Thu, 08 Oct 20261:47 PM
Thu, Oct 8, 2026Updated 1:47 PM IST
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दतिया: रिंग रोड के बीचों-बीच लगा बिजली ट्रांसफॉर्मर बना जानलेवा खतरा, नवरात्रि में हादसे की आशंका; 2024 से शिकायत के बाद भी प्रशासन ने नहीं की कार्रवाई

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दतिया। मध्य प्रदेश के दतिया जिले में एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। शहर की महत्वपूर्ण रिंग रोड पर भैरव मंदिर से भांडेरी फाटक और सेवढ़ा चुंगी की ओर जाने वाले मार्ग पर, भदौरिया की खिड़की चौराहे के ठीक बीचों-बीच एक विद्युत डीपी (डिस्ट्रीब्यूशन पॉइंट) लगी हुई है। यह ट्रांसफॉर्मर राहगीरों, वाहन चालकों, श्रद्धालुओं और मवेशियों के लिए बड़ा खतरा बन गया है। स्थानीय रहवासियों ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2024 से वे इस समस्या की शिकायत संबंधित अधिकारियों से कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

नवरात्रि के पावन पर्व में माता रानी के भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। ऐसे में रिंग रोड पर सड़क के मध्य में लगे इस बिजली ट्रांसफॉर्मर के कारण किसी बड़े हादसे की आशंका गहरा गई है। भैरव मंदिर से लेकर भांडेरी फाटक और सेवढ़ा चुंगी की तरफ जाने वाला यह मार्ग शहर का एक अत्यंत व्यस्त रास्ता है। इस मार्ग पर दिन-रात वाहनों और पैदल यात्रियों का आवागमन बना रहता है। त्योहारों के दौरान, विशेषकर नवरात्रि में, जब भक्तों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है, तब सड़क के बीचों-बीच लगी यह विद्युत डीपी लोगों की सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती बन जाती है।

स्थानीय मोहल्लेवासियों ने बताया कि इस लापरवाही की सबसे बड़ी कीमत बेजुबान मवेशियों को चुकानी पड़ रही है। रहवासियों का स्पष्ट कहना है कि इस ट्रांसफॉर्मर से निकलने वाले करंट की चपेट में आने से अब तक कई गायों और भैंसों की मौत हो चुकी है। मवेशी अक्सर सड़क किनारे या बीच में घूमते रहते हैं और इस खुले या खतरनाक तरीके से लगे ट्रांसफॉर्मर के संपर्क में आ जाते हैं, जिससे वे करंट का शिकार हो जाते हैं। पशुपालकों को अपने मवेशियों की सुरक्षा को लेकर हर दिन चिंता सताती रहती है।

रहवासियों ने अपनी पीड़ा बया करते हुए कहा कि उन्होंने वर्ष 2024 से ही इस खतरे को लेकर संबंधित विभागों और प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायतें की हैं। इसके बावजूद, इतने लंबे समय बीत जाने के बाद भी प्रशासन की ओर से इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उनकी शिकायतों को अनसुना किया जा रहा है, जिसके कारण पूरा मोहल्ला लगातार खतरे के साये में जीने को मजबूर है। लोगों में यह आक्रोश है कि यदि समय रहते इस ट्रांसफॉर्मर को हटाकर किसी सुरक्षित स्थान पर नहीं ले जाया गया, तो कोई बड़ी जनहानि हो सकती है।

विद्युत वितरण कंपनी के नियमों के अनुसार, किसी भी ट्रांसफॉर्मर या डिस्ट्रीब्यूशन पॉइंट को मुख्य सड़क के बीचों-बीच लगाना सुरक्षा मानकों के विपरीत माना जाता है। सड़क के मध्य में ऐसी विद्युत संरचना होने से दुर्घटनाओं का खतरा स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है। वाहन चालकों को अचानक ब्रेक लगाने पड़ते हैं या रास्ता बदलना पड़ता है, जिससे ट्रैफिक जाम और टक्कर की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। खासकर रात के अंधेरे में यह ट्रांसफॉर्मर वाहन चालकों के लिए और भी ज्यादा खतरनाक साबित होता है।

नवरात्रि जैसे धार्मिक आयोजनों के दौरान, जब भैरव मंदिर और अन्य धार्मिक स्थलों पर दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, तब सड़क पर पहले से ही भीड़भाड़ होती है। ऐसे में सड़क के बीच में लगी यह विद्युत डीपी न केवल यातायात में बाधा उत्पन्न करती है, बल्कि भक्तों, विशेषकर महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के लिए करंट लगने का सीधा खतरा पैदा करती है। रहवासियों ने आशंका जताई है कि यदि प्रशासन ने तत्काल ध्यान नहीं दिया, तो नवरात्रि के दौरान कोई अप्रिय घटना घट सकती है।

इस मामले में स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और कलेक्टर से हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका कहना है कि शिकायत करने के सभी रास्ते अपनाए जा चुके हैं, लेकिन निचले स्तर के अधिकारियों द्वारा इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया जा रहा है। इसलिए अब सीधे जिला प्रशासन से गुहार लगाई जा रही है कि वे इस मामले में व्यक्तिगत रुचि लेते हुए विद्युत विभाग को निर्देश दें, ताकि इस ट्रांसफॉर्मर को सड़क के बीच से तुरंत हटाकर किसी सुरक्षित और उपयुक्त स्थान पर शिफ्ट किया जा सके।

दतिया की इस रिंग रोड पर लगे ट्रांसफॉर्मर का मामला केवल एक सड़क की समस्या नहीं है, बल्कि यह शहरी योजना और नागरिक सुरक्षा में हो रही चूक का एक स्पष्ट उदाहरण है। जब से यह विद्युत डीपी यहां लगी है, तब से लेकर अब तक मवेशियों की मौत का सिलसिला जारी है और लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है। देखना यह होगा कि क्या नवरात्रि के इस संवेदनशील समय में जिला प्रशासन और विद्युत विभाग इस गंभीर समस्या का समाधान निकाल पाता है या फिर प्रशासनिक उदासीनता के चलते कोई बड़ी दुर्घटना होने का इंतजार किया जाएगा। फिलहाल, मोहल्लेवासी और राहगीर इस खतरे के बीच ही आवाजाही करने को विवश हैं।