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Fri, Oct 9, 2026Updated 3:38 PM IST
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इंदौर में IDA की दोहरी नीति के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन: ग्राउंड आवंटन में भाजपा को मुफ्त और कांग्रेस से 14 लाख वसूलने का आरोप

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इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) द्वारा मैदान आवंटन को लेकर अपनाई जा रही कथित दोहरी नीति के खिलाफ कांग्रेस ने शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को जोरदार प्रदर्शन किया है। शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने दोपहर करीब 3.30 बजे IDA कार्यालय पहुंचकर मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) का घेराव किया। कांग्रेस का आरोप है कि प्राधिकरण ने राजनीतिक दलों के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाते हुए एक ही तरह के ग्राउंड आवंटन के लिए कांग्रेस से 14 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि वसूली गई, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को यही सुविधा बिना किसी शुल्क के, यानी मुफ्त में प्रदान कर दी गई।

कांग्रेस के अनुसार, यह मामला केवल शुल्क के अंतर तक सीमित नहीं है, बल्कि प्राधिकरण ने भाजपा को आवंटन करते समय वे मानक शर्तें भी लागू नहीं कीं, जो कांग्रेस पर अनिवार्य रूप से थोपी गई थीं। इसी आधार पर कांग्रेस ने IDA पर स्पष्ट तौर पर दोहरे मापदंड अपनाने का गंभीर आरोप लगाया है। शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे के नेतृत्व में आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में पार्टी के कई पदाधिकारी और सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल हुए। दोपहर 3.30 बजे निर्धारित समय पर कांग्रेस का काफिला IDA कार्यालय पहुंचा, जहां कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और सीईओ का घेराव करने का प्रयास किया।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि एक सरकारी और सार्वजनिक प्राधिकरण होने के नाते IDA का यह कर्तव्य है कि वह सभी राजनीतिक दलों और संगठनों के साथ समान व्यवहार करे। लेकिन ग्राउंड आवंटन के इस पूरे मामले में जिस प्रकार से नियमों को ताक पर रखकर एक विशेष पार्टी को लाभ पहुंचाया गया, वह लोकतांत्रिक मूल्यों और निष्पक्ष प्रशासन के पूरी तरह खिलाफ है। कांग्रेस ने दावा किया है कि उनके द्वारा आवेदन किए जाने पर उनसे 14 लाख रुपये का शुल्क लिया गया, जबकि भाजपा को उसी स्तर का ग्राउंड आवंटन बिना किसी आर्थिक बोझ के कर दिया गया। इसके अतिरिक्त, कांग्रेस का यह भी आरोप है कि भाजपा को दिए गए आवंटन में वे आवश्यक शर्तें भी शामिल नहीं की गईं, जो सामान्यतः ऐसे आवंटनों में लागू की जाती हैं और कांग्रेस के मामले में सख्ती से लागू की गई थीं।

इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) शहर के बुनियादी ढांचे, योजनाबद्ध विकास और सार्वजनिक स्थलों के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार प्रमुख सरकारी एजेंसी है। ऐसे में किसी भी सार्वजनिक संपत्ति या मैदान के आवंटन में पारदर्शिता और समानता बनाए रखना प्राधिकरण की मूल जिम्मेदारी है। कांग्रेस ने इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए इसे प्रशासनिक पक्षपात का स्पष्ट उदाहरण करार दिया है। पार्टी का मानना है कि यदि प्राधिकरण इस तरह से काम करेगा, तो आम जनता और अन्य संगठनों का सरकारी संस्थाओं से विश्वास उठ जाएगा।

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मांग की कि IDA प्रबंधन इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराए और यह स्पष्ट करे कि आखिर किन नियमों के तहत एक पार्टी से शुल्क लिया गया और दूसरी को छूट दे दी गई। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया और प्राधिकरण अपनी इस कथित पक्षपातपूर्ण नीति में सुधार नहीं करता है, तो पार्टी आगामी दिनों में अपना आंदोलन और तेज करेगी। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर सड़कों पर उतरकर बड़ा जनआंदोलन किया जाएगा और इस मुद्दे को उच्च न्यायालय सहित अन्य मंचों पर भी उठाया जाएगा।

वहीं, इस पूरे विवाद और कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोपों पर अभी तक इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) या उसके मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। यह भी स्पष्ट नहीं हो सका है कि सीईओ का घेराव करने पहुंचे कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को प्राधिकरण के अधिकारियों ने मिलने का समय दिया या नहीं, और यदि बातचीत हुई तो उसमें क्या निष्कर्ष निकला।

इंदौर में राजनीतिक दलों द्वारा सार्वजनिक मैदानों और ग्राउंड के उपयोग को लेकर पहले भी समय-समय पर विवाद होते रहे हैं। राजनीतिक रैलियों, बैठकों और अन्य कार्यक्रमों के लिए इन स्थानों की मांग हमेशा ऊंची रहती है। ऐसे में आवंटन की प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना प्राधिकरण के लिए एक बड़ी चुनौती होती है। कांग्रेस के इस प्रदर्शन से शहर का राजनीतिक माहौल एक बार फिर गर्मा गया है और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि IDA प्रशासन इन आरोपों का किस प्रकार खंडन या समाधान करता है। फिलहाल, स्रोत जानकारी के अनुसार, कांग्रेस ने अपने आरोपों को लेकर प्रदर्शन किया है और प्राधिकरण से जवाब की मांग की है, जबकि प्राधिकरण की तरफ से इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।