मानसा: इंडिया गठबंधन ने चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर 13 करोड़ वोट काटने का लगाया आरोप, देशद्रोह का केस दर्ज करने की मांग

पंजाब के मानसा जिले में इंडिया (INDIA) गठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार तथा भारत निर्वाचन आयोग के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए एक विशाल विरोध मार्च निकाला। इस प्रदर्शन के दौरान गठबंधन के नेताओं ने चुनाव आयोग पर अत्यंत गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रदर्शनकारियों ने विशेष रूप से भारत के चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए उन पर देशद्रोह का मामला दर्ज करने की पुरजोर मांग की है। इंडिया गठबंधन का आरोप है कि चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका संदिग्ध रही है और उन्होंने लगभग 13 करोड़ वोट काटने का काम किया है। मानसा की सड़कों पर उतरे गठबंधन के कार्यकर्ताओं ने हाथों में तख्तियां और बैनर लिए हुए थे, जिन पर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लिखे हुए थे।
इंडिया गठबंधन के नेताओं ने विरोध मार्च को संबोधित करते हुए कहा कि लोकतंत्र में चुनाव आयोग की भूमिका एक स्वतंत्र और निष्पक्ष संस्था की होती है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में ऐसा प्रतीत हो रहा है कि यह संस्था अपने मूल उद्देश्य से भटक गई है। गठबंधन के प्रवक्ताओं ने दावा किया कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं, जिसके लिए वे सीधे तौर पर चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। उनके अनुसार, 13 करोड़ वोटों के कथित रूप से काटे जाने का मामला अत्यंत गंभीर है और यह भारतीय लोकतंत्र की बुनियाद पर हमले के समान है। नेताओं ने कहा कि यदि इतनी बड़ी संख्या में वोटों में हेराफेरी या उन्हें काटने का आरोप सत्य है, तो यह किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान इंडिया गठबंधन के कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार पर भी तीखे प्रहार किए। उनका कहना था कि केंद्र की सत्ताधारी सरकार चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक संस्थानों का दुरुपयोग कर रही है ताकि विपक्षी दलों को कमजोर किया जा सके और चुनावी प्रक्रिया को अपने पक्ष में मोड़ा जा सके। मानसा में आयोजित इस विशाल विरोध मार्च में शामिल विभिन्न दलों के नेताओं ने एक स्वर में मांग की कि चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ तत्काल देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में इतने बड़े स्तर पर कथित हस्तक्षेप करना देश के साथ गद्दारी के बराबर है। गठबंधन के नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे भविष्य में और भी बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
पंजाब के मानसा जिले में निकाले गए इस विरोध मार्च ने स्थानीय राजनीति में भी गर्माहट पैदा कर दी है। इंडिया गठबंधन के कई घटक दलों के स्थानीय नेता और कार्यकर्ता भारी संख्या में इस प्रदर्शन में शामिल हुए। मार्च शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरा, जिस दौरान प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल भी तैनात रहा, हालांकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। गठबंधन के नेताओं ने आम जनता से भी अपील की है कि वे लोकतंत्र को बचाने के लिए इस लड़ाई में उनके साथ जुड़ें।
ज्ञात हो कि भारत निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्षी दलों द्वारा समय-समय पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और वोटर वेरिफायबल पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपैट) की पारदर्शिता पर भी विपक्ष लगातार अपनी चिंताएं व्यक्त करता रहा है। मानसा में इंडिया गठबंधन का यह विरोध मार्च उसी असंतोष की एक कड़ी के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें अब आरोपों का स्तर काफी तीखा हो गया है। 13 करोड़ वोट काटने का आरोप और चुनाव आयुक्त पर देशद्रोह का केस दर्ज करने की मांग ने इस पूरे मामले को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है।
हालांकि, अभी तक भारत निर्वाचन आयोग या चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की ओर से इंडिया गठबंधन द्वारा लगाए गए इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह स्पष्ट नहीं है कि आयोग इन आरोपों का खंडन करेगा या इस मामले में कोई स्पष्टीकरण जारी करेगा। वहीं, केंद्र सरकार की तरफ से भी मानसा में हुए इस विरोध प्रदर्शन और लगाए गए आरोपों पर अभी तक कोई बयान नहीं दिया गया है। इंडिया गठबंधन के नेताओं ने कहा है कि वे इस मुद्दे को संसद और अन्य संवैधानिक मंचों पर भी जोरदार तरीके से उठाएंगे। उनका कहना है कि जब तक चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की जाती और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका यह संघर्ष जारी रहेगा। मानसा का यह विरोध मार्च पंजाब सहित पूरे देश में विपक्षी एकता और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों को एक बार फिर प्रमुखता से रेखांकित करता है।

