Fri, 09 Oct 20263:37 PM
Fri, Oct 9, 2026Updated 3:37 PM IST
होम › छत्तीसगढ़

कोरबा: SECL की कुसमुंडा खदान में 100 टन का डंपर अनियंत्रित होकर पलटा, ऑपरेटर गंभीर रूप से घायल

WhatsAppFacebookX

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में स्थित साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की कुसमुंडा मेगा ओपनकास्ट खदान में एक बड़ी दुर्घटना सामने आई है। खदान क्षेत्र के भीतर 100 टन क्षमता वाला एक विशाल डंपर अचानक अनियंत्रित हो गया और पलट गया। इस हादसे में डंपर चला रहे ऑपरेटर लक्ष्मी प्रसाद गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घटना के तुरंत बाद मौके पर मौजूद अन्य कर्मचारियों ने राहत और बचाव कार्य शुरू किया तथा घायल ऑपरेटर को आनन-फानन में इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका उपचार चल रहा है।

यह दुर्घटना कुसमुंडा मेगा ओपनकास्ट खदान के संचालन क्षेत्र में हुई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, 100 टन भार वहन करने की क्षमता रखने वाला यह डंपर अपने निर्धारित मार्ग पर काम कर रहा था, तभी अचानक यह वाहन चालक के नियंत्रण से बाहर हो गया। भारी भरकम मशीनरी होने के कारण डंपर को संभालना असंभव हो गया और वह पलट गया। डंपर के पलटने से उसके अंदर मौजूद ऑपरेटर लक्ष्मी प्रसाद को गंभीर चोटें आईं। खदान जैसे जोखिम भरे कार्यस्थल पर इस तरह की दुर्घटनाएं बेहद खतरनाक होती हैं, क्योंकि इनमें इस्तेमाल होने वाले वाहन अत्यधिक भारी और शक्तिशाली होते हैं।

घटना की सूचना मिलते ही खदान प्रबंधन और सहकर्मी सक्रिय हुए। घायल ऑपरेटर लक्ष्मी प्रसाद को डंपर से सुरक्षित निकालने के बाद तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई। उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज किया जा रहा है। फिलहाल उनकी सटीक स्वास्थ्य स्थिति के बारे में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन उन्हें गंभीर रूप से घायल बताया जा रहा है।

इस दुर्घटना ने खदान की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। कुसमुंडा मेगा ओपनकास्ट खदान देश की प्रमुख कोयला खदानों में से एक है, जहां दिन-रात बड़े पैमाने पर उत्पादन कार्य होता है। ऐसे में भारी मशीनरी और डंपरों की निरंतर आवाजाही रहती है। सुरक्षा मानकों के अनुसार, इन वाहनों का नियमित रखरखाव और ऑपरेटरों का प्रशिक्षण अत्यंत आवश्यक होता है। हालांकि, इस ताजा हादसे ने खदान क्षेत्र में सुरक्षा उपायों की पर्याप्तता पर चिंता व्यक्त करने का अवसर दिया है।

उल्लेखनीय है कि कुसमुंडा खदान में सुरक्षा से जुड़ी यह पहली घटना नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ दिन पहले ही इसी खदान में आग लगने की एक घटना हुई थी। उस वक्त भी खदान क्षेत्र में हड़कंप मच गया था। लगातार कम समय के भीतर खदान में आग लगने और अब 100 टन क्षमता के डंपर के पलटने जैसी घटनाओं ने खदान प्रबंधन की कार्यप्रणाली और सुरक्षा प्रोटोकॉल के क्रियान्वयन को लेकर चिंता बढ़ा दी है। श्रोतों के मुताबिक, इन लगातार हो रही घटनाओं के पीछे तकनीकी खराबी, रखरखाव में कमी या मानवीय त्रुटि जैसे कई कारण हो सकते हैं, लेकिन अभी तक किसी ठोस कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) कोल इंडिया लिमिटेड की एक प्रमुख अनुषंगी कंपनी है, जो छत्तीसगढ़ में कोयला उत्पादन का मुख्य आधार स्तंभ मानी जाती है। कुसमुंडा मेगा ओपनकास्ट खदान SECL की सबसे अधिक उत्पादन क्षमता वाली खदानों में शुमार है। यहां प्रतिदिन हजारों टन कोयले का उत्खनन और परिवहन होता है। इस परिवहन प्रक्रिया में सैकड़ों टन क्षमता वाले डंपरों का इस्तेमाल किया जाता है। जब इतने विशाल वाहन किसी दुर्घटना का शिकार होते हैं, तो जान-माल का नुकसान बड़ा हो सकता है।

इस घटना के बाद खदान क्षेत्र में काम करने वाले अन्य कर्मचारियों और ऑपरेटरों में भी सुरक्षा को लेकर चिंता का माहौल देखा जा रहा है। खदानों में कार्यरत श्रमिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि ओपनकास्ट खदानों में ढलान वाले रास्तों, मिट्टी की स्थिति और भारी वाहनों के ब्रेकिंग सिस्टम का नियमित निरीक्षण होना चाहिए। यदि डंपर के अनियंत्रित होने का कारण यांत्रिक खराबी है, तो यह रखरखाव प्रणाली में सुधार की जरूरत को दर्शाता है।

फिलहाल, SECL प्रबंधन की ओर से इस दुर्घटना के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए जांच की प्रक्रिया अपेक्षित है। यह देखा जाएगा कि क्या डंपर में कोई तकनीकी खराबी थी, या फिर परिचालन के दौरान किसी अन्य कारण से यह हादसा हुआ। साथ ही, कुछ दिन पहले लगी आग की घटना और वर्तमान डंपर दुर्घटना के बीच किसी प्रकार का संबंध है या नहीं, इसकी भी समीक्षा किए जाने की संभावना है।

कुसमुंडा खदान में हुई इस दुर्घटना ने एक बार फिर खनन उद्योग में सुरक्षा मानकों की सख्ती से पालन की आवश्यकता को रेखांकित किया है। घायल ऑपरेटर लक्ष्मी प्रसाद के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की जा रही है। वहीं, खदान प्रबंधन से यह उम्मीद की जा रही है कि वे भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाएंगे, ताकि खदान में काम करने वाले श्रमिकों की जान और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।