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Fri, Oct 9, 2026Updated 8:16 AM IST
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औरंगाबाद में प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची को लेकर विवाद: मुखिया संघ ने पात्रों का नाम काटकर सक्षमों को लाभ देने का लगाया आरोप, आंदोलन की दी चेतावनी

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बिहार के औरंगाबाद जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की लाभार्थी सूची को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। इस मामले में जिले के मुखिया संघ ने प्रशासन के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी है। मुखिया संघ के सदस्यों का आरोप है कि आवास योजना की सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई है। वास्तविक जरूरतमंद और गरीब परिवारों के नाम सूची से हटा दिए गए हैं, जबकि उनके स्थान पर ऐसे सक्षम लोगों को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है, जिन्हें सरकारी आवास योजना की कोई आवश्यकता नहीं है। इस पूरे विवाद ने जिले की ग्रामीण राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुखिया संघ ने इस मुद्दे को बेहद गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि प्रशासन ने समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो संघ व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा। संघ के सदस्यों ने बताया कि गांवों में कई ऐसे परिवार हैं जो कच्चे घरों में रहने को मजबूर हैं और वर्षों से आवास योजना के तहत पक्का मकान मिलने की आस लगाए बैठे थे। लेकिन जब नई सूची जारी हुई, तो उन पात्र लाभार्थियों के नाम उसमें शामिल ही नहीं पाए गए। इसके विपरीत, कई ऐसे लोगों के नाम सूची में दर्ज किए गए हैं जो आर्थिक रूप से संपन्न हैं और पहले से ही पक्के मकानों में निवास कर रहे हैं।

इस मामले को लेकर मुखिया संघ ने सीधे तौर पर जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। संघ ने औरंगाबाद के जिला पदाधिकारी से आधिकारिक रूप से मांग की है कि जिले की सभी पंचायतों में प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों का दोबारा सर्वेक्षण कराया जाए। संघ का कहना है कि यह पुनः सर्वे पूरी तरह से पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से होना चाहिए, ताकि असली जरूरतमंद और गरीब परिवारों की पहचान की जा सके। मुखिया संघ ने जिला पदाधिकारी को यह भी सुझाव दिया है कि इस सर्वेक्षण की प्रक्रिया में संबंधित पंचायतों के मुखियाओं और वार्ड सदस्यों को भी शामिल किया जाए, क्योंकि वे अपने क्षेत्र के वास्तविक हालात और गरीब परिवारों की स्थिति से सबसे बेहतर तरीके से परिचित होते हैं।

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) केंद्र सरकार की एक अत्यंत महत्वाकांक्षी और लोकप्रिय योजना है, जिसका मुख्य उद्देश्य देश के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले बेघर और कच्चे घरों में निवास करने वाले गरीब परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत लाभार्थियों का चयन सामाजिक-आर्थिक और जातिगत जनगणना (एसईसीसी) के आंकड़ों तथा अन्य निर्धारित मानदंडों के आधार पर किया जाता है। योजना के दिशानिर्देशों के अनुसार, जिन परिवारों के पास पहले से पक्का मकान है या जो आयकर दाता हैं, उन्हें इस योजना का लाभ नहीं दिया जा सकता है। ऐसे में औरंगाबाद जिले में सक्षम लोगों को लाभार्थी सूची में शामिल करने के आरोप सीधे तौर पर केंद्र सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना के नियमों और मूल उद्देश्य दोनों के उल्लंघन को दर्शाते हैं।

मुखिया संघ के प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आवास योजना की सूची को लेकर हमेशा से संवेदनशीलता रही है। जब भी कोई नई सूची जारी होती है, तो गांवों में इसे लेकर असंतोष देखने को मिलता है। लेकिन इस बार जो आरोप लगाए जा रहे हैं, वे बहुत गंभीर हैं। संघ के सदस्यों ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी व्यक्ति विशेष या अधिकारी के खिलाफ नहीं है, बल्कि उन अनियमितताओं के खिलाफ है जो गरीबों के अधिकारों का हनन कर रही हैं। उन्होंने कहा कि अगर एक गरीब परिवार को उसका हक नहीं मिलेगा और वह छत के बिना रहेगा, तो जनप्रतिनिधि होने के नाते उनकी जिम्मेदारी बनती है कि वे इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएं।

इस पूरे मामले में यह भी ध्यान देने योग्य है कि आवास योजना के लाभार्थियों का चयन एक तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसमें पंचायत स्तर से लेकर ब्लॉक और जिला स्तर तक कई अधिकारियों की भूमिका होती है। ऐसे में जब मुखिया संघ जैसे प्रतिनिधि संगठन खुले तौर पर गड़बड़ी के आरोप लगाते हैं और दोबारा सर्वे की मांग करते हैं, तो यह प्रशासन के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन जाती है। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि योजना का लाभ वास्तव में उन लोगों तक पहुंचे जिनके लिए यह बनाई गई है।

वहीं, दूसरी ओर इस बात की भी अनिश्चितता बनी हुई है कि जिला प्रशासन मुखिया संघ की इन मांगों पर कितनी जल्दी और किस प्रकार से संज्ञान लेगा। क्या जिला पदाधिकारी द्वारा जिले की सभी पंचायतों में दोबारा सर्वे कराने का आदेश दिया जाएगा, या फिर मौजूदा सूची की ही किसी अन्य माध्यम से जांच कराई जाएगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। फिलहाल, मुखिया संघ ने अपना रुख कड़ा रखते हुए आंदोलन की चेतावनी दे दी है, जिससे आने वाले दिनों में औरंगाबाद जिले में आवास योजना को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक गहमागहमी बढ़ने की पूरी संभावना है। ग्रामीणों और लाभार्थियों की निगाहें अब जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।