दमोह के हटा में कांग्रेस के काला दिवस प्रदर्शन के दौरान पुतला दहन को लेकर पुलिस और कार्यकर्ताओं में झड़प, थाना प्रभारी के दोनों हाथ जले

दमोह। मध्य प्रदेश के दमोह जिले के हटा नगर में गुरुवार को कांग्रेस पार्टी द्वारा आयोजित काला दिवस प्रदर्शन के दौरान एक बड़ी घटना सामने आई है। इस प्रदर्शन के दौरान जब कांग्रेस कार्यकर्ता प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृहमंत्री और मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला दहन कर रहे थे, तभी पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच तीखी झूमाझटकी हो गई। पुलिस ने पुतलों को छीनने का प्रयास किया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति उत्पन्न हो गई। इस घटनाक्रम के दौरान हटा थाना प्रभारी सुधीर बेगी के दोनों हाथ मामूली रूप से जल गए। यह पूरी घटना पुतला दहन के समय हुई हंगामेबाजी का परिणाम बताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार, कांग्रेस पार्टी ने गुरुवार को पूरे देश में काला दिवस मनाया। इसी क्रम में दमोह जिले के हटा में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं ने एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपना गुस्सा व्यक्त किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला फूंकने की तैयारी की थी। कार्यकर्ताओं ने इन तीनों के इस्तीफे की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। उनका आरोप था कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बनाया जा रहा है और सरकार जनविरोधी नीतियां अपना रही है।
प्रदर्शन उस समय उग्र हो गया जब कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुतलों में आग लगाने की कोशिश की। मौके पर तैनात पुलिस बल ने पुतला दहन को रोकने और पुतलों को छीनने का प्रयास किया। पुलिस के इस कदम से कांग्रेस कार्यकर्ता भड़क गए और उन्होंने पुतलों को बचाने के लिए पुलिसकर्मियों से झूमाझटकी शुरू कर दी। दोनों तरफ से धक्का-मुक्की होने लगी और माहौल तनावपूर्ण हो गया। इसी खींचतान के दौरान पुतले में लगी आग की चपेट में आने से हटा थाना प्रभारी सुधीर बेगी के दोनों हाथ जल गए। हालांकि, बताया जा रहा है कि उनकी चोटें मामूली हैं, लेकिन इस घटना ने पूरे प्रदर्शन को एक हिंसक मोड़ दे दिया।
थाना प्रभारी के घायल होने की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। अन्य पुलिस अधिकारियों ने तुरंत स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। प्रदर्शन स्थल पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया ताकि कोई और अप्रिय घटना न हो सके। पुलिस ने कार्यकर्ताओं को तितर-बितर करने के लिए सख्ती बरती। इस दौरान कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। घटनास्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बना रहा, जिसे शांत कराने में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
कांग्रेस पार्टी ने गुरुवार को काला दिवस मनाने का निर्णय लिया था, जिसके तहत देशभर में विभिन्न जगहों पर विरोध प्रदर्शन किए गए। हटा में हुए इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य केंद्र सरकार की नीतियों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली के खिलाफ आवाज उठाना था। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट रूप से प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की। उनका कहना था कि वर्तमान सरकार लोकतंत्र की मूल भावनाओं के विपरीत काम कर रही है और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
थाना प्रभारी सुधीर बेगी के हाथ जलने की घटना के बाद उनके प्राथमिक उपचार की व्यवस्था की गई। चिकित्सकों ने उनकी चोटों को मामूली बताया है। हालांकि, पुलिस अधिकारी के साथ हुई इस घटना को लेकर प्रशासनिक स्तर पर गंभीरता दिखाई जा रही है। यह माना जा रहा है कि पुलिस इस मामले में कार्रवाई कर सकती है और उन कार्यकर्ताओं की पहचान की जा रही है जिन्होंने पुतला दहन के दौरान पुलिस के साथ झूमाझटकी की।
दमोह जिले के हटा नगर में हुई इस घटना ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। एक ओर जहां कांग्रेस कार्यकर्ता अपने प्रदर्शन को सफल और सरकार के खिलाफ जनभावनाओं की अभिव्यक्ति बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पुलिस प्रशासन ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। पुतला दहन जैसे कार्यक्रमों में अक्सर इस तरह की घटनाएं होती रहती हैं, लेकिन थाना प्रभारी के सीधे तौर पर घायल होने से यह मामला अधिक संवेदनशील बन गया है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद हटा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक कड़ा कर दिया गया है। किसी भी प्रकार के अनचाहे विवाद या तनाव को रोकने के लिए पुलिस लगातार गश्त कर रही है। कांग्रेस के काला दिवस प्रदर्शन के दौरान हुई इस झूमाझटकी और थाना प्रभारी के घायल होने की खबर पूरे दमोह जिले में तेजी से फैल गई। अब यह देखना होगा कि इस घटना को लेकर पुलिस प्रशासन क्या कानूनी कदम उठाता है और कांग्रेस पार्टी अपनी मांगों को लेकर आगे क्या रणनीति अपनाती है। फिलहाल, हटा में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन राजनीतिक गर्माहट बरकरार है।

