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Fri, Oct 9, 2026Updated 5:20 PM IST
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मधुबनी में अवैध नर्सिंग होम के खिलाफ MSU का एक दिवसीय धरना, सिविल सर्जन की बर्खास्तगी और जांच की मांग

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मधुबनी। बिहार के मधुबनी जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर शुक्रवार को मिथिला स्टूडेंट यूनियन (एमएसयू) ने बड़ा प्रदर्शन किया। जिले में संचालित अवैध नर्सिंग होम, मानक विहीन अस्पतालों और बिना उचित मानकों के चल रहे जांच घरों के खिलाफ कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की मांग को लेकर एमएसयू के कार्यकर्ताओं ने समाहरणालय के समक्ष एक दिवसीय धरना दिया। इस दौरान संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने जिले की वर्तमान स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए जिलाधिकारी से सिविल सर्जन को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करने की भी अपील की। साथ ही, जिले में संचालित सभी निजी स्वास्थ्य संस्थानों की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की गई है।

शुक्रवार को आयोजित इस एक दिवसीय धरने में मिथिला स्टूडेंट यूनियन के बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। समाहरणालय के बाहर जुटे प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपना आक्रोश व्यक्त किया। एमएसयू का आरोप है कि मधुबनी जिले में कई ऐसे नर्सिंग होम और निजी अस्पताल संचालित हो रहे हैं, जिनके पास आवश्यक लाइसेंस या वैधानिक अनुमतियां नहीं हैं। इन अवैध संस्थानों में मरीजों के जीवन से खिलवाड़ किया जा रहा है। इसके अलावा, कई जांच घर भी निर्धारित चिकित्सा मानकों के विपरीत काम कर रहे हैं, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। संगठन ने मांग की है कि ऐसे सभी अवैध और मानक विहीन संस्थानों के खिलाफ तुरंत सख्त कार्रवाई की जाए और उन्हें सील किया जाए।

धरने के दौरान एमएसयू के कार्यकर्ताओं ने विशेष रूप से जिले के सिविल सर्जन की कार्यप्रणाली पर निशाना साधा। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सिविल सर्जन अपने दायित्वों का निर्वहन ठीक से नहीं कर रहे हैं, जिसके कारण जिले में अवैध नर्सिंग होम और फर्जी जांच घरों का कारोबार बेरोकटोक फल-फूल रहा है। यूनियन के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था में कोई सुधार संभव नहीं है। इसी आधार पर उन्होंने जिलाधिकारी से सिविल सर्जन को उनके पद से बर्खास्त करने की औपचारिक मांग की है, ताकि भविष्य में अन्य अधिकारियों के लिए भी एक सख्त संदेश जा सके।

मिथिला स्टूडेंट यूनियन ने अपनी मांगों को विस्तार से रखते हुए कहा कि मधुबनी जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था वर्तमान में अत्यंत दयनीय स्थिति में पहुंच चुकी है। सरकारी अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, वहीं निजी क्षेत्र में बिना किसी नियंत्रण के मनमानी की जा रही है। संगठन ने मांग की है कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग मिलकर जिले में संचालित हर एक नर्सिंग होम, क्लीनिक, अस्पताल और पैथोलॉजी लैब की विस्तृत जांच कराएं। इस जांच में यह सुनिश्चित किया जाए कि ये संस्थान सरकार द्वारा निर्धारित मापदंडों और नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं। यदि जांच में कोई संस्थान दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ संबंधित संचालकों पर प्राथमिकी दर्ज की जाए।

समाहरणालय के समक्ष दिए गए इस धरने के माध्यम से एमएसयू ने जिला प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया और अवैध नर्सिंग होम के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो संगठन आगामी दिनों में अपना आंदोलन और तेज करने को बाध्य होगा। कार्यकर्ताओं ने कहा कि वे जनहित और मरीजों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह धरना केवल एक शुरुआत है और जब तक सिविल सर्जन की बर्खास्तगी और अवैध संस्थानों पर कार्रवाई की मांग पूरी नहीं होती, उनका संघर्ष जारी रहेगा।

उल्लेखनीय है कि मधुबनी जैसे जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और नियमन हमेशा से एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में लोग इलाज के लिए अक्सर छोटे निजी क्लीनिकों और नर्सिंग होम पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में यदि ये संस्थान मानक विहीन हैं या अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं, तो इसका सीधा असर गरीब और मध्यम वर्गीय मरीजों की जान पर पड़ता है। मिथिला स्टूडेंट यूनियन का यह प्रदर्शन इसी जन समस्या को प्रशासन के संज्ञान में लाने का एक प्रयास बताया जा रहा है।

धरने के समापन के बाद संगठन की ओर से अपनी मांगों को लेकर एक ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपे जाने की बात कही गई है। इस ज्ञापन में अवैध नर्सिंग होम पर कार्रवाई, मानक विहीन अस्पतालों और जांच घरों की जांच तथा सिविल सर्जन को बर्खास्त करने की मांगों को विस्तार से शामिल किया गया है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस मामले में कितनी जल्दी और कितनी सख्ती से कदम उठाता है। फिलहाल, एमएसयू के इस एक दिवसीय धरने ने जिले के स्वास्थ्य महकमे में हलचल पैदा कर दी है और आम जनता के बीच भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।