Sun, 11 Oct 202612:25 PM
Sun, Oct 11, 2026Updated 12:25 PM IST
होम › देश

एंटीलिया केस: सचिन वाजे की महंगी कारों और ओबेरॉय होटल में 100 दिन ठहरने पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने जताई हैरानी, NIA ने जमानत का किया विरोध

WhatsAppFacebookX

मुंबई। एंटीलिया मामले में आरोपी पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाजे की जमानत याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट में गुरुवार, 8 अक्टूबर को सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत ने सचिन वाजे की जीवनशैली और उनके खर्चों को लेकर गहरी हैरानी जताई। हाईकोर्ट ने पूछा कि एक असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर (API) के पद पर रहते हुए वाजे के पास मर्सिडीज और बीएमडब्ल्यू जैसी महंगी गाड़ियां कैसे थीं। इसके साथ ही अदालत ने इस बात पर भी सवाल उठाए कि वाजे मुंबई के प्रतिष्ठित ओबेरॉय होटल में करीब 100 दिनों तक कैसे ठहरे रहे। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अदालत में वाजे की जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि यदि उन्हें जमानत दी गई तो वे गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं।

बॉम्बे हाईकोर्ट में हुई इस सुनवाई के दौरान सचिन वाजे की आय और उनके रहन-सहन के बीच के भारी अंतर पर चर्चा हुई। अदालत ने टिप्पणी की कि वाजे जब असिस्टेंट पुलिस इंस्पेटर के पद पर तैनात थे, उस दौरान वे मर्सिडीज और बीएमडब्ल्यू जैसी लग्जरी कारों का इस्तेमाल करते थे। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि वाजे इन महंगी कारों से सीधे पुलिस कमिश्नर के कार्यालय और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के आधिकारिक बंगले तक जाया करते थे। एक निचले रैंक के पुलिस अधिकारी द्वारा इस तरह की विलासितापूर्ण जीवनशैली अपनाना अदालत के लिए हैरानी का विषय बना रहा।

अदालत ने वाजे के ओबेरॉय होटल में ठहरने के मामले को भी गंभीरता से लिया। हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया कि सचिन वाजे मुंबई के पांच सितारा ओबेरॉय होटल में लगभग 100 दिनों तक रुके थे। एक पुलिसकर्मी की सरकारी सैलरी को देखते हुए इतने लंबे समय तक किसी महंगे होटल में रहने का खर्च वहन करना सामान्य नहीं माना जा सकता। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि इन तथ्यों से स्पष्ट होता है कि वाजे की आय के स्रोत और उनके खर्चों के पैटर्न में कोई मेल नहीं खाता है।

इस मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अपनी दलीलें रखते हुए सचिन वाजे को जमानत दिए जाने का कड़ा विरोध किया। एनआईए की तरफ से अदालत को बताया गया कि एंटीलिया मामला बेहद संवेदनशील और गंभीर प्रकृति का है। एजेंसी ने आशंका व्यक्त की कि यदि सचिन वाजे को जमानत पर रिहा किया जाता है, तो वे इस मामले के गवाहों को प्रभावित करने का प्रयास कर सकते हैं। एनआईए ने यह भी रेखांकित किया कि वाजे का पुलिस विभाग में लंबा अनुभव रहा है और उनके कई संपर्क अभी भी विभाग के भीतर और बाहर मौजूद हैं, जिससे गवाहों पर दबाव बनने का खतरा बना रहता है।

गौरतलब है कि सचिन वाजे एंटीलिया मामले में मुख्य आरोपियों में से एक हैं। यह मामला मुंबई में उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास ‘एंटीलिया’ के बाहर से विस्फोटक सामग्री से भरी एक स्कॉर्पियो कार मिलने से जुड़ा है। इस घटना के बाद कार के मालिक मनसुख हिरेन की संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या कर दी गई थी। इन दोनों मामलों की जांच शुरू में महाराष्ट्र के आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS) ने की थी, लेकिन बाद में इसे राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दिया गया। एनआईए ने जांच के दौरान सचिन वाजे को गिरफ्तार किया था और तब से वे न्यायिक हिरासत में बंद हैं।

सुनवाई के दौरान अदालत ने वाजे की पुलिस सेवाओं के दौरान उनके आचरण और जीवनशैली को लेकर कई सवाल दागे। कोर्ट ने यह समझने का प्रयास किया कि एक असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर के रूप में काम करते हुए वाजे के पास इतनी संपत्ति और संसाधन कैसे आए। अदालत ने यह भी ध्यान दिलाया कि वाजे का पुलिस कमिश्नर कार्यालय और मुख्यमंत्री के बंगले तक लग्जरी कारों में जाना उनकी पहुंच और प्रभाव को दर्शाता है, जो जांच एजेंसी की इस दलील को मजबूती देता है कि वे गवाहों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।

एंटीलिया और मनसुख हिरेन हत्याकांड की जांच में एनआईए ने कई अहम सबूत जुटाए हैं। एजेंसी ने पहले भी अदालत में यह स्पष्ट किया है कि वाजे की भूमिका इस पूरे षड्यंत्र में संदिग्ध रही है। एनआईए का तर्क है कि वाजे का पुलिस बल में रहा प्रभाव और उनकी कार्यप्रणाली को देखते हुए उन्हें जमानत देना जांच और न्यायिक प्रक्रिया दोनों के लिए बाधा उत्पन्न कर सकता है।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार, 8 अक्टूबर को हुई इस सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलों को विस्तार से सुना। अदालत ने वाजे की विलासितापूर्ण जीवनशैली, महंगी कारों के उपयोग और ओबेरॉय होटल में लंबे समय तक ठहरने जैसे बिंदुओं पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। वहीं, एनआईए ने गवाहों को प्रभावित किए जाने के खतरे को आधार बनाकर जमानत याचिका का विरोध जारी रखा। एंटीलिया मामला देश भर में चर्चा का विषय रहा है और इसमें एक पुलिस अधिकारी की संलिप्तता ने कानून व्यवस्था और जांच प्रणाली पर कई सवाल खड़े किए थे। बॉम्बे हाईकोर्ट में सचिन वाजे की जमानत याचिका पर सुनवाई का यह दौर इस हाई-प्रोफाइल मामले की कानूनी कार्यवाही का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। अदालत ने सभी तथ्यों, एनआईए के विरोध और वाजे की जीवनशैली से जुड़े पहलुओं को संज्ञान में लेते हुए सुनवाई को आगे बढ़ाया।