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Fri, Oct 9, 2026Updated 12:23 PM IST
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झलौन गांव की महिला सरपंच ने सचिव पर लगाए गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप, मोबाइल छीनकर OTP डालने और 40 लाख के काम न दिखने का मामला, सीईओ ने दिए जांच के आदेश

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मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले से ग्राम पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। झलौन गांव की महिला सरपंच ने पंचायत सचिव पर गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई है। सरपंच का आरोप है कि सचिव उनके साथ अभद्रता करता है, उनका मोबाइल फोन छीन लेता है और बिना उनकी अनुमति के ओटीपी (OTP) डालकर सरकारी खातों से वित्तीय लेनदेन करता है। इसके अलावा, गांव में लगभग 40 लाख रुपये के विकास कार्यों के कागजों पर पूरा होने का दावा किया गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर ये कार्य कहीं दिखाई नहीं दे रहे हैं। इस पूरे मामले को संज्ञान में लेते हुए जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।

महिला सरपंच ने अपनी शिकायत में विस्तार से बताया है कि पंचायत सचिव किस तरह से उनके अधिकारों का हनन कर रहा है। सरपंच ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “सचिव मेरा मोबाइल छीन लेता है। गांव के विकास का सरकारी पैसा कब आता है और कब निकल जाता है, मुझे पता ही नहीं चलता।” यह बयान ग्रामीण शासन व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी और महिला जनप्रतिनिधियों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार की एक गंभीर तस्वीर पेश करता है। सरपंच के अनुसार, सचिव उनके मोबाइल फोन को जबरन अपने कब्जे में ले लेता है ताकि बैंक खाते या सरकारी पोर्टल पर आने वाले ओटीपी को वह स्वयं दर्ज कर सके। इस प्रक्रिया में सरपंच को पूरी तरह से अनभिज्ञ रखा जाता है, जिससे उन्हें यह तक नहीं पता चल पाता कि पंचायत के खाते में सरकार की ओर से कितनी राशि जारी हुई है और उसे किन मदों में खर्च कर दिया गया है।

ग्राम पंचायतों में डिजिटल भुगतान प्रणाली लागू होने के बाद से ओटीपी आधारित लेनदेन अनिवार्य हो गया है। ऐसे में यदि कोई सचिव निर्वाचित जनप्रतिनिधि का मोबाइल छीनकर खुद ओटीपी दर्ज कर रहा है, तो यह ई-गवर्नेंस के नियमों और वित्तीय सुरक्षा मानकों का सीधा उल्लंघन है। सरपंच की इस शिकायत ने प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि यह मामला केवल व्यक्तिगत विवाद का नहीं, बल्कि सीधे तौर पर सरकारी धन के दुरुपयोग और साइबर सुरक्षा से जुड़े नियमों के उल्लंघन का है।

सरपंच द्वारा लगाए गए आरोपों का दूसरा और सबसे गंभीर पहलू गांव में हुए तथाकथित विकास कार्यों से जुड़ा है। महिला सरपंच ने दावा किया है कि झलौन गांव में लगभग 40 लाख रुपये के विकास कार्य किए जाने का रिकॉर्ड कागजों पर मौजूद है। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार इतनी बड़ी राशि गांव के बुनियादी ढांचे, सड़कों, नालियों या अन्य जनोपयोगी योजनाओं पर खर्च की गई है। हालांकि, सरपंच का कहना है कि जब वे गांव का निरीक्षण करती हैं, तो इनमें से कोई भी काम जमीन पर दिखाई नहीं देता है। 40 लाख रुपये की यह राशि किसी छोटे गांव के लिए बहुत बड़ी होती है, और यदि वास्तव में यह राशि खर्च हो गई है, तो गांव की तस्वीर बदली हुई नजर आनी चाहिए थी। लेकिन सरपंच के अनुसार, गांव में विकास कार्यों का कोई नामोनिशान नहीं है, जो इस बात की ओर इशारा करता है कि कागजों पर फर्जी बिलिंग करके सरकारी खजाने को भारी चूना लगाया गया हो सकता है।

महिला सरपंच की इस विस्तृत और गंभीर शिकायत के बाद स्थानीय प्रशासन हरकत में आया है। मामले की जानकारी मिलते ही जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) ने तत्काल संज्ञान लिया है। सीईओ ने इस पूरे प्रकरण की जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि क्या सचिव वास्तव में सरपंच का मोबाइल छीनकर अनधिकृत रूप से ओटीपी का उपयोग कर रहा था। इसके साथ ही, 40 लाख रुपये के विकास कार्यों का भौतिक सत्यापन (फिजिकल वेरिफिकेशन) भी किया जाएगा, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कागजों पर दर्ज किए गए काम वास्तव में जमीन पर हुए भी हैं या नहीं। यदि जांच में सरपंच के आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित सचिव के खिलाफ भ्रष्टाचार, सरकारी धन के गबन और कदाचार के तहत कड़ी अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

यह मामला मध्य प्रदेश की पंचायती राज व्यवस्था में व्याप्त चुनौतियों को भी उजागर करता है। कई बार ग्रामीण क्षेत्रों में महिला जनप्रतिनिधियों को केवल नाममात्र का पद दे दिया जाता है, जबकि वास्तविक शक्तियां और वित्तीय नियंत्रण पंचायत सचिवों या अन्य बिचौलियों के हाथों में रहता है। झलौन गांव की महिला सरपंच की हिम्मत और उनकी स्पष्ट शिकायत ने इस प्रवृत्ति पर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों और स्थानीय लोगों की नजरें अब सीईओ द्वारा शुरू की गई जांच के परिणामों पर टिकी हुई हैं। देखना यह होगा कि प्रशासन इस जांच को कितनी पारदर्शिता और तेजी से पूरा करता है और दोषी पाए जाने पर क्या कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। वंदे भारत न्यूज़ इस मामले की जांच प्रक्रिया और आगे के विकास पर लगातार नजर बनाए हुए है।