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Fri, Oct 9, 2026Updated 10:12 AM IST
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रायगढ़: उड़नदस्ता टीम ने भगोरा गांव में मारा छापा, साल की 23 अवैध चिरान और औजार बरामद, वन अधिनियम के तहत मामला दर्ज

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छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में वन विभाग की उड़नदस्ता टीम ने लकड़ी तस्करों के खिलाफ एक बार फिर सख्त कार्रवाई करते हुए बड़ी मात्रा में अवैध साल की लकड़ी जब्त की है। रायगढ़ वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले भगोरा गांव में वन विभाग की विशेष उड़नदस्ता टीम ने एक संदिग्ध घर पर अचानक दबिश दी। इस दौरान छापेमारी में टीम को भारी मात्रा में अवैध रूप से रखी गई साल की चिरान मिली है। वन विभाग की ओर से की गई इस कार्रवाई से क्षेत्र में अवैध लकड़ी का कारोबार करने वालों में हड़कंप मच गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, रायगढ़ वन विभाग की उड़नदस्ता टीम को भगोरा गांव में अवैध रूप से साल की लकड़ी रखे जाने की गुप्त सूचना प्राप्त हुई थी। इसी सूचना के आधार पर उड़नदस्ता टीम ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई करते हुए भगोरा गांव स्थित एक घर पर अचानक छापा मारा। जब टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच-पड़ताल शुरू की, तो वहां से साल प्रजाति की कुल 23 चिरान बरामद की गईं। इन सभी चिरान को बिना किसी वैध अनुमति या परिवहन पत्रक के अवैध रूप से उस घर में छिपाकर रखा गया था। इसके अलावा, छापेमारी के दौरान मौके से लकड़ी की कटाई और चीराई में इस्तेमाल किए जाने वाले विभिन्न औजार भी जब्त किए गए हैं।

वन विभाग की टीम ने मौके से बरामद की गई सभी 23 साल की चिरान और अन्य औजारों को अपने कब्जे में ले लिया है। विभाग ने इस पूरे मामले में वन अधिनियम के प्रावधानों के तहत संबंधित आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इस अवैध लकड़ी का मुख्य मालिक कौन है और यह लकड़ी किस उद्देश्य के लिए तथा कहां से लाई गई थी। वन विभाग की उड़नदस्ता टीम द्वारा इस मामले में आगे की जांच जारी रखी गई है, ताकि इस अवैध कारोबार से जुड़े अन्य लोगों का भी पता लगाया जा सके।

साल की लकड़ी छत्तीसगढ़ के वनों में पाई जाने वाली सबसे महत्वपूर्ण और बहुमूल्य प्रजातियों में से एक है। राज्य के वनों में साल के पेड़ों की भारी संख्या होने के कारण तस्करों की नजर हमेशा इसी लकड़ी पर रहती है। अवैध रूप से साल के पेड़ों की कटाई करके उनकी चिरान तैयार करना और उसे बाजार में बेचना वन विभाग के नियमों का सीधा उल्लंघन है। ऐसे मामलों में वन अधिनियम के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। रायगढ़ वन परिक्षेत्र में समय-समय पर इस तरह की अवैध गतिविधियां सामने आती रहती हैं, जिस पर अंकुश लगाने के लिए वन विभाग की टीमें लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।

उड़नदस्ता टीम की यह कार्रवाई रायगढ़ वन परिक्षेत्र में लकड़ी तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान का हिस्सा बताई जा रही है। वन विभाग की उड़नदस्ता टीमों का गठन ही इस उद्देश्य से किया जाता है कि वे गोपनीय सूचनाओं के आधार पर त्वरित कार्रवाई कर सकें और वन अपराधों को रोक सकें। भगोरा गांव में की गई इस सफल छापेमारी ने साबित किया है कि विभाग की निगरानी प्रणाली सक्रिय है और अवैध काम करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

वन अधिकारियों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ लोग वनों से अवैध रूप से लकड़ी काटकर उसे अपने घरों या खलिहानों में छिपाकर रखते हैं और बाद में ऊंची कीमत पर बाजार में बेच देते हैं। यह प्रक्रिया न केवल वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचाती है, बल्कि पर्यावरण के संतुलन को भी बिगाड़ती है। यही कारण है कि वन विभाग अब पहले से अधिक सख्ती के साथ ऐसे मामलों से निपट रहा है। भगोरा गांव में 23 चिरान और औजारों की बरामदगी इस बात का संकेत है कि यहां अवैध कटाई का धंधा व्यवस्थित तरीके से किया जा रहा था।

इस कार्रवाई के बाद रायगढ़ वन परिक्षेत्र के अन्य गांवों में भी वन विभाग की टीमों ने अपनी गश्त और निगरानी बढ़ा दी है। विभाग की ओर से स्थानीय ग्रामीणों से भी अपील की जाती रही है कि वे वन संपदा की सुरक्षा में सहयोग करें और यदि उन्हें किसी प्रकार की अवैध कटाई या लकड़ी तस्करी की जानकारी मिलती है, तो तुरंत वन विभाग को सूचित करें। फिलहाल, वन अधिनियम के तहत दर्ज किए गए इस मामले में आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है और बरामद की गई साल की चिरान को विभागीय डिपो में सुरक्षित रखवा दिया गया है।