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Fri, Oct 9, 2026Updated 4:34 PM IST
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इंदौर: IDA की दोहरी नीति के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन, ग्राउंड आवंटन में 14 लाख रुपये और मुफ्त जमीन को लेकर घेराव

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इंदौर। मध्य प्रदेश के वाणिज्यिक नगरी इंदौर में इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) द्वारा मैदान आवंटन को लेकर अपनाई जा रही कथित दोहरी नीति के विरोध में शुक्रवार को कांग्रेस ने बड़ा प्रदर्शन किया। शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने दोपहर 3.30 बजे IDA कार्यालय पहुंचकर मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) का घेराव किया। कांग्रेस ने प्राधिकरण पर सीधे तौर पर यह आरोप लगाया है कि उसने एक ही तरह के ग्राउंड आवंटन में भाजपा और कांग्रेस के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया है। पार्टी का दावा है कि जहां कांग्रेस से मैदान के उपयोग के लिए 14 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि वसूली गई, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को बिना किसी शुल्क के मुफ्त में ग्राउंड आवंटित कर दिया गया। इतना ही नहीं, कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया है कि भाजपा को दिए गए आवंटन में वे शर्तें भी लागू नहीं की गईं, जो कांग्रेस पर थोपी गई थीं।

कांग्रेस के इस आक्रामक रुख के पीछे प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर उठाए गए गंभीर सवाल हैं। शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने प्रदर्शन से पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि पार्टी कार्यकर्ता IDA कार्यालय पहुंचकर मुख्य कार्यपालन अधिकारी को घेरेंगे और उनसे इस पक्षपातपूर्ण नीति का जवाब मांगेंगे। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि एक सरकारी प्राधिकरण होने के नाते IDA का दायित्व है कि वह सभी राजनीतिक दलों और संगठनों के साथ समान व्यवहार करे। लेकिन ग्राउंड आवंटन के मामले में जो आंकड़े और तथ्य सामने आए हैं, वे साफ तौर पर दोहरे मापदंड की ओर इशारा करते हैं।

आरोपों के अनुसार, जब कांग्रेस ने अपने किसी कार्यक्रम या आयोजन के लिए IDA से ग्राउंड आवंटन की मांग की थी, तो प्राधिकरण ने इसके एवज में 14 लाख रुपये की राशि जमा करने की शर्त रखी। कांग्रेस ने नियमों का पालन करते हुए यह राशि दी। हालांकि, कांग्रेस का आरोप है कि जब भाजपा को ग्राउंड आवंटित किया गया, तो न केवल उसे पूरी तरह से मुफ्त में जमीन उपलब्ध कराई गई, बल्कि कांग्रेस पर जो अन्य कड़ी शर्तें लगाई गई थीं, वे भाजपा के मामले में हटा ली गईं या लागू ही नहीं की गईं। इसे कांग्रेस ने सत्ताधारी दल को खुश करने और विपक्ष को आर्थिक रूप से कमजोर करने की साजिश करार दिया है।

दोपहर 3.30 बजे निर्धारित समय पर चिंटू चौकसे के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं का दल IDA कार्यालय पहुंचा। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने हाथों में तख्तियां और बैनर ले रखे थे, जिन पर प्राधिकरण की कथित पक्षपातपूर्ण नीतियों के खिलाफ नारे लिखे हुए थे। कार्यकर्ताओं ने IDA प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मुख्य कार्यपालन अधिकारी के कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि उन्हें CEO से सीधे मिलकर अपनी बात रखने का मौका दिया जाए और इस पूरे आवंटन विवाद की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

इंदौर जैसे प्रमुख शहर में किसी भी राजनीतिक दल के लिए सार्वजनिक कार्यक्रमों और बैठकों के लिए मैदानों का आवंटन एक अहम मुद्दा होता है। ऐसे में IDA जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण प्राधिकरण पर इस तरह के आरोप लगना स्थानीय राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन गया है। कांग्रेस का मानना है कि यदि प्राधिकरण अपनी नीतियों में सुधार नहीं करता है और सभी दलों के लिए एक समान नियम लागू नहीं करता है, तो पार्टी आने वाले दिनों में अपने आंदोलन को और तेज करेगी।

इस पूरे विवाद में सबसे प्रमुख मुद्दा 14 लाख रुपये की राशि और मुफ्त आवंटन का अंतर है। कांग्रेस ने प्राधिकरण से यह स्पष्टीकरण मांगा है कि आखिर किन नियमों के तहत एक पार्टी से इतनी बड़ी रकम वसूली गई और दूसरी पार्टी को छूट दे दी गई। क्या IDA के पास ऐसा कोई प्रावधान है जिसके तहत सत्ताधारी दल को शुल्क में छूट दी जा सकती है? इन सवालों के जवाब फिलहाल प्राधिकरण की ओर से सार्वजनिक रूप से नहीं दिए गए हैं।

वहीं, इस प्रदर्शन से इंदौर की स्थानीय राजनीति में गर्माहट आ गई है। कांग्रेस के इस कदम को विपक्ष की ओर से प्रशासनिक पक्षपात के खिलाफ उठाया गया एक आक्रामक कदम माना जा रहा है। चिंटू चौकसे ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि लोकतंत्र में सभी पार्टियों को समान अधिकार मिलने चाहिए और सरकारी संस्थाओं का उपयोग किसी एक विशेष दल के लाभ के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

बहरहाल, IDA की ओर से कांग्रेस के इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या खंडन सामने नहीं आया है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि प्राधिकरण ने भाजपा को किस आधार पर ग्राउंड आवंटित किया और क्या वास्तव में कांग्रेस से ली गई राशि और भाजपा को दी गई छूट के बीच नियमों का उल्लंघन हुआ है। इस संबंध में भाजपा की ओर से भी कोई बयान जारी नहीं किया गया है। समाचार लिखे जाने तक दोनों पक्षों की ओर से आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है।

कुल मिलाकर, इंदौर में IDA के ग्राउंड आवंटन को लेकर छिड़ा यह विवाद अब सड़कों पर आ चुका है। कांग्रेस के प्रदर्शन और CEO के घेराव ने इस मुद्दे को शहर की सुर्खियों में ला दिया है। अब देखना यह होगा कि प्राधिकरण इन आरोपों का कैसे जवाब देता है और क्या इस विवाद के बाद ग्राउंड आवंटन की नीतियों में कोई बदलाव किया जाता है या नहीं। फिलहाल, कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि जब तक दोहरे मापदंड की नीति खत्म नहीं होती, उनका संघर्ष जारी रहेगा।