Sat, 10 Oct 20261:30 PM
Sat, Oct 10, 2026Updated 1:30 PM IST
होम › मध्य प्रदेश

ग्वालियर कोर्ट ने भाजपा विधायक प्रीतम लोधी के बेटे दिनेश लोधी का जारी किया स्थायी गिरफ्तारी वारंट, पुलिस ने बताया आवारा किस्म का

WhatsAppFacebookX

ग्वालियर। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले की पिछोर विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक प्रीतम लोधी के बेटे दिनेश लोधी के खिलाफ ग्वालियर की एक अदालत ने स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है। यह वारंट पुरानी छावनी थाना क्षेत्र में दर्ज हत्या के प्रयास के एक मामले में जारी किया गया है। इस मामले में दिनेश लोधी लगभग दो साल से अदालत के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ है। अदालत में पुलिस की ओर से दिए गए बयान में कहा गया है कि दिनेश लोधी आवारा किस्म का व्यक्ति है और वह पिछले तीन महीनों में दो बार फरार घोषित किया जा चुका है।

वंदे भारत न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, यह पूरा मामला ग्वालियर की स्थानीय अदालत से जुड़ा हुआ है, जहां पुरानी छावनी थाना क्षेत्र में दर्ज एक गंभीर आपराधिक मामले की सुनवाई चल रही है। इस मामले में हत्या के प्रयास की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसमें भाजपा विधायक प्रीतम लोधी के पुत्र दिनेश लोधी को आरोपित बनाया गया है। हालांकि, इस गंभीर मामले में दिनेश लोधी लगातार अदालती कार्यवाही से अनुपस्थित रहा है। उसकी यह अनुपस्थिति कोई नई या हालिया घटना नहीं है, बल्कि वह लगभग दो वर्षों से इस मामले में अदालत के सामने पेश नहीं हुआ है।

आरोपी की लगातार अनुपस्थिति और कानूनी प्रक्रिया में सहयोग न करने के रवैये को देखते हुए, अदालत ने अब सख्त रुख अपनाते हुए उसके खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी करने का आदेश दिया है। स्थायी गिरफ्तारी वारंट का अर्थ यह होता है कि अब पुलिस किसी भी समय और कहीं भी आरोपी को गिरफ्तार कर सकती है, और जब तक उसे गिरफ्तार करके अदालत के समक्ष पेश नहीं किया जाता, तब तक यह वारंट निरंतर प्रभावी रहेगा। यह कदम अदालत द्वारा तब उठाया गया जब यह स्पष्ट हो गया कि आरोपी नियमित रूप से न्यायिक प्रक्रिया का सामना करने से बच रहा है।

अदालत में हुई सुनवाई के दौरान पुलिस की ओर से जो बयान दर्ज कराया गया है, वह बेहद महत्वपूर्ण और चौंकाने वाला है। पुलिस ने अपने बयान में स्पष्ट रूप से कहा है कि दिनेश लोधी आवारा किस्म का व्यक्ति है। पुलिस के इस बयान से यह संकेत मिलता है कि दिनेश लोधी की गतिविधियों और उसके रहन-सहन को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की चिंताएं बढ़ी हुई हैं। इसके अलावा, पुलिस ने अदालत को यह जानकारी भी दी कि दिनेश लोधी को पिछले मात्र तीन महीनों के भीतर दो बार फरार घोषित किया जा चुका है। किसी व्यक्ति को इतने कम समय में बार-बार फरार घोषित किया जाना यह दर्शाता है कि वह कानून से बचने के लिए लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा है या छिपने का प्रयास कर रहा है।

यह मामला इसलिए भी अत्यधिक सुर्खियों में है क्योंकि आरोपी दिनेश लोधी कोई आम व्यक्ति नहीं है, बल्कि वह सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी के एक मौजूदा विधायक का बेटा है। उसके पिता प्रीतम लोधी शिवपुरी जिले की पिछोर विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर निर्वाचित विधायक हैं। एक जनप्रतिनिधि के पुत्र पर हत्या के प्रयास का मामला होना और फिर उसका दो साल तक अदालत से फरार रहना, कानून व्यवस्था और राजनीतिक जवाबदेही दोनों को लेकर कई सवाल खड़े करता है। हालांकि, इस मामले में अभी तक विधायक प्रीतम लोधी या उनके परिवार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या बयान सामने नहीं आया है।

ज्ञात हो कि पुरानी छावनी थाना क्षेत्र ग्वालियर शहर का एक प्रमुख हिस्सा है, जहां समय-समय पर आपराधिक मामले सामने आते रहते हैं। इसी थाना क्षेत्र में दर्ज हत्या के प्रयास के मामले में दिनेश लोधी की भूमिका सामने आई थी। हत्या का प्रयास भारतीय दंड संहिता की अत्यंत गंभीर धाराओं में से एक है, जिसमें कड़ी सजा का प्रावधान होता है। ऐसे में आरोपी का अदालत में पेश न होना न्यायिक प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करता है।

अब जब अदालत ने स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है, तो ग्वालियर पुलिस के सामने दिनेश लोधी को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने की बड़ी चुनौती होगी। पुलिस को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि वह आरोपी तक पहुंचे और उसे अदालत के समक्ष पेश करे। तीन महीने में दो बार फरार घोषित होने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ सकते हैं, क्योंकि आरोपी बार-बार कानून के शिकंजे से बाहर निकलने में कामयाब रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम ने ग्वालियर और शिवपुरी दोनों जिलों में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है। एक तरफ जहां विपक्षी दलों के लिए यह एक राजनीतिक मुद्दा बन सकता है, वहीं दूसरी तरफ आम जनता के बीच यह संदेश जा रहा है कि कानून का पालन सभी के लिए अनिवार्य है, चाहे वह किसी भी राजनीतिक पृष्ठभूमि से क्यों न आता हो। अदालत द्वारा स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी करना न्यायपालिका की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है कि अपराधियों को कानूनी प्रक्रिया से बचने नहीं दिया जाएगा।

फिलहाल, सभी की निगाहें अब ग्वालियर पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। यह देखा जाना बाकी है कि पुलिस दिनेश लोधी को कब और कहां से गिरफ्तार कर पाती है। साथ ही, यह भी स्पष्ट नहीं है कि गिरफ्तारी के बाद इस मामले की आगे की न्यायिक कार्यवाही किस तरह आगे बढ़ेगी। वंदे भारत न्यूज़ इस मामले पर आगे की अपडेट्स पर लगातार नजर बनाए हुए है।