बालाघाट में कांग्रेस का पैदल मार्च: मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग, गांधी प्रतिमा पर दो घंटे चला धरना-प्रदर्शन

बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में गुरुवार शाम भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर पैदल मार्च निकाला। यह पैदल मार्च शाम 7 बजे बालाघाट स्थित कांग्रेस कार्यालय से शुरू हुआ और शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए गांधी प्रतिमा तक पहुंचा। गांधी प्रतिमा पर पहुंचने के बाद कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने लगभग दो घंटे तक धरना देकर अपना विरोध दर्ज कराया। इस दौरान कांग्रेस विधायक अनुभा मुंजारे भी प्रदर्शन में शामिल रहीं और उन्होंने केंद्र सरकार तथा चुनाव आयोग के खिलाफ तीखे तेवर दिखाए।
कांग्रेस पार्टी द्वारा आयोजित इस पैदल मार्च का उद्देश्य देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं, विशेषकर निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर सवाल उठाना था। गुरुवार शाम ठीक 7 बजे बालाघाट के कांग्रेस कार्यालय से कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए अपनी यात्रा शुरू की। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए कांग्रेसजनों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग वाले नारे लगाए। यह मार्च शहर के विभिन्न हिस्सों से होकर गुजरा, जिसमें आम नागरिकों का भी ध्यान इस विरोध प्रदर्शन की ओर गया। मार्च में शामिल नेताओं का कहना था कि चुनाव आयोग को संविधान ने एक स्वतंत्र और निष्पक्ष संस्था के रूप में स्थापित किया है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में उसकी स्वायत्तता खतरे में है।
पैदल मार्च के समापन के बाद सभी कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता बालाघाट स्थित गांधी प्रतिमा पर एकत्र हुए। यहां महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष बैठकर कांग्रेसजनों ने लगभग दो घंटे तक धरना दिया। इस धरना-प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस की स्थानीय विधायक अनुभा मुंजारे ने संबोधित करते हुए केंद्र की मोदी सरकार पर सीधा हमला बोला। विधायक अनुभा मुंजारे ने आरोप लगाते हुए कहा कि मोदी सरकार लोकतंत्र का गला घोंट रही है। उन्होंने कहा कि देश में लोकतांत्रिक मूल्यों और संस्थाओं की गरिमा को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है, लेकिन वर्तमान केंद्र सरकार के कार्यकाल में इन संस्थाओं की स्वतंत्रता पर लगातार प्रहार हो रहे हैं।
अनुभा मुंजारे ने अपने संबोधन में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पद से हटने की मांग को दोहराया। उनका कहना था कि चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को पूरी तरह से निष्पक्ष और किसी भी राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर काम करना चाहिए। कांग्रेस नेताओं ने धरने के दौरान यह भी स्पष्ट किया कि यह विरोध प्रदर्शन केवल किसी एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह पूरे लोकतांत्रिक ढांचे और संवैधानिक संस्थाओं की रक्षा के लिए उठाया गया एक कदम है। पार्टी कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में कहा कि जब तक उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया जाता, वे इस तरह के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे।
बालाघाट में हुए इस प्रदर्शन को कांग्रेस के बड़े विरोध अभियान के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस पार्टी लंबे समय से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, चुनावी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और आयोग की नियुक्तियों को लेकर सवाल उठाती रही है। गुरुवार शाम का यह पैदल मार्च और उसके बाद का धरना इसी श्रृंखला की एक कड़ी थी, जिसमें जिला स्तर पर पार्टी ने अपनी बात रखने का प्रयास किया। गांधी प्रतिमा पर दो घंटे तक चले इस धरने में बड़ी संख्या में स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों और नेताओं ने भाग लिया।
इस पूरे प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने यह सुनिश्चित किया कि विरोध शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो। गांधी प्रतिमा पर धरने के अंत में पार्टी नेताओं ने अपनी मांगों को दोहराया और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग वाली बात को फिर से जनता के सामने रखा। विधायक अनुभा मुंजारे के उस बयान को भी प्रदर्शन का मुख्य बिंदु बनाया गया, जिसमें उन्होंने मोदी सरकार पर लोकतंत्र का गला घोंटने का आरोप लगाया था। बालाघाट जिले में कांग्रेस द्वारा किए गए इस संगठित विरोध प्रदर्शन ने स्थानीय राजनीति में चर्चा का विषय बना दिया है। पार्टी ने संकेत दिए हैं कि यदि उनकी मांगों पर कोई सकारात्मक पहल नहीं होती है, तो भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं। गुरुवार शाम 7 बजे से शुरू हुआ यह पूरा कार्यक्रम रात्रि में धरने के समापन के साथ शांतिपूर्वक संपन्न हो गया।

