सुकमा: विस्फोटक नष्ट करने के दौरान हुआ भीषण ब्लास्ट, CRPF के 4 जवान घायल; दो की हालत गंभीर, कोंटा अस्पताल में चल रहा इलाज

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है। सुकमा जिले में सुरक्षा बलों द्वारा विस्फोटकों को नष्ट करने की प्रक्रिया के दौरान अचानक एक जोरदार ब्लास्ट हो गया। इस हादसे में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के चार जवान घायल हो गए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इनमें से दो जवानों की हालत गंभीर बताई जा रही है। घटना के तुरंत बाद सभी घायल जवानों को आनन-फानन में इलाज के लिए कोंटा अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका उपचार जारी है। यह पूरी घटना सुकमा जिले के एलार्मडगु कैंप क्षेत्र में हुई है।
विस्तृत जानकारी के मुताबिक, छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में सुरक्षा बल नियमित रूप से सर्च ऑपरेशन और क्षेत्र को सुरक्षित बनाने का अभियान चलाते रहते हैं। इसी कड़ी में एलार्मडगु कैंप के समीप विस्फोटकों को नष्ट करने का कार्य किया जा रहा था। बताया जा रहा है कि जब सीआरपीएफ के जवान इन विस्फोटकों को निष्क्रिय या नष्ट करने की प्रक्रिया में जुटे हुए थे, तभी अचानक एक अनियंत्रित ब्लास्ट हो गया। इस विस्फोट की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के क्षेत्र में दहशत का माहौल पैदा हो गया। धमाके के तुरंत बाद मौके पर मौजूद अन्य जवानों ने राहत और बचाव कार्य शुरू किया और घायल साथियों को सुरक्षित निकाला।
इस दुर्घटना में सीआरपीएफ के कुल चार जवानों को चोटें आई हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, चारों घायल जवानों को प्राथमिक उपचार देने के बाद बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए कोंटा स्थित अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कोंटा अस्पताल में डॉक्टरों की टीम घायल जवानों का इलाज कर रही है। हालांकि, चार में से दो जवानों की स्थिति गंभीर बनी हुई है। गंभीर रूप से घायल जवानों को विशेषज्ञ चिकित्सा की आवश्यकता पड़ सकती है, लेकिन फिलहाल उनका उपचार कोंटा अस्पताल में ही जारी रखा गया है। अभी तक घायल जवानों के नाम, उनके गृह राज्य या उनकी सटीक उम्र के बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
सुकमा जिला छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग का हिस्सा है और इसे देश के सबसे अधिक नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में गिना जाता है। यहां सुरक्षा बलों को लगातार नक्सलियों द्वारा बिछाए गए आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) और अन्य विस्फोटकों का सामना करना पड़ता है। सुरक्षा बल जब किसी क्षेत्र में सर्चिंग करते हैं, तो कई बार उन्हें संदिग्ध विस्फोटक मिलते हैं, जिन्हें आम जनता और सुरक्षाकर्मियों की जान-माल की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वहीं नष्ट करना पड़ता है। विस्फोटकों को नष्ट करना एक अत्यंत जोखिम भरा कार्य होता है और इसके लिए विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। बावजूद इसके, कभी-कभी तकनीकी खराबी या विस्फोटक की प्रकृति के कारण ऐसे हादसे हो जाते हैं।
एलार्मडगु कैंप सुकमा जिले के महत्वपूर्ण सुरक्षा कैंपों में से एक है। इस कैंप से सुरक्षा बल आसपास के जंगलों और गांवों में गश्त और सर्च ऑपरेशन के लिए निकलते हैं। शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को हुई यह घटना सुरक्षा बलों के लिए एक बार फिर उस चुनौतीपूर्ण माहौल की याद दिलाती है जिसमें वे प्रतिदिन काम करते हैं। छत्तीसगढ़ पुलिस और सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों को इस घटना की सूचना दे दी गई है। माना जा रहा है कि घटना की विस्तृत जांच की जाएगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि विस्फोटक नष्ट करने की प्रक्रिया के दौरान किस स्तर पर चूक हुई या क्या यह एक अप्रत्याशित तकनीकी दुर्घटना थी।
बस्तर क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच संघर्ष जारी है। इस दौरान कई बार सुरक्षा बलों के जवानों को आईईडी ब्लास्ट और एंबुश का शिकार होना पड़ा है। विस्फोटकों को निष्क्रिय करने के दौरान होने वाली दुर्घटनाएं भी समय-समय पर सामने आती रहती हैं। सुरक्षा एजेंसियां हमेशा अपने जवानों को बेहतर सुरक्षा उपकरण और प्रशिक्षण देने का प्रयास करती हैं, ताकि ऐसी दुर्घटनाओं को कम किया जा सके।
वन्दे भारत न्यूज़ की ओर से इस घटना को लेकर जैसे-जैसे और अधिक जानकारी सामने आएगी, उसे अपडेट किया जाएगा। फिलहाल कोंटा अस्पताल में भर्ती सभी चार सीआरपीएफ जवानों के स्वास्थ्य पर डॉक्टरों की टीम लगातार नजर बनाए हुए है। गंभीर रूप से घायल दो जवानों की स्थिति को देखते हुए चिकित्सक हर संभव प्रयास कर रहे हैं। प्रशासन और सुरक्षा बलों की तरफ से अभी तक इस मामले में कोई औपचारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी नहीं की गई है, लेकिन घटना की पुष्टि स्थानीय सूत्रों और अस्पताल प्रबंधन की तरफ से मिली जानकारी के आधार पर हो चुकी है। सुकमा जैसे संवेदनशील जिले में सुरक्षा बलों का यह बलिदान और उनके द्वारा झेली जा रही कठिनाइयां राष्ट्र की सुरक्षा व्यवस्था का एक अहम हिस्सा हैं।

