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Fri, Oct 9, 2026Updated 5:19 PM IST
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आईआईएम बोधगया के चार प्रोफेसर दुनिया के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों की सूची में शामिल, डॉ. अविरल तिवारी को अर्थशास्त्र में मिला 47वां स्थान

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बिहार के गया जिले में स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) बोधगया के लिए एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। संस्थान के चार प्रोफेसरों को दुनिया के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की प्रतिष्ठित सूची में शामिल किया गया है। यह सूची स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा जारी की जाती है और इसे वैश्विक शोध एवं विज्ञान के क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण मानकों में से एक माना जाता है। इस सूची में जगह बनाने वाले प्रमुख नामों में डॉ. अविरल कुमार तिवारी का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जिन्होंने अर्थशास्त्र के क्षेत्र में विश्व स्तर पर 47वां स्थान हासिल कर देश और संस्थान दोनों का नाम रोशन किया है।

डॉ. अविरल कुमार तिवारी की इस उपलब्धि को उनके विशिष्ट शोध कार्यों के परिणाम के रूप में देखा जा रहा है। ऊर्जा अर्थशास्त्र, पर्यावरणीय अर्थशास्त्र और आर्थिक विकास जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण और समकालीन विषयों पर किए गए उनके गहन शोध को इस वैश्विक सूची में जगह मिली है। वर्तमान समय में जब पूरी दुनिया ऊर्जा संकट, जलवायु परिवर्तन और सतत आर्थिक विकास की चुनौतियों से जूझ रही है, ऐसे में डॉ. तिवारी द्वारा इन विषयों पर किया गया शोध न केवल शैक्षणिक दृष्टिकोण से बल्कि नीतिगत स्तर पर भी अत्यंत प्रासंगिक माना जाता है। उनकी रैंकिंग यह स्पष्ट करती है कि उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए शोध पत्रों और आंकड़ों का वैश्विक शोधकर्ताओं के बीच कितना अधिक प्रभाव और उपयोग हो रहा है।

स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा जारी की जाने वाली यह वार्षिक सूची वैश्विक स्तर पर वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए एक अत्यंत कठोर और पारदर्शी मानदंड अपनाती है। इस सूची में किसी भी वैज्ञानिक या शोधकर्ता को शामिल करने के लिए उनके द्वारा प्रकाशित शोध पत्रों की संख्या, उन शोध पत्रों को अन्य वैज्ञानिकों द्वारा कितनी बार उद्धृत (साइटेशन) किया गया है, एच-इंडेक्स और अन्य विभिन्न शोध मापदंडों को ध्यान में रखा जाता है। इन सभी मापदंडों पर खरा उतरने के बाद ही दुनिया भर के लाखों वैज्ञानिकों में से केवल शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों को इस विशिष्ट सूची में स्थान दिया जाता है। ऐसे में आईआईएम बोधगया के चार प्रोफेसरों का एक साथ इस सूची में आना संस्थान की शोध क्षमता और गुणवत्ता का प्रमाण है।

आईआईएम बोधगया की स्थापना भारत सरकार द्वारा देश के प्रमुख प्रबंधन संस्थानों में से एक के रूप में की गई थी। बिहार के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण शहर गया में स्थित यह संस्थान पिछले कुछ वर्षों में तेजी से अपनी शैक्षणिक और शोध पहचान बना रहा है। प्रबंधन शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने के साथ-साथ संस्थान ने अब शोध के क्षेत्र में भी अपनी विश्वसनीयता साबित कर दी है। चार प्रोफेसरों का स्टैनफोर्ड की शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में शामिल होना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि संस्थान में शोध को बढ़ावा देने के लिए अनुकूल वातावरण और आवश्यक सुविधाएं मौजूद हैं।

डॉ. अविरल कुमार तिवारी द्वारा ऊर्जा अर्थशास्त्र और पर्यावरणीय अर्थशास्त्र पर किए गए शोध का सीधा संबंध आज की वैश्विक आर्थिक नीतियों से जुड़ता है। ऊर्जा संसाधनों का कुशल उपयोग, नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बढ़ते कदम और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए आर्थिक विकास की रणनीतियां तैयार करना वर्तमान समय की सबसे बड़ी जरूरत है। डॉ. तिवारी के शोध इन्हीं विषयों पर आधारित हैं, जिसकी वजह से उन्हें अर्थशास्त्र की वैश्विक रैंकिंग में 47वां स्थान प्राप्त हुआ है। यह रैंकिंग न केवल उनके व्यक्तिगत करियर के लिए बल्कि भारतीय शोध जगत के लिए भी गर्व का विषय है।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस उपलब्धि के बाद आईआईएम बोधगया के शैक्षणिक और प्रशासनिक हलों में खुशी का माहौल है। संस्थान के अन्य छात्रों, शोधार्थियों और फैकल्टी सदस्यों के लिए यह एक बड़ी प्रेरणा है। जब कोई संस्थान वैश्विक रैंकिंग में इस तरह की उपलब्धियां हासिल करता है, तो उसकी साख में स्वाभाविक रूप से वृद्धि होती है। इससे भविष्य में बेहतर छात्रों, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और शोध अनुदान प्राप्त करने में भी मदद मिलती है। हालांकि, संस्थान की ओर से अन्य तीन प्रोफेसरों के नाम और उनके विशिष्ट शोध क्षेत्रों की विस्तृत जानकारी अभी स्रोत सामग्री में उपलब्ध नहीं है, लेकिन यह तय है कि चारों प्रोफेसरों ने अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट शोध कार्य कर यह मुकाम हासिल किया है।

बिहार जैसे राज्य के लिए, जहां उच्च शिक्षा और शोध को लेकर लगातार नई पहल की जा रही हैं, आईआईएम बोधगया की यह उपलब्धि अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह साबित करता है कि सही दिशा में किए गए प्रयासों और गुणवत्तापूर्ण शोध के बल पर छोटे शहरों में स्थित संस्थान भी वैश्विक मंच पर अपनी अलग पहचान बना सकते हैं। डॉ. अविरल कुमार तिवारी और संस्थान के अन्य तीन प्रोफेसरों की इस सफलता ने न केवल आईआईएम बोधगया बल्कि पूरे बिहार का नाम अंतरराष्ट्रीय शोध मानचित्र पर और अधिक मजबूती से स्थापित कर दिया है। आने वाले समय में इस उपलब्धि के सकारात्मक प्रभाव संस्थान की रैंकिंग और इसके शैक्षणिक विस्तार में देखे जा सकेंगे।

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आईआईएम बोधगया के चार प्रोफेसर दुनिया के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों की सूची में शामिल, डॉ. अविरल तिवारी को अर्थशास्त्र में मिला 47वां स्थान

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बिहार के गया जिले में स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) बोधगया के लिए एक अत्यंत गर्व और उपलब्धि का क्षण सामने आया है। संस्थान के चार प्रोफेसरों ने विश्व स्तर पर अपनी शोध क्षमता का लोहा मनवाते हुए दुनिया के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की प्रतिष्ठित सूची में अपना नाम दर्ज कराया है। यह सूची स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा जारी की जाती है, जिसे वैश्विक शैक्षणिक और अनुसंधान जगत में सर्वोच्च मानकों में से एक माना जाता है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने न केवल आईआईएम बोधगया की साख को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाया है, बल्कि बिहार के उच्च शिक्षा परिदृश्य के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ है।

इस प्रतिष्ठित सूची में विशेष रूप से डॉ. अविरल कुमार तिवारी की उपलब्धि अत्यंत उल्लेखनीय रही है। डॉ. अविरल कुमार तिवारी ने अर्थशास्त्र के व्यापक और प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में विश्व स्तर पर 47वां स्थान हासिल किया है। किसी भी भारतीय प्रबंधन संस्थान के शिक्षक के लिए अर्थशास्त्र जैसे विषय में वैश्विक स्तर पर शीर्ष 50 वैज्ञानिकों में जगह बनाना अपने आप में एक असाधारण सफलता है। डॉ. तिवारी को यह सम्मान उनके द्वारा किए गए गहन और प्रासंगिक शोध कार्यों के आधार पर प्रदान किया गया है।

डॉ. अविरल कुमार तिवारी के शोध का मुख्य केंद्र ऊर्जा अर्थशास्त्र, पर्यावरणीय अर्थशास्त्र और आर्थिक विकास से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण विषय रहे हैं। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में जहां एक ओर देश तेजी से आर्थिक विकास की ओर अग्रसर हैं, वहीं दूसरी ओर ऊर्जा संकट और पर्यावरणीय चुनौतियां भी लगातार बढ़ती जा रही हैं। ऐसे में डॉ. तिवारी का शोध इन तीनों आयामों को एक साथ जोड़कर नीति निर्माताओं और अकादमिक जगत के लिए नई दिशा प्रस्तुत करता है। ऊर्जा अर्थशास्त्र के क्षेत्र में उनके कार्य ने यह समझने में मदद की है कि ऊर्जा संसाधनों का इष्टतम उपयोग किस प्रकार आर्थिक प्रगति को सुनिश्चित कर सकता है। इसके अलावा, पर्यावरणीय अर्थशास्त्र पर उनके शोध ने विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए आवश्यक आर्थिक मॉडलों पर प्रकाश डाला है। आर्थिक विकास से जुड़े उनके निरंतर और गुणवत्तापूर्ण शोध ही वह आधार बने, जिसके कारण उन्हें स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की इस वैश्विक सूची में जगह मिली है।

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा जारी की जाने वाली दुनिया के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की यह सूची वैश्विक अनुसंधान और शैक्षणिक उत्कृष्टता का एक प्रमुख मानक मानी जाती है। इस सूची का निर्माण विभिन्न वैज्ञानिक मापदंडों, शोध पत्रों के प्रभाव, उद्धरणों (साइटेशंस) की संख्या और शोध की समग्र गुणवत्ता के आधार पर किया जाता है। इसमें दुनिया भर के सभी विषयों और विधाओं के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं का मूल्यांकन होता है। ऐसे में किसी भी संस्थान के शिक्षकों का इस सूची में चयनित होना यह स्पष्ट करता है कि उनका शोध कार्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रासंगिक, प्रभावशाली और उच्च गुणवत्ता वाला है।

आईआईएम बोधगया के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि एक साथ संस्थान के चार प्रोफेसरों ने इस वैश्विक सूची में स्थान प्राप्त किया है। यह संस्थान के शैक्षणिक वातावरण, शोध को मिलने वाले प्रोत्साहन और वहां कार्यरत शिक्षकों की प्रतिभा का सीधा प्रमाण है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार डॉ. अविरल कुमार तिवारी के अलावा अन्य तीन प्रोफेसरों के नामों और उनके विशिष्ट शोध क्षेत्रों का विस्तृत ब्यौरा अभी स्रोत में स्पष्ट रूप से उल्लिखित नहीं है, लेकिन यह तथ्य निर्विवाद है कि कुल चार प्रोफेसरों ने यह मुकाम हासिल किया है।

बिहार के गया जिले में स्थित आईआईएम बोधगया देश के नए और तेजी से उभरते हुए प्रबंधन संस्थानों में से एक है। संस्थान ने अपनी स्थापना के बाद से ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और शोध पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। डॉ. अविरल कुमार तिवारी और अन्य सहयोगियों की इस वैश्विक उपलब्धि से संस्थान के छात्रों, शोधार्थियों और शिक्षकों में एक नया उत्साह और प्रेरणा संचारित हुई है। यह उपलब्धि भविष्य में देश-विदेश के मेधावी छात्रों को आईआईएम बोधगया की ओर आकर्षित करने में भी सहायक सिद्ध होगी।

अकादमिक जगत के जानकारों का मानना है कि जब किसी संस्थान के शिक्षक वैश्विक रैंकिंग में शीर्ष स्थान प्राप्त करते हैं, तो उसका सीधा लाभ वहां अध्ययनरत छात्रों को मिलता है। छात्रों को नवीनतम शोध, वैश्विक दृष्टिकोण और उच्च स्तरीय मार्गदर्शन प्राप्त होता है। डॉ. तिवारी का अर्थशास्त्र में 47वां स्थान यह दर्शाता है कि आईआईएम बोधगया अब केवल प्रबंधन शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्थिक नीतियों, ऊर्जा और पर्यावरण जैसे बहुआयामी विषयों पर भी गंभीर और प्रभावशाली शोध कर रहा है।

कुल मिलाकर, आईआईएम बोधगया के चार प्रोफेसरों का स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में शामिल होना संस्थान और राज्य दोनों के लिए एक गौरवशाली उपलब्धि है। डॉ. अविरल कुमार तिवारी द्वारा ऊर्जा अर्थशास्त्र, पर्यावरणीय अर्थशास्त्र और आर्थिक विकास के क्षेत्र में किए गए उत्कृष्ट शोध ने भारत की अकादमिक क्षमता को पूरी दुनिया के सामने एक बार फिर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है। यह सफलता आने वाले समय में संस्थान को और अधिक ऊंचाइयों पर ले जाने की एक मजबूत नींव का कार्य करेगी।