जमुई: चलती ई-रिक्शा की बैटरी फटने से भीषण आग, इंटर की दो छात्राएं झुलसीं; एक 80% जली, पटना रेफर

बिहार के जमुई जिले में शुक्रवार सुबह एक बेहद दर्दनाक और भयावह सड़क हादसा सामने आया है। यहां एक चलती ई-रिक्शा की बैटरी अचानक फट गई, जिसके बाद रिक्शा में भीषण आग लग गई। इस दुर्घटना में रिक्शा में सवार इंटरमीडिएट (इंटर) की दो छात्राएं बुरी तरह झुलस गईं। घटना के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और स्थानीय लोगों ने किसी तरह आग पर काबू पाकर दोनों छात्राओं को बाहर निकाला। गंभीर रूप से घायल दोनों छात्राओं को इलाज के लिए पहले जिला अस्पताल लाया गया, जहां से उनकी नाजुक हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर कर दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इनमें से एक छात्रा शरीर का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा झुलसने के कारण जीवन और मौत से जूझ रही है।
मिली जानकारी के मुताबिक, यह घटना शुक्रवार सुबह की है, जब कई छात्र-छात्राएं अपनी नियमित पढ़ाई के लिए ई-रिक्शा से जा रहे थे। इसी दौरान अचानक ई-रिक्शा की बैटरी में खराबी आई और वह जोरदार आवाज के साथ फट गई। बैटरी फटते ही रिक्शा के अंदर तेजी से आग फैल गई। आग इतनी भयंकर थी कि रिक्शा में सवार यात्रियों को संभलने का कोई मौका नहीं मिला। इस हादसे में विशेष रूप से इंटर की दो छात्राएं आग की चपेट में आ गईं और बुरी तरह झुलस गईं। दोनों छात्राओं की पहचान अभी विस्तार से स्पष्ट नहीं हो पाई है, लेकिन उनके इंटरमीडिएट की छात्रा होने की पुष्टि हुई है।
इस हादसे में सबसे चौंकाने वाली और लापरवाही से जुड़ी बात यह सामने आई है कि ई-रिक्शा चला रहा ड्राइवर कानों में ईयरफोन लगाए हुए था। स्रोत के अनुसार, जब रिक्शा में आग लगने की शुरुआत हुई या बैटरी में कुछ समस्या महसूस हुई, तब पीछे बैठे छात्रों ने ड्राइवर को आगाह करने की कोशिश की। हालांकि, ड्राइवर ने अपने कानों में ईयरफोन लगा रखा था, जिसके कारण उसने छात्रों की बात नहीं सुनी। अगर ड्राइवर समय रहते छात्रों की चेतावनी सुन लेता और रिक्शा को तुरंत रोक देता, तो शायद इस बड़े हादसे को टाला जा सकता था या कम से कम छात्राओं को सुरक्षित बाहर निकाला जा सकता था। ड्राइवर की यह लापरवाही इस घटना को और अधिक गंभीर बनाने का मुख्य कारण मानी जा रही है।
बैटरी फटने और आग लगने के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। आसपास के लोगों ने धुआं उठता देखा तो वे दौड़कर घटनास्थल की ओर भागे। स्थानीय लोगों ने बड़ी मशक्कत के बाद आग बुझाने का प्रयास किया और झुलसी हुई दोनों छात्राओं को ई-रिक्शा से बाहर निकाला। इसके बाद तत्काल एंबुलेंस या अन्य वाहनों की मदद से उन्हें नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने जब दोनों छात्राओं का प्राथमिक उपचार किया, तो उनकी स्थिति अत्यंत चिंताजनक पाई गई।
अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, एक छात्रा का शरीर लगभग 80 प्रतिशत तक जल चुका है, जिसके कारण उसकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। दूसरी छात्रा भी गंभीर रूप से झुलसी है। जिला अस्पताल में उपलब्ध सीमित संसाधनों को देखते हुए और दोनों छात्राओं की गंभीर स्थिति को ध्यान में रखते हुए, चिकित्सकों ने उन्हें तुरंत पटना रेफर करने का निर्णय लिया। पटना के बड़े अस्पतालों में ही इन छात्राओं के विशेषज्ञ उपचार और बर्न वार्ड की सुविधा उपलब्ध हो सकती है। दोनों छात्राओं को पटना के लिए रेफर कर दिया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।
यह घटना ई-रिक्शा संचालन में बरती जा रही सुरक्षा मानकों की अनदेखी और ड्राइवरों की लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े करती है। बिहार सहित पूरे देश में ई-रिक्शा परिवहन का एक प्रमुख साधन बन चुका है, खासकर छात्र-छात्राएं और स्कूल-कॉलेज जाने वाले बच्चे इसका सर्वाधिक उपयोग करते हैं। ऐसे में ई-रिक्शा की बैटरियों की नियमित जांच और रखरखाव अत्यंत आवश्यक है। कई बार लोकल या घटिया क्वालिटी की बैटरियों के इस्तेमाल और ओवरचार्जिंग के कारण इस प्रकार के विस्फोट होते हैं। इसके अलावा, ड्राइवर द्वारा वाहन चलाते समय ईयरफोन या मोबाइल का उपयोग करना यातायात नियमों का सीधा उल्लंघन है, जो यात्रियों की जान के लिए खतरा पैदा करता है।
जमुई की इस घटना ने पूरे इलाके में शोक और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। छात्राओं के परिजनों को जब इस हादसे की सूचना मिली तो उनका रो-रोकर बुरा हाल हो गया। अस्पताल और पटना रेफर किए जाने के दौरान परिजन बदहवास अवस्था में दिखे। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि ई-रिक्शा की बैटरियों की गुणवत्ता और ड्राइवरों के व्यवहार की सख्त जांच की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह के दर्दनाक हादसों को रोका जा सके। फिलहाल, पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने मामले का संज्ञान लिया है और आगे की कार्रवाई तथा जांच जारी है। दोनों छात्राओं के स्वास्थ्य लाभ की कामना पूरे क्षेत्र में की जा रही है।

