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Fri, Oct 9, 2026Updated 7:22 PM IST
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आलीराजपुर को सूखाग्रस्त घोषित कराने की मांग पर सियासत तेज, विधायक सेना पटेल ने मंत्री नागरसिंह चौहान को घेरा

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मध्य प्रदेश के आलीराजपुर जिले में इस वर्ष कम बारिश और सिंचाई की बढ़ती समस्याओं को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। जिले को सूखाग्रस्त घोषित कराने की मांग पर स्थानीय विधायक सेना पटेल ने सीधे तौर पर राज्य सरकार के मंत्री नागरसिंह चौहान पर निशाना साधा है। विधायक पटेल का कहना है कि यदि मंत्री नागरसिंह चौहान जिले की गंभीर समस्याओं को लेकर प्रभावी कदम नहीं उठा पा रहे हैं, तो उन्हें मुख्यमंत्री से सीधे बात करनी चाहिए ताकि आलीराजपुर को जल्द से जल्द सूखाग्रस्त क्षेत्र घोषित किया जा सके। इस मुद्दे को लेकर जिले में सियासी पारा चढ़ गया है और किसानों की परेशानियों पर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

आलीराजपुर जिला, जो मुख्य रूप से आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है, वहां खेती-किसानी का पूरा ढांचा मानसून की बारिश पर निर्भर करता है। इस वर्ष जिले में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है। बारिश की इस भारी कमी ने न केवल फसलों को बुरी तरह प्रभावित किया है, बल्कि पीने के पानी और पशुओं के चारे की भी गंभीर समस्या उत्पन्न कर दी है। जिले के कई हिस्सों में सिंचाई के पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं हैं, जिसके कारण किसानों के सामने दोहरी मार की स्थिति बन गई है। एक तरफ बारिश ने साथ नहीं दिया और दूसरी तरफ सिंचाई सुविधाओं के अभाव में खेतों में खड़ी फसलें सूखने लगी हैं। ऐसे में किसानों को राहत देने के लिए जिले को सूखाग्रस्त घोषित करना सबसे जरूरी कदम माना जा रहा है, ताकि सरकारी सहायता और मुआवजे की प्रक्रिया शुरू हो सके।

विधायक सेना पटेल ने इस संवेदनशील मुद्दे पर मंत्री नागरसिंह चौहान की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिले के किसान और आम जनता भारी संकट से गुजर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर मंत्री जी प्रशासनिक स्तर पर या अपनी जिम्मेदारियों के तहत आलीराजपुर को सूखाग्रस्त घोषित कराने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं, तो उन्हें बिना किसी देरी के मुख्यमंत्री से सीधे बात करनी चाहिए। विधायक पटेल ने यह भी रेखांकित किया कि सूखे की स्थिति दिन-प्रतिदिन विकराल होती जा रही है और प्रशासनिक कार्यवाही में हो रही देरी से किसानों का नुकसान बढ़ता ही जा रहा है। उनके अनुसार, किसानों को समय रहते राहत मिलना उनका अधिकार है और जनप्रतिनिधियों का पहला कर्तव्य यही होना चाहिए कि वे जनता की तकलीफों को सरकार के सर्वोच्च स्तर तक पहुंचाएं।

दूसरी ओर, मंत्री नागरसिंह चौहान और उनकी भूमिका को लेकर उठ रहे इन सवालों ने जिले की राजनीति में नया मोड़ ले लिया है। स्रोत सामग्री में मंत्री नागरसिंह चौहान की तरफ से विधायक सेना पटेल के इन आरोपों और सुझावों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। यह अभी स्पष्ट नहीं है कि मंत्री ने इस संबंध में मुख्यमंत्री से कोई बात की है या नहीं, या फिर प्रशासनिक स्तर पर सूखे की स्थिति का आकलन करने के लिए कोई विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं या नहीं। हालांकि, विधायक द्वारा सार्वजनिक तौर पर मंत्री को घेरने के बाद यह मामला पूरी तरह से सियासी रंग ले चुका है और अब सभी की निगाहें मंत्री नागरसिंह चौहान के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।

आलीराजपुर जैसे पिछड़े और आदिवासी बहुल जिले में सूखे की स्थिति का सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। यहां के अधिकांश किसान छोटे और सीमांत हैं, जिनके पास सिंचाई के अपने निजी साधन नहीं हैं। जब बारिश कम होती है, तो ये किसान पूरी तरह से बेबस हो जाते हैं। सूखाग्रस्त घोषित होने के बाद ही राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं, फसल बीमा दावों के निपटारे, रोजगार गारंटी योजना के तहत अतिरिक्त काम उपलब्ध कराने और राहत सामग्री वितरण की प्रक्रिया तेज हो पाती है। इसलिए विधायक सेना पटेल की यह मांग केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे हजारों किसानों और ग्रामीण परिवारों की आजीविका का गंभीर सवाल जुड़ा हुआ है।

इस पूरे मामले ने यह भी उजागर किया है कि जिले में सिंचाई बुनियादी ढांचे को लेकर लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का अभी तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सका है। कम बारिश के सालों में यह कमी और अधिक खटकती है। विधायक पटेल द्वारा मुख्यमंत्री से सीधे हस्तक्षेप की मांग किए जाने से यह संदेश भी गया है कि जिला और मंत्रालयी स्तर पर चल रही वर्तमान प्रक्रियाओं को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधि संतुष्ट नहीं हैं।

कुल मिलाकर, आलीराजपुर में कम बारिश और सिंचाई संकट को लेकर छिड़ी यह सियासी जंग अब आगे और तेज होने के आसार हैं। किसान संगठन और आम जनता भी इस बात की मांग कर रहे हैं कि राजनीतिक बयानबाजी से इतर ठोस प्रशासनिक कार्रवाई हो। देखना यह होगा कि विधायक सेना पटेल के इस तीखे हमले के बाद मंत्री नागरसिंह चौहान क्या रुख अपनाते हैं और क्या आलीराजपुर जिले को आधिकारिक तौर पर सूखाग्रस्त घोषित करने की दिशा में कोई ठोस और त्वरित कदम उठाया जाता है। फिलहाल, जिले के किसान राहत की उम्मीद में सरकार की ओर देख रहे हैं।