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Fri, Oct 9, 2026Updated 8:15 AM IST
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खगड़िया किसान महापंचायत: राकेश टिकैत बोले- मक्का किसानों को प्रति क्विंटल 800 रुपये का नुकसान, MSP और जमीन के अधिकार के लिए संगठित होकर लड़ना होगा

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खगड़िया। बिहार के खगड़िया जिले में गुरुवार को आयोजित एक विशाल किसान महापंचायत में भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने केंद्र और राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा। इस महापंचायत में मुख्य रूप से मक्का उत्पादक किसानों की समस्याओं, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की मांग और किसानों के जमीन के अधिकारों जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। राकेश टिकैत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि खगड़िया के मक्का किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है और उन्हें प्रति क्विंटल 800 रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि MSP और जमीन के अधिकार को बचाने के लिए सभी को संगठित होकर संघर्ष करना होगा।

किसान महापंचायत को संबोधित करते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि खगड़िया और आसपास के इलाकों में मक्का की खेती करने वाले किसानों की स्थिति बेहद दयनीय हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के कारण किसानों को उनकी मेहनत का सही दाम नहीं मिल पा रहा है। टिकैत ने बताया कि वर्तमान बाजार में मक्का किसानों को प्रति क्विंटल 800 रुपये का सीधा नुकसान हो रहा है। जब किसान अपनी फसल की लागत निकालता है, तो उसे घाटे का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति किसानों के लिए किसी आपदा से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते सरकार ने मक्का किसानों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया, तो क्षेत्र में खेती-किसानी पूरी तरह से तबाह हो जाएगी और किसानों के सामने आर्थिक संकट गहरा जाएगा।

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के मुद्दे पर भी सरकार की जमकर आलोचना की। उन्होंने कहा कि MSP किसानों का संवैधानिक और वैध अधिकार है, जिसे हर हाल में सुनिश्चित किया जाना चाहिए। टिकैत ने आरोप लगाया कि सरकार MSP को लेकर किसानों के साथ वादाखिलाफी कर रही है। उन्होंने कहा कि जब तक सभी फसलों पर कानूनी गारंटी वाला न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू नहीं होता, तब तक किसानों का शोषण जारी रहेगा। महापंचायत में मौजूद किसानों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि MSP की मांग को लेकर अब और इंतजार नहीं किया जा सकता। इसके लिए पूरे देश के किसानों को एकजुट होना होगा और संगठित तरीके से अपनी आवाज बुलंद करनी होगी। उन्होंने कहा कि बिखरकर कोई लड़ाई नहीं जीती जा सकती, इसलिए किसानों को अपने संगठनों को मजबूत करना होगा।

राकेश टिकैत ने किसान महापंचायत में जमीन के अधिकारों का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि आज किसानों की जमीन पर कई तरह के खतरे मंडरा रहे हैं। कॉर्पोरेट घरानों और विभिन्न परियोजनाओं के नाम पर किसानों की उपजाऊ जमीन उनसे छीनने की कोशिशें लगातार की जा रही हैं। टिकैत ने चेतावनी दी कि जमीन ही किसान की असली पहचान और उसकी रोजी-रोटी का एकमात्र आधार है। अगर किसान अपनी जमीन खो देता है, तो वह सब कुछ खो देगा। उन्होंने कहा कि जमीन के अधिकारों की रक्षा के लिए भी किसानों को संगठित होकर लड़ना होगा। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी किसान उसकी जमीन से बेदखल न हो सके।

इस महापंचायत में खगड़िया और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए। किसानों ने अपनी विभिन्न समस्याओं को राकेश टिकैत और भारतीय किसान यूनियन के अन्य पदाधिकारियों के सामने रखा। किसानों ने बताया कि खाद, बीज और डीजल की बढ़ती कीमतों ने खेती की लागत को इतना बढ़ा दिया है कि खेती करना अब घाटे का सौदा बन गया है। इसके अलावा, सिंचाई की उचित व्यवस्था न होने और प्राकृतिक आपदाओं के कारण भी किसानों को भारी नुकसान सहना पड़ता है। महापंचायत में मौजूद किसानों ने सरकार से मांग की कि मक्का की खरीद सरकारी स्तर पर उचित दाम पर सुनिश्चित की जाए ताकि उन्हें बिचौलियों के चंगुल से मुक्ति मिल सके।

अपने संबोधन के दौरान राकेश टिकैत ने बार-बार संगठित होने की अपील की। उन्होंने कहा कि चाहे MSP का मुद्दा हो, मक्का किसानों को हो रहा 800 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान हो, या फिर जमीन के अधिकारों की रक्षा का सवाल हो, इन सभी चुनौतियों का सामना बिना एकजुट हुए नहीं किया जा सकता। उन्होंने भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले सभी किसानों को जुड़ने का आह्वान किया। टिकैत ने कहा कि पिछले आंदोलनों से यह साबित हो चुका है कि जब किसान एकजुट होता है, तो बड़ी से बड़ी ताकत को झुकना पड़ता है। उन्होंने कहा कि आगे की रणनीति तय करने के लिए किसानों को गांव-गांव और पंचायत स्तर पर बैठकें करनी होंगी और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना होगा।

खगड़िया में गुरुवार को संपन्न हुई यह किसान महापंचायत किसानों की बढ़ती बेचैनी और उनके संगठित होने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के इस दौरे और उनके संबोधन से स्थानीय किसानों में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है। अब देखना यह होगा कि महापंचायत में उठाए गए इन गंभीर मुद्दों पर सरकार क्या रुख अपनाती है और क्या खगड़िया के मक्का किसानों को उनकी फसल का वाजिब दाम मिल पाता है या नहीं। किसानों ने साफ कर दिया है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया, तो वे आने वाले समय में बड़े आंदोलन करने को तैयार हैं।