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Thu, Oct 8, 2026Updated 12:53 PM IST
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पंजाब सीएम ऑफिस में कथित भ्रष्टाचार: CBI की FIR में खन्ना के कारोबारी राजदीप नागरा का नाम, कांग्रेस नेताओं के रहे हैं करीबी

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वन्दे भारत न्यूज़, खन्ना/चंडीगढ़। पंजाब में सत्ता परिवर्तन होने के बावजूद खन्ना शहर के प्रमुख कारोबारी राजदीप नागरा एक बार फिर से चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान के कार्यालय में कथित तौर पर हुए भ्रष्टाचार के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने जो प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है, उसमें राजदीप नागरा का नाम सामने आया है। यह मामला पंजाब की मौजूदा आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के लिए बेहद संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि इसमें सीधे तौर पर मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम शामिल हैं।

सीबीआई द्वारा दर्ज की गई इस प्राथमिकी में मुख्यमंत्री भगवंत मान के विशेष कार्य अधिकारी (OSD) राजबीर सिंह घुम्मण सहित कुल छह व्यक्तियों को नामजद किया गया है। इन छह आरोपितों में खन्ना निवासी कारोबारी राजदीप नागरा का नाम भी शामिल होना इस पूरे मामले को और अधिक गंभीर बना देता है। सीबीआई की इस एफआईआर के बाद पंजाब के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। सूत्रों के अनुसार, यह जांच मुख्यमंत्री कार्यालय में कथित रूप से हुई अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से संबंधित है, जिसकी शिकायतों के आधार पर केंद्रीय एजेंसी ने यह कदम उठाया है।

राजदीप नागरा का राजनीतिक पृष्ठभूमि की बात करें तो वे खन्ना क्षेत्र के जाने-माने कारोबारी रहे हैं। हालांकि, उनका नाम सिर्फ व्यापार जगत तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि वे पंजाब की पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के अत्यंत करीबी माने जाते थे। सत्ता परिवर्तन के बाद जब आम आदमी पार्टी की सरकार बनी, तब भी नागरा का प्रभाव और उनकी गतिविधियां चर्चा का विषय बनी रहीं। अब सीबीआई की एफआईआर में उनका नाम आने से यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या पूर्ववर्ती सरकार के करीबी रहे लोग वर्तमान सरकार के उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों के साथ मिलकर किसी प्रकार की अनियमितताओं में शामिल थे।

मुख्यमंत्री के ओएसडी राजबीर सिंह घुम्मण का नाम इस एफआईआर में आना आम आदमी पार्टी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है। राजबीर सिंह घुम्मण मुख्यमंत्री भगवंत मान के सबसे विश्वसनीय अधिकारियों में से एक माने जाते हैं। उनके खिलाफ सीबीआई द्वारा भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किए जाने से विपक्षी दलों को सरकार पर हमला करने का एक बड़ा मुद्दा मिल गया है। एफआईआर में जिन अन्य चार लोगों का नाम शामिल है, उनकी भूमिकाओं और इस कथित भ्रष्टाचार में उनके योगदान की जांच सीबीआई द्वारा की जा रही है। फिलहाल सभी छह नामजद आरोपितों के खिलाफ जांच का दायरा बढ़ाया जा सकता है।

खन्ना शहर में राजदीप नागरा की पहचान एक ऐसे कारोबारी के रूप में रही है, जिनके राजनीतिक संपर्क काफी मजबूत बताए जाते हैं। कांग्रेस के शासनकाल में उनके कई नेताओं से घनिष्ठ संबंधों की चर्चाएं समय-समय पर होती रही हैं। पंजाब में जब आम आदमी पार्टी ने भारी बहुमत से सरकार बनाई, तो यह उम्मीद जताई जा रही थी कि प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। लेकिन मुख्यमंत्री कार्यालय से ही जुड़े भ्रष्टाचार के इस कथित मामले ने सरकार की उस प्रतिबद्धता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सीबीआई की प्राथमिकी दर्ज होने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि यह मामला केवल स्थानीय स्तर का नहीं है, बल्कि इसके तार प्रदेश के सर्वोच्च प्रशासनिक कार्यालय तक पहुंचते हैं। केंद्रीय जांच एजेंसी अब इन सभी छह व्यक्तियों से पूछताछ करेगी और यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि मुख्यमंत्री कार्यालय में किस प्रकार की कथित अनियमितताएं हुईं और इसमें कारोबारी राजदीप नागरा की क्या भूमिका थी। जांच एजेंसी यह भी देखेगी कि क्या इस कथित भ्रष्टाचार में कोई और बड़े नाम या चेहरे भी शामिल हैं, जिनका अभी खुलासा नहीं हो पाया है।

इस पूरे मामले को लेकर पंजाब सरकार या मुख्यमंत्री कार्यालय की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। वहीं, राजदीप नागरा या अन्य आरोपितों की ओर से भी इस एफआईआर पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सीबीआई की जांच अभी अपने प्रारंभिक चरण में है और आने वाले दिनों में इस मामले में कई नए तथ्य सामने आ सकते हैं। वन्दे भारत न्यूज़ इस मामले की हर अपडेट पर नजर बनाए हुए है और जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, पाठकों को विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। यह मामला पंजाब की राजनीति में आने वाले दिनों में गरमाता हुआ दिखाई दे रहा है।