Sat, 10 Oct 202612:48 PM
Sat, Oct 10, 2026Updated 12:48 PM IST
होम › मध्य प्रदेश

इंदौर: MGM मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया को NGS मशीन खरीदी मामले में आरोप पत्र जारी, 8 करोड़ की खरीद पर लगे तीन गंभीर आरोप

WhatsAppFacebookX

इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित महात्मा गांधी मेमोरियल (MGM) मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया के खिलाफ विभागीय कार्रवाई तेज हो गई है। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने डॉ. घनघोरिया के खिलाफ एक विवादास्पद NGS (नेक्स्ट जनरेशन सीक्वेंसिंग) मशीन की खरीद प्रक्रिया को लेकर औपचारिक रूप से आरोप पत्र जारी किया है। यह कार्रवाई लगभग 8 करोड़ रुपये की लागत वाली नई मशीन की खरीद में सामने आई कथित अनियमितताओं के आधार पर की गई है। विभाग द्वारा जारी किए गए इस आरोप पत्र में डॉ. घनघोरिया पर कुल तीन गंभीर आरोप लगाए गए हैं और उन्हें इन आरोपों का जवाब देने के लिए 15 दिन का समय निर्धारित किया गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने यह अनुशासनात्मक कार्रवाई मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के तहत की है। विशेष रूप से, डॉ. अरविंद घनघोरिया के खिलाफ उक्त नियम के नियम 14(3) के प्रावधानों का उपयोग करते हुए आरोप पत्र जारी किया गया है। सरकारी सेवा नियमों के तहत नियम 14(3) का संबंध किसी भी सरकारी सेवक के खिलाफ विभागीय जांच और अनुशासनात्मक कार्यवाही की प्रक्रिया से होता है। इसके तहत आरोपी अधिकारी को अपने ऊपर लगाए गए आरोपों के संबंध में अपना स्पष्टीकरण या बचाव पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाता है। विभाग ने डॉ. घनघोरिया को इस आरोप पत्र की प्राप्ति के 15 दिन के भीतर अपना लिखित जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो विभाग आगे की कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगा।

यह पूरा मामला MGM मेडिकल कॉलेज के लिए खरीदी गई एक अत्याधुनिक NGS मशीन से जुड़ा हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, इस नई मशीन की खरीद पर लगभग 8 करोड़ रुपये का भारी व्यय किया गया था। NGS यानी नेक्स्ट जनरेशन सीक्वेंसिंग तकनीक आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और जीनोमिक्स के क्षेत्र में एक बेहद महत्वपूर्ण और उन्नत तकनीक मानी जाती है। इस मशीन का उपयोग मुख्य रूप से डीएनए और आरएनए की सीक्वेंसिंग, आनुवंशिक विकारों की सटीक पहचान, संक्रामक रोगों के निदान और कैंसर जैसे गंभीर रोगों के आणविक स्तर पर अध्ययन के लिए किया जाता है। चिकित्सा शिक्षा और उच्च स्तरीय शोध कार्यों के लिए ऐसी मशीनों की आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। हालांकि, जब इतनी बड़ी राशि की खरीद में नियमों के उल्लंघन या प्रक्रियागत कमियों की बात सामने आती है, तो विभाग इसे गंभीरता से लेता है।

आरोप पत्र में डॉ. घनघोरिया पर कुल तीन आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, स्रोत सामग्री में इन तीनों आरोपों की विस्तृत और बिंदुवार व्याख्या उपलब्ध नहीं है, लेकिन यह स्पष्ट है कि ये तीनों आरोप 8 करोड़ रुपये की NGS मशीन की खरीद प्रक्रिया से ही सीधे तौर पर संबंधित हैं। सरकारी खरीद नीतियों और वित्तीय नियमों के तहत किसी भी उच्च मूल्य की मशीन या उपकरण की खरीद करते समय निविदा प्रक्रिया, तकनीकी मानकों की जांच, वित्तीय स्वीकृति और अन्य कई दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य होता है। ऐसा प्रतीत होता है कि इस खरीद प्रक्रिया में इन नियमों का पालन ठीक से नहीं किया गया, जिसके परिणामस्वरूप विभाग को यह कदम उठाना पड़ा है।

MGM मेडिकल कॉलेज इंदौर मध्य प्रदेश के सबसे प्रमुख और प्रतिष्ठित सरकारी चिकित्सा संस्थानों में से एक है। यहां हर दिन हजारों मरीज इलाज के लिए आते हैं और बड़ी संख्या में चिकित्सा छात्र शिक्षा ग्रहण करते हैं। ऐसे संस्थान के डीन का पद अत्यंत जिम्मेदारी वाला होता है। डीन संस्थान के समग्र प्रशासन, चिकित्सा शिक्षा, अस्पताल प्रबंधन और उपकरणों की खरीद सहित सभी महत्वपूर्ण कार्यों का नेतृत्व करते हैं। इसलिए, जब किसी संस्थान के सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी पर ही खरीद में अनियमितता के आरोप लगते हैं, तो यह मामला न केवल प्रशासनिक बल्कि सार्वजनिक चर्चा का विषय भी बन जाता है।

अब सभी की निगाहें डॉ. अरविंद घनघोरिया द्वारा दिए जाने वाले जवाब पर टिकी हुई हैं। उन्हें 15 दिन की निर्धारित समय सीमा के भीतर लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के समक्ष अपना पक्ष रखना होगा। उनके द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले स्पष्टीकरण और दस्तावेजों के आधार पर ही विभाग यह तय करेगा कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई की जानी चाहिए। यदि विभाग उनके जवाब से संतुष्ट नहीं होता है, तो नियमों के तहत आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई, जिसमें विभागीय जांच आयोग का गठन या अन्य दंडात्मक कदम शामिल हो सकते हैं, उठाए जाने की संभावना रहती है। फिलहाल, विभाग ने आरोप पत्र जारी कर अपनी प्रक्रिया पूरी कर ली है और अब आरोपी अधिकारी के जवाब का इंतजार किया जा रहा है।

यह ध्यान रखना आवश्यक है कि वर्तमान में यह मामला विभागीय जांच और आरोप पत्र के स्तर पर है। डॉ. अरविंद घनघोरिया पर लगे आरोप अभी सिद्ध नहीं हुए हैं और उन्हें अपना बचाव पक्ष रखने का पूरा वैधानिक अधिकार प्राप्त है। वंदे भारत न्यूज़ इस मामले में तथ्यात्मक और निष्पक्ष रिपोर्टिंग के लिए प्रतिबद्ध है और भविष्य में इस मामले में होने वाले किसी भी नए विकास या विभागीय फैसले की जानकारी प्रकाशित करेगा।