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Fri, Oct 9, 2026Updated 3:39 PM IST
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नवादा में बच्ची से रेप के आरोप पर हंगामा: पुलिस पर कार्रवाई न करने का लगाया गया आरोप, थानाध्यक्ष ने मुकदमा दर्ज होने से किया इनकार

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नवादा। बिहार के नवादा जिले में एक बच्ची से रेप के गंभीर आरोप को लेकर स्थानीय लोगों और पुलिस प्रशासन के बीच तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। गुरुवार रात समाहरणालय के पास बुंदेलखंड थाना क्षेत्र के निवासियों ने सड़क पर उतरकर पुलिस के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि एक बच्ची के साथ रेप की घटना होने के बावजूद पुलिस इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रही है और जांच में अनावश्यक देरी बरती जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम ने जिला प्रशासन और पुलिस महकमे के लिए एक गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है, जबकि दूसरी ओर संबंधित थाने के थानाध्यक्ष ने रेप का मुकदमा दर्ज होने से सीधे तौर पर इनकार किया है।

बताया जा रहा है कि गुरुवार की रात जब समाहरणालय के आसपास का इलाका आम दिनों की तरह शांत था, तभी अचानक बुंदेलखंड थाना क्षेत्र के बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर आ गए। इन लोगों के हाथों में कोई राजनीतिक बैनर नहीं था, बल्कि उनके चेहरों पर एक बच्ची के साथ हुई कथित ज्यादती को लेकर गहरा आक्रोश साफ झलक रहा था। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए न्याय की मांग की। उनका कहना था कि एक नाबालिग बच्ची के साथ रेप जैसी जघन्य घटना घटित हुई है, लेकिन पुलिस आरोपितों को बचाने का प्रयास कर रही है या फिर मामला दर्ज करने में जानबूझकर आनाकानी कर रही है।

प्रदर्शनकारी स्थानीय निवासियों ने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया कि पीड़ित बच्ची के परिजनों ने जब इस घटना की शिकायत बुंदेलखंड थाने में की, तो पुलिस ने उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया। लोगों का कहना था कि पुलिस ने न तो समय रहते प्राथमिकी दर्ज की और न ही आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए कोई प्रभावी कदम उठाए। इसी ढुलमुल रवैये और कार्रवाई में हो रही देरी से आहत होकर आसपास के मोहल्ले के लोग एकजुट हुए और उन्होंने गुरुवार रात समाहरणालय के समीप विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि आरोपितों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और पीड़ित बच्ची को तत्काल न्याय दिलाया जाए।

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि जिस बुंदेलखंड थाना क्षेत्र में यह घटना बताई जा रही है, उसी थाने के थानाध्यक्ष ने रेप का मुकदमा दर्ज होने से पूरी तरह इनकार कर दिया है। थानाध्यक्ष का यह बयान स्थानीय लोगों के उन दावों के बिल्कुल विपरीत है, जिनमें वे लगातार यह कह रहे थे कि उन्होंने पुलिस को लिखित या मौखिक शिकायत दी है। थानाध्यक्ष द्वारा मुकदमा दर्ज होने से इनकार किए जाने के बाद यह विवाद और भी अधिक गहरा गया है। अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि थानाध्यक्ष के अनुसार कोई मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है, तो क्या पीड़ित पक्ष की शिकायत को पुलिस स्तर पर ठीक से संज्ञान में ही नहीं लिया गया? या फिर शिकायत मिलने के बाद भी उसे औपचारिक प्राथमिकी में बदलने से रोका गया? ये ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब फिलहाल स्पष्ट नहीं हैं और इस मामले में अनिश्चितता बनी हुई है।

गुरुवार रात समाहरणालय के पास हुए इस हंगामे के बाद जिला प्रशासन और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के लिए स्थिति को नियंत्रित करना एक बड़ी जिम्मेदारी बन गई। रात के अंधेरे में सड़क पर उतरे लोगों को समझाने और शांत करने के लिए पुलिस बल को सक्रिय होना पड़ा। हालांकि, स्रोत जानकारी में यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि रात के इस प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच किसी प्रकार की झड़प हुई या किसी को हिरासत में लिया गया। लेकिन इतना तय है कि स्थानीय लोगों का आक्रोश चरम पर था और वे पुलिस की कार्यप्रणाली से पूरी तरह असंतुष्ट नजर आए।

बच्ची से रेप के आरोप वाले ऐसे संवेदनशील मामलों में भारतीय कानून, विशेषकर पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत पुलिस को अत्यंत तेजी और संवेदनशीलता से काम करने का निर्देश होता है। कानून के मुताबिक, ऐसे अपराधों की सूचना मिलते ही तुरंत प्राथमिकी दर्ज करनी चाहिए और पीड़िता का मेडिकल परीक्षण बिना किसी देरी के सुनिश्चित करना चाहिए। लेकिन नवादा के इस मामले में पुलिस पर कार्रवाई न करने और जांच में देरी के जो आरोप लग रहे हैं, वे कानूनी प्रक्रियाओं के उल्लंघन की ओर इशारा करते हैं। वहीं, थानाध्यक्ष का इनकार इस बात की जांच की मांग को और मजबूत करता है कि आखिर शिकायत मिलने के बाद थाने के भीतर क्या प्रक्रिया अपनाई गई।

वन्दे भारत न्यूज की इस रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया जाता है कि अभी तक इस मामले में आरोपितों की पहचान, उनकी गिरफ्तारी या पीड़ित बच्ची की वर्तमान चिकित्सा स्थिति को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। चूंकि थानाध्यक्ष ने स्वयं मुकदमा दर्ज होने से इनकार किया है, इसलिए इस बात की भी अनिश्चितता बनी हुई है कि पुलिस ने अपनी आंतरिक जांच शुरू की है या नहीं। स्थानीय लोगों का मानना है कि जब तक उच्च अधिकारी इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करेंगे, तब तक उन्हें न्याय मिलना संभव नहीं है।

नवादा जिले के बुंदेलखंड थाना क्षेत्र में गुरुवार रात हुए इस विरोध प्रदर्शन ने एक बार फिर महिला सुरक्षा और पुलिस की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। समाहरणालय जैसे संवेदनशील इलाके के पास लोगों का सड़क पर उतरना यह दर्शाता है कि जनता का धैर्य जवाब दे चुका था। अब देखना यह होगा कि नवादा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी इस मामले में क्या संज्ञान लेते हैं। क्या थानाध्यक्ष के बयान की जांच होगी? क्या पीड़ित बच्ची के परिवार को न्याय मिलेगा? फिलहाल पूरा जिला इस मामले में पुलिस और प्रशासन के अगले कदम का इंतजार कर रहा है।