाना होता है। ऐसे विभाग से रिटायर होने वाले अधिकारियों से समाज और प्रशासन दोनों की उच्च नैतिक और कानूनी अपेक्षाएं होती हैं। जब इस तरह का कोई व्यक्ति जमीन हड़पने और फर्जी दस्तावेज बनाने जैसे आपराधिक कृत्यों में लिप्त पाया जाता है, तो यह न केवल प्रशासनिक महकमे में बल्कि आम जनता के बीच भी चर्चा और आश्चर्य का विषय बन जाता है। पुलिस अब यह भी पता लगाने की कोशिश करेगी कि क्या आरोपी ने अपने पूर्व पद और रुतबे का किसी प्रकार से दुरुपयोग किया था।

भोपाल विकास प्राधिकरण (BDA) मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल शहर के नियोजित विकास और विस्तार के लिए जिम्मेदार प्रमुख सरकारी संस्था है। BDA के पास शहर में कई महत्वपूर्ण भूखंड, आवासीय योजनाएं और व्यावसायिक परिसर हैं। समय-समय पर BDA की जमीनों पर अवैध कब्जे या फर्जी दस्तावेजों के जरिए धोखाधड़ी के मामले सामने आते रहते हैं। ऐसे मामलों में भू-माफिया या सफेदपोश लोग जाली वसीयत, फर्जी बंटान या नकली रजिस्ट्री के सहारे सरकारी जमीनों को हड़पने की कोशिश करते हैं। वर्तमान मामले में BDA के जिस भूखंड को निशाना बनाया गया है, उसकी सटीक लोकेशन, क्षेत्रफल और बाजार में उसकी अनुमानित कीमत के बारे में अभी पुलिस द्वारा आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है। जांच आगे बढ़ने पर इन तथ्यों के भी सामने आने की संभावना है।

शाहपुरा थाना पुलिस द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी में धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों को असली बताकर उपयोग करने से संबंधित भारतीय न्याय संहिता (या लागू कानून) की सुसंगत धाराओं को शामिल किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी ताकि यह पुष्टि हो सके कि बंटान के कागजात किस स्तर पर और किस तरीके से फर्जी बनाए गए थे। साथ ही, यह भी जांचा जाएगा कि क्या इन दस्तावेजों को किसी उप-पंजीयक कार्यालय या अन्य सरकारी दफ्तर में पहले कभी प्रस्तुत किया गया था या नहीं।

VANDE BHARAT NEWS की इस रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया जाता है कि आरोपी रवींद्र डोंगरे के खिलाफ पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें हिरासत में लिया है। कानूनी प्रक्रिया के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को दोषी तब तक नहीं माना जा सकता जब तक कि न्यायालय में आरोप सिद्ध न हो जाएं। इसलिए, यह पूरा मामला अभी जांच के अधीन है और पुलिस द्वारा की जा रही तफ्तीश के बाद ही वास्तविक तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी। भोपाल पुलिस की टीम इस मामले की हर एंगल से गहनता से जांच कर रही है और जल्द ही इसका खुलासा करने की दिशा में काम कर रही है।