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Sat, Oct 10, 2026Updated 11:32 AM IST
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चलती ट्रेन के SLR कोच में मेंटेनेंस कर्मचारी बनकर घुसते थे चोर, वाराणसी से अंतरराज्यीय गैंग का पर्दाफाश: 7.10 लाख का माल बरामद, 3 गिरफ्तार

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उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन रेलवे स्टेशन और आसपास के क्षेत्रों से गुजरने वाली चलती ट्रेनों के एसएलआर (सेकेंड लगेज एवं पार्सल) कोच को निशाना बनाकर पार्सल चोरी करने वाले एक खतरनाक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया गया है। रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने गुरुवार शाम को की गई एक सुनियोजित कार्रवाई के तहत इस गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से वाराणसी स्थित एक गोदाम से लगभग 5.60 लाख रुपये मूल्य के कपड़े और करीब 1.50 लाख रुपये मूल्य की ज्वेलरी बरामद की गई है। बरामद किए गए कुल माल की अनुमानित कीमत 7.10 लाख रुपये बताई जा रही है।

रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह अंतरराज्यीय गिरोह बेहद शातिर तरीके से अपनी वारदातों को अंजाम देता था। गिरोह के सदस्य चलती ट्रेनों में चोरी की घटनाओं को अंजाम देने के लिए एक खास हथकंडा अपनाते थे। ये लोग खुद को रेलवे का मेंटेनेंस कर्मचारी बताकर या उस भेष में ट्रेन के दिव्यांग कोच में दाखिल होते थे। मेंटेनेंस कर्मचारी का रूप धारण करने के कारण ट्रेन में मौजूद अन्य रेलवे कर्मचारियों या टीटीई (टिकट परीक्षक) को इन पर शक नहीं होता था। दिव्यांग कोच में प्रवेश करने के बाद, ये शातिर चोर चुपचाप ट्रेन के एसएलआर यानी लगेज और पार्सल कोच तक पहुंचते थे।

एसएलआर कोच वह डिब्बा होता है जिसमें रेलवे के माध्यम से भेजे जाने वाले विभिन्न प्रकार के पार्सल, सामान और लगेज रखे जाते हैं। चलती ट्रेन में इस कोच तक पहुंचकर गिरोह के सदस्य पार्सलों को काटते थे और उनमें रखे कीमती सामान को चुरा लेते थे। चोरी की यह पूरी वारदात चलती ट्रेन के अंदर ही पूरी कर ली जाती थी, जिससे किसी भी रेलवे अधिकारी या सुरक्षाकर्मी को तुरंत इसका पता नहीं चल पाता था। ट्रेन के गंतव्य पर पहुंचने या पार्सल अनलोड होने के बाद ही चोरी का खुलासा हो पाता था, तब तक ये आरोपी अपना रास्ता बदल चुके होते थे।

उज्जैन आरपीएफ को लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ ट्रेनों के पार्सल कोच से सामान चोरी हो रहा है। इसके बाद आरपीएफ ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एक विशेष टीम का गठन किया। आरपीएफ की टीम ने तकनीकी सुराग, सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण और मुखबिरों से मिली सूचनाओं के आधार पर इस अंतरराज्यीय गिरोह की गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू की। कई दिनों की कड़ी मशक्कत और सघन निगरानी के बाद, आरपीएफ को इस गिरोह के सदस्यों और उनके ठिकानों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल हुईं।

इन्हीं सुरागों के आधार पर आरपीएफ ने गुरुवार शाम को एक बड़ी और सफल कार्रवाई को अंजाम दिया। इस दौरान गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया गया। प्राथमिक पूछताछ में आरोपियों ने उज्जैन सहित अन्य मार्गों पर चलती ट्रेनों में की गई चोरी की वारदातों को कबूल किया है। आरपीएफ की जांच में यह बात सामने आई है कि यह गिरोह केवल उज्जैन तक सीमित नहीं था, बल्कि यह एक अंतरराज्यीय नेटवर्क के तहत काम कर रहा था। चोरी किए गए सामान को ठिकाने लगाने के लिए इनका मुख्य अड्डा उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर में था।

आरपीएफ की टीम ने आरोपियों की निशानदेही पर वाराणसी में छापेमारी की। वाराणसी स्थित एक गोदाम से चोरी का भारी मात्रा में माल बरामद किया गया है। इस गोदाम से आरपीएफ ने 5.60 लाख रुपये मूल्य के कपड़े और 1.50 लाख रुपये मूल्य की ज्वेलरी जब्त की है। यह माल विभिन्न ट्रेनों के एसएलआर कोच से चुराया गया था और उसे बेचने या आगे भेजने के लिए इस गोदाम में इकट्ठा किया गया था। बरामद किए गए कुल माल की कीमत 7.10 लाख रुपये आंकी गई है।

रेलवे सुरक्षा बल के अधिकारियों ने बताया कि पकड़े गए तीनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और रेलवे अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस गिरोह में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। आरपीएफ को संदेह है कि इस अंतरराज्यीय गिरोह का नेटवर्क और भी बड़ा हो सकता है और देश के अन्य हिस्सों में भी इनके साथी सक्रिय हो सकते हैं। इसलिए जांच को तेज कर दिया गया है और अन्य संदिग्धों की पहचान के प्रयास जारी हैं।

आरपीएफ ने इस सफल कार्रवाई के बाद सभी रेलवे कर्मचारियों और विशेष रूप से पार्सल कोच में ड्यूटी करने वाले स्टाफ को सतर्क रहने की अपील की है। अधिकारियों ने निर्देश दिए हैं कि चलती ट्रेनों में कोई भी व्यक्ति यदि खुद को मेंटेनेंस कर्मचारी बताकर कोच में प्रवेश करता है, तो उसकी उचित पहचान और वैध रेलवे पास की सख्ती से जांच की जाए। बिना सत्यापन के किसी भी अज्ञात व्यक्ति को दिव्यांग कोच या एसएलआर कोच में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

रेलवे सुरक्षा बल ने यात्रियों और व्यापारियों से भी कहा है कि वे अपने कीमती पार्सल भेजते समय उचित पैकिंग और सुरक्षा मानकों का पालन करें। यदि किसी भी ट्रेन में संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे या कोई व्यक्ति बिना वर्दी या उचित पहचान पत्र के रेलवे कर्मचारी होने का दावा करे, तो तुरंत आरपीएफ हेल्पलाइन नंबर 139 या अन्य आपातकालीन नंबरों पर सूचना दें। उज्जैन आरपीएफ की इस कार्रवाई से रेलवे में पार्सल चोरी करने वाले गिरोहों में हड़कंप मच गया है और इसे रेलवे सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।