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Fri, Oct 9, 2026Updated 3:39 PM IST
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पेनांग डेफ एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2026: नालंदा के अनुपम कुमार 800 मीटर में चौथे स्थान पर रहे, मात्र 0.56 सेकंड से चूके कांस्य पदक

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बिहार के नालंदा जिले के होनहार बधिर एथलीट अनुपम कुमार ने मलेशिया के पेनांग शहर में आयोजित एशिया पैसिफिक डेफ एथलेटिक्स चैंपियनशिप-2026 में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर की इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में अनुपम कुमार ने पुरुषों की 800 मीटर दौड़ स्पर्धा के फाइनल मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए चौथा स्थान हासिल किया। हालांकि, वह बेहद कड़े और रोमांचक मुकाबले में मात्र 0.56 सेकंड के सूक्ष्म अंतर से तीसरे स्थान पर रहने वाले धावक से पीछे रह गए, जिसके कारण वह कांस्य पदक जीतने से चूक गए। यह अंतर इतना कम था कि खेल जगत में इसे पलक झपकने से भी तेज माना जाता है, लेकिन यही अंतर एक अंतरराष्ट्रीय पदक और चौथे स्थान के बीच का निर्णायक फासला बन गया।

एशिया पैसिफिक डेफ एथलेटिक्स चैंपियनशिप-2026 का आयोजन मलेशिया के ऐतिहासिक शहर पेनांग में किया गया है। इस प्रतियोगिता में एशिया और प्रशांत क्षेत्र के विभिन्न देशों के शीर्ष बधिर एथलीट हिस्सा ले रहे हैं। पुरुषों की 800 मीटर दौड़ स्पर्धा का फाइनल मुकाबला इस चैंपियनशिप के सबसे रोमांचक और कड़े मुकाबलों में से एक रहा। बिहार के नालंदा जिले का प्रतिनिधित्व कर रहे भारतीय एथलीट अनुपम कुमार ने इस फाइनल रेस में पूरी ताकत और रणनीति के साथ दौड़ लगाई। उन्होंने ट्रैक पर अपने सभी प्रतिद्वंद्वियों को कड़ी टक्कर दी और आखिरी क्षणों तक पदक की दौड़ में बने रहे।

प्रतियोगिता के आधिकारिक परिणामों के अनुसार, इस 800 मीटर स्पर्धा में तीसरा स्थान यानी कांस्य पदक मेजबान देश मलेशिया के धावक अज़लान कुस्ते ने अपने नाम किया। अज़लान कुस्ते ने यह दूरी 2 मिनट 00.16 सेकंड के समय में पूरी की। वहीं, भारत के अनुपम कुमार इनसे मात्र 0.56 सेकंड के मामूली अंतर से पीछे रहते हुए चौथे स्थान पर रहे। मेजबान देश के दर्शकों का समर्थन और घरेलू ट्रैक का अनुभव अज़लान कुस्ते के लिए मददगार साबित हुआ, लेकिन अनुपम ने जिस प्रकार से इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दिया, वह हर लिहाज से सराहनीय है। 0.56 सेकंड का यह अंतर खेल की उस बारीकी को दर्शाता है जहां जीत और हार के बीच का फासला केवल कुछ कदमों या सेकंड के छोटे हिस्से का होता है।

बिहार के नालंदा जिले से आने वाले अनुपम कुमार का इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के फाइनल तक पहुंचना और वहां दुनिया के बेहतरीन बधिर एथलीटों को कड़ी टक्कर देना अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। नालंदा, जो ऐतिहासिक रूप से शिक्षा और ज्ञान के केंद्र के रूप में जाना जाता है, अब खेल के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बना रहा है। अनुपम के इस प्रदर्शन ने न केवल बिहार बल्कि पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा किया है। बधिर एथलेटिक्स में भारत का प्रतिनिधित्व करना और एशिया पैसिफिक स्तर पर चौथा स्थान प्राप्त करना किसी भी खिलाड़ी के लिए एक सम्मानजनक उपलब्धि मानी जाती है।

बधिर एथलीटों के लिए आयोजित होने वाली ऐसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएं उनके हुनर, संघर्ष और समर्पण को वैश्विक मंच प्रदान करने का महत्वपूर्ण कार्य करती हैं। डेफ एथलेटिक्स में खिलाड़ियों को श्रवण बाधाओं के बावजूद सामान्य एथलीटों की तरह ही कठोर प्रशिक्षण और मानसिक दृढ़ता की आवश्यकता होती है। पेनांग में आयोजित एशिया पैसिफिक डेफ एथलेटिक्स चैंपियनशिप-2026 ऐसे ही प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के लिए एक बड़ा मंच है, जहां वे अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन कर सकते हैं। अनुपम कुमार जैसे खिलाड़ियों की भागीदारी भारत में दिव्यांग खेलों के प्रति बढ़ती जागरूकता और तैयारियों का स्पष्ट संकेत है।

हालांकि अनुपम कुमार कांस्य पदक से थोड़ी सी दूरी पर रह गए, लेकिन उनका यह प्रदर्शन भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए एक मजबूत आधार तैयार करता है। खेल विशेषज्ञों की मानें तो 800 मीटर की दौड़ में 2 मिनट के आसपास का समय निकालना उच्च स्तर की फिटनेस और तकनीक की मांग करता है। अनुपम ने जिस प्रकार से मेजबान देश के धावक को अंतिम क्षणों तक टक्कर दी, वह उनकी क्षमता का प्रमाण है। यह 0.56 सेकंड का अंतर आने वाले समय में उनके लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा और निश्चित रूप से वह भविष्य में इस कमी को पूरा करने के लिए और अधिक कठिन अभ्यास करेंगे।

अनुपम कुमार की इस उपलब्धि पर नालंदा जिले सहित पूरे बिहार में उन्हें बधाइयां मिल रही हैं। स्थानीय स्तर पर खेल प्रेमियों और युवाओं के लिए अनुपम एक आदर्श बनकर उभरे हैं। उनका यह सफर बताता है कि यदि सही लगन, मेहनत और दृढ़ संकल्प हो, तो छोटे शहरों और जिलों के खिलाड़ी भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। एशिया पैसिफिक डेफ एथलेटिक्स चैंपियनशिप-2026 में अनुपम कुमार द्वारा दिखाए गए इस शानदार जज्बे और प्रदर्शन ने भारतीय बधिर एथलेटिक्स को एक नई दिशा और पहचान देने का काम किया है।