Fri, 09 Oct 20262:24 PM
Fri, Oct 9, 2026Updated 2:24 PM IST
होम › बिहार

मुजफ्फरपुर: स्कूल की छत पर 11 हजार वोल्ट के हाईटेंशन तार की चपेट में आने से तीन छात्राएं झुलसीं, एक की हालत गंभीर

WhatsAppFacebookX

मुजफ्फरपुर। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में शुक्रवार सुबह एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है। अहियापुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत स्थित उच्च माध्यमिक विद्यालय शाहबाजपुर में करंट लगने से तीन छात्राएं गंभीर रूप से घायल हो गईं। प्रारंभिक जानकारी और आशंकाओं के अनुसार, ये तीनों छात्राएं 11 हजार वोल्ट के हाईटेंशन बिजली के तार की चपेट में आ गईं, जिसके कारण वे बुरी तरह झुलस गईं। घायल छात्राओं को तत्काल इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि इनमें से एक छात्रा की हालत अत्यंत गंभीर बनी हुई है। इस घटना ने स्कूल प्रशासन, शिक्षकों और अभिभावकों में भारी दहशत और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है।

प्राप्त विवरण के अनुसार, यह दुर्घटना शुक्रवार की सुबह उस समय हुई जब विद्यालय में नियमित शैक्षणिक गतिविधियां चल रही थीं। उच्च माध्यमिक विद्यालय शाहबाजपुर की इमारत की छत पर या उसके निकट तीनों छात्राएं किसी कारणवश मौजूद थीं। इसी दौरान वे ऊपर से गुजर रहे 11 हजार वोल्ट क्षमता वाले हाईटेंशन बिजली के तार के संपर्क में आ गईं। 11 हजार वोल्ट का तार अत्यधिक खतरनाक होता है और इसके संपर्क में आते ही तीनों छात्राएं करंट की चपेट में आकर झुलस गईं। घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई, जिसके बाद अन्य छात्रों और शिक्षकों ने भागकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया।

घटना की सूचना मिलते ही अहियापुर थाने की पुलिस भी मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। करंट लगने से झुलसी तीनों छात्राओं को आनन-फानन में नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों द्वारा किए गए प्राथमिक उपचार और जांच के बाद यह पुष्टि हुई कि तीनों छात्राएं बिजली के तेज झटके से प्रभावित हुई हैं। हालांकि, दो छात्राओं की स्थिति तुलनात्मक रूप से बेहतर बताई जा रही है, लेकिन तीसरी छात्रा की हालत गंभीर होने के कारण डॉक्टर उसे विशेष निगरानी में रखकर इलाज कर रहे हैं। गंभीर रूप से घायल छात्रा के शरीर का कितना हिस्सा झुलसा है, इसकी विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट का अभी इंतजार किया जा रहा है।

इस घटना ने स्कूल परिसर और उसके आसपास सुरक्षा मानकों पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि 11 हजार वोल्ट का हाईटेंशन तार स्कूल की इमारत की छत के इतने करीब से कैसे गुजर रहा था। बिजली विभाग के नियमों के अनुसार, शैक्षणिक संस्थानों, आवासीय क्षेत्रों और सार्वजनिक स्थलों के ठीक ऊपर या बहुत निकट से ऐसे उच्च क्षमता वाले तारों को नहीं गुजरना चाहिए। यदि कोई तार गुजरता भी है, तो उसकी ऊंचाई और सुरक्षा आवरण संबंधी सख्त दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य होता है। इसके अलावा, स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी भी तय होती है कि वह छात्रों को ऐसी जगहों पर जाने से रोके जहां जान का खतरा हो। स्कूल की छत पर छात्राओं की पहुंच कैसे हुई, यह भी जांच का विषय बन गया है।

अहियापुर थाना क्षेत्र के स्थानीय लोगों और अभिभावकों में इस घटना के बाद से भारी रोष व्याप्त है। अभिभावकों का कहना है कि वे अपने बच्चों को सुरक्षित शिक्षा के लिए स्कूल भेजते हैं, लेकिन इस प्रकार की लापरवाही से बच्चों की जान खतरे में पड़ रही है। स्थानीय लोगों ने बिजली विभाग और जिला प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि पहले ही इस हाईटेंशन तार को हटाने या सुरक्षित करने की कार्रवाई कर ली जाती, तो आज तीन बच्चियों को अपनी जान जोखिम में नहीं डालनी पड़ती।

फिलहाल, इस पूरे मामले में स्कूल प्रशासन, बिजली विभाग और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच होना आवश्यक माना जा रहा है। यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि छात्राएं छत पर क्यों गई थीं और क्या वहां उनके साथ कोई शिक्षक या कर्मचारी मौजूद था। साथ ही, यह भी देखना होगा कि क्या बिजली विभाग को इस खतरे के बारे में पूर्व में कोई शिकायत दी गई थी या नहीं। घटना के बाद विद्यालय में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बना रहा, जिसे बाद में शिक्षकों और प्रशासन ने नियंत्रित किया।

वंदे भारत न्यूज की इस रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया जाता है कि छात्राओं के नाम, उनकी आयु और अन्य व्यक्तिगत विवरण अभी तक आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। पुलिस और स्कूल प्रशासन मामले की जांच कर रहे हैं। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस बात का खुलासा होगा कि इस हादसे के लिए वास्तविक जिम्मेदार कौन है। 11 हजार वोल्ट के तार की चपेट में आने की आशंका ने इस घटना को अत्यंत संवेदनशील बना दिया है। मुजफ्फरपुर के इस विद्यालय में हुई यह घटना पूरे राज्य के शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्थाओं की पोल खोलने वाली साबित हो सकती है। फिलहाल सभी की निगाहें गंभीर रूप से घायल छात्रा के स्वास्थ्य लाभ और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।