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Fri, Oct 9, 2026Updated 5:14 PM IST
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H-1B वीजा विवाद: जेडी वेंस के ‘बंधुआ मजदूर’ वाले बयान पर भारत ने जताई कड़ी आपत्ति, कहा- भारतीय पेशेवर ही संभाल रहे हैं अमेरिकी अर्थव्यवस्था

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वाशिंगटन/नई दिल्ली। अमेरिका में एच-1बी (H-1B) वीजा को लेकर एक बार फिर नया विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस द्वारा एच-1बी वीजा धारकों को लेकर दिए गए विवादास्पद बयान पर भारत सरकार ने कड़ी आपत्ति जताई है। वेंस ने वीजा लेकर अमेरिका में काम करने वाले विदेशी पेशेवरों की तुलना ‘बंधुआ मजदूरों’ से कर दी थी, जिसके बाद भारत ने स्पष्ट और दो टूक शब्दों में अपना पक्ष रखा है। भारतीय पक्ष ने यह स्पष्ट किया है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था को संभालने और उसे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाए रखने में भारतीय पेशेवरों का योगदान सबसे महत्वपूर्ण रहा है।

बता दें कि जेडी वेंस ने अपने हालिया बयान में कहा था कि जो लोग एच-1बी वीजा के जरिए अमेरिका आकर काम करते हैं, वे व्यावहारिक रूप से बंधुआ मजदूरों की तरह हैं। उनका तर्क था कि ये कर्मचारी अपने नियोक्ताओं पर पूरी तरह निर्भर रहते हैं और अपनी नौकरी बदलने या स्वतंत्र रूप से काम करने में सक्षम नहीं होते। वेंस के इस बयान ने न केवल भारत बल्कि दुनिया भर में मौजूद प्रवासी पेशेवरों के बीच गहरी चिंता पैदा कर दी है। अमेरिका में तकनीकी क्षेत्र और अन्य विशिष्ट पेशों में काम करने वाले लाखों विदेशी नागरिक एच-1बी वीजा पर निर्भर हैं, और उन्हें इस तरह के बयानों से अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता महसूस हो रही है।

वेंस के इस बयान के सामने आने के बाद भारत ने बिना किसी देरी के कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भारत ने वेंस के बयान पर सीधे तौर पर आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि यह टिप्पणी तथ्यों से परे और अनुचित है। भारतीय पक्ष ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था को गतिशील बनाए रखने और उसके विकास में भारतीय मूल के पेशेवरों की भूमिका किसी से छिपी नहीं है। भारत ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी कंपनियां, चाहे वह सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) का क्षेत्र हो, स्वास्थ्य सेवाएं हों, इंजीनियरिंग हो या वित्तीय सेवाएं, सभी में भारतीय कर्मचारियों का अत्यंत महत्वपूर्ण और निर्णायक योगदान रहा है। भारत का कहना है कि इन पेशेवरों को ‘बंधुआ मजदूर’ कहना उनकी कड़ी मेहनत, उच्च शिक्षा और अमेरिकी समाज में उनके बहुमूल्य योगदान का अपमान है।

इस पूरे विवाद में सबसे महत्वपूर्ण आंकड़ा यह है कि अमेरिका में एच-1बी वीजा प्राप्त करने वालों में सर्वाधिक हिस्सेदारी भारतीयों की है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, एच-1बी वीजा लेने वालों में लगभग 71 प्रतिशत भारतीय नागरिक हैं। यह आंकड़ा खुद बयां करता है कि अमेरिकी श्रम बाजार, विशेषकर उच्च कौशल वाले क्षेत्रों में, भारतीय पेशेवरों पर कितना अधिक निर्भर है। इतनी बड़ी संख्या में भारतीयों का अमेरिका में काम करना यह साबित करता है कि अमेरिकी उद्योगों को भारतीय प्रतिभाओं की कितनी आवश्यकता है। यदि इन 71 प्रतिशत भारतीय पेशेवरों को हटा दिया जाए, तो अमेरिका की कई प्रमुख कंपनियों और उद्योगों के संचालन पर गंभीर संकट आ सकता है, यह बात अमेरिकी कारोबारी जगत भी अच्छी तरह समझता है।

एच-1बी वीजा एक गैर-आप्रवासी वीजा है जो अमेरिकी कंपनियों को उन विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने की अनुमति देता है, जिनके पास किसी विशिष्ट पेशे में विशेषज्ञता होती है। इसमें मुख्य रूप से विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, गणित और चिकित्सा जैसे क्षेत्र शामिल हैं। अमेरिका में हर साल एक निश्चित संख्या में ही एच-1बी वीजा जारी किए जाते हैं, और इसके लिए भारी प्रतिस्पर्धा होती है। भारतीय आईटी कंपनियां और भारतीय मूल के इंजीनियर, डॉक्टर, वैज्ञानिक और अन्य पेशेवर इस वीजा श्रेणी के तहत अमेरिका में सबसे बड़ा समूह बनाते हैं। इसलिए, जब भी अमेरिकी राजनीति में एच-1बी वीजा को लेकर कोई विवादास्पद बयान आता है, तो उसका सीधा असर भारतीय समुदाय पर पड़ता है।

जेडी वेंस का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में आव्रजन नीतियों को लेकर लगातार बहस चल रही है। कुछ अमेरिकी नेताओं का मानना है कि एच-1बी वीजा कार्यक्रम का दुरुपयोग किया जा रहा है और इससे स्थानीय अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार पर असर पड़ता है। वहीं, दूसरी ओर अमेरिकी व्यापारिक संगठन और टेक कंपनियां लगातार इस बात पर जोर देती रही हैं कि उच्च कुशल विदेशी कर्मचारियों के बिना अमेरिकी अर्थव्यवस्था की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बनाए रखना संभव नहीं है। वेंस के बयान ने इस पुरानी बहस को एक बार फिर से सुर्खियों में ला दिया है।

भारत की ओर से दी गई प्रतिक्रिया को कूटनीतिक जानकार एक मजबूत और स्पष्ट संदेश के रूप में देख रहे हैं। भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने नागरिकों के सम्मान और उनके योगदान की अनदेखी बर्दाश्त नहीं करेगा। भारत ने तथ्यों और आंकड़ों के आधार पर वेंस के दावों को खारिज किया है। 71 प्रतिशत भारतीयों की भागीदारी का आंकड़ा पेश करके भारत ने यह रेखांकित किया है कि यह कोई छोटा मुद्दा नहीं है, बल्कि दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों और आर्थिक सहयोग का एक अभिन्न अंग है।

फिलहाल, इस विवाद के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिकी प्रशासन की ओर से एच-1बी वीजा नीतियों में कोई ठोस बदलाव किया जाता है या यह केवल एक राजनीतिक बयानबाजी तक ही सीमित रहेगा। लेकिन भारत का यह रुख स्पष्ट है कि वह अमेरिका में अपने पेशेवरों के अधिकारों और उनके सम्मान को लेकर पूरी तरह सतर्क है और किसी भी प्रकार की अनुचित टिप्पणी का तथ्यों के आधार पर कड़ा जवाब देना जारी रखेगा। वंदे भारत न्यूज़ की यह रिपोर्ट दोनों देशों के बीच चल रहे इस ताजा कूटनीतिक और आर्थिक विवाद के सभी पहलुओं को तथ्यात्मक रूप से प्रस्तुत करती है।

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H-1B वीजा विवाद: जेडी वेंस के ‘बंधुआ मजदूर’ वाले बयान पर भारत ने जताई कड़ी आपत्ति, कहा- भारतीय पेशेवर ही संभाल रहे हैं अमेरिकी अर्थव्यवस्था

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वाशिंगटन/नई दिल्ली। वंदे भारत न्यूज़। अमेरिका में H-1B वीजा को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस द्वारा दिए गए एक विवादित बयान पर भारत सरकार ने कड़ी आपत्ति जताई है। वेंस ने वीजा लेकर अमेरिका में काम करने वाले विदेशी पेशेवरों की तुलना ‘बंधुआ मजदूरों’ से कर दी थी, जिसके बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। भारत ने इस बयान का स्पष्ट और सख्त शब्दों में खंडन करते हुए यह स्पष्ट किया है कि भारतीय पेशेवर अमेरिकी अर्थव्यवस्था को संभालने और उसे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाए रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने हाल ही में एक बयान जारी करते हुए कहा था कि जो लोग वीजा लेकर अमेरिका आते हैं और यहाँ काम करते हैं, वे एक तरह से बंधुआ मजदूरों की तरह हैं। उनका यह बयान मुख्य रूप से H-1B वीजा कार्यक्रम और इसके तहत अमेरिका में कार्यरत विदेशी कर्मचारियों को लेकर दिया गया था। वेंस के इस बयान को अमेरिका में मौजूद लाखों विदेशी पेशेवरों, विशेषकर भारतीय आईटी और तकनीकी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए अपमानजनक माना जा रहा है। उनके इस बयान के बाद अमेरिका में रहने वाले प्रवासी समुदाय और विशेष रूप से भारतीय समुदाय में गहरी चिंता और असंतोष का माहौल व्याप्त हो गया है।

जेडी वेंस के इस विवादित बयान पर भारत की ओर से तीखी प्रतिक्रिया दी गई है। भारत ने वेंस के बयान पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए इसे पूरी तरह से अनुचित और आधारहीन करार दिया है। भारतीय पक्ष ने स्पष्ट तौर पर यह बात रखी है कि अमेरिका में काम करने वाले भारतीय पेशेवर किसी भी प्रकार के बंधुआ मजदूर नहीं हैं, बल्कि वे अपनी उच्च योग्यता, तकनीकी दक्षता और कड़ी मेहनत के बल पर अमेरिकी अर्थव्यवस्था को सीधे तौर पर संभाल रहे हैं। भारत ने यह भी रेखांकित किया है कि इन भारतीय कर्मचारियों के योगदान के बिना अमेरिका के कई प्रमुख औद्योगिक और तकनीकी क्षेत्रों का सुचारू रूप से संचालन होना लगभग असंभव है।

भारतीय पक्ष की इस प्रतिक्रिया को आंकड़ों के आधार पर भी बेहद मजबूत माना जा रहा है। उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में H-1B वीजा प्राप्त करने वालों में सर्वाधिक हिस्सेदारी भारतीय नागरिकों की ही है। कुल H-1B वीजा धारकों में लगभग 71 प्रतिशत भारतीय हैं। यह आंकड़ा अपने आप में यह साबित करता है कि अमेरिकी कंपनियां अपनी तकनीकी और बौद्धिक जरूरतों को पूरा करने के लिए किस हद तक भारतीय प्रतिभाओं पर निर्भर हैं। इतनी बड़ी संख्या में भारतीयों का इस वीजा श्रेणी में शामिल होना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारतीय पेशेवर अमेरिकी श्रम बाजार और उसकी समग्र अर्थव्यवस्था का एक अभिन्न और अत्यंत आवश्यक हिस्सा बन चुके हैं।

H-1B वीजा अमेरिका का एक गैर-आप्रवासी वीजा है, जो अमेरिकी कंपनियों को विशेषज्ञ व्यवसायों में विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने की अनुमति देता है। इस वीजा का उपयोग मुख्य रूप से सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), इंजीनियरिंग, विज्ञान, गणित और स्वास्थ्य सेवा जैसे उच्च कौशल वाले क्षेत्रों में किया जाता है। दशकों से भारतीय पेशेवर इस वीजा के माध्यम से अमेरिका जाकर वहां की प्रमुख तकनीकी कंपनियों, शोध संस्थानों और अन्य कॉर्पोरेट घरानों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सिलिकॉन वैली से लेकर न्यूयॉर्क तक, भारतीय मूल के कर्मचारी और इंजीनियर अमेरिकी नवाचार और विकास की रीढ़ माने जाते हैं।

जेडी वेंस के बयान और उसके बाद भारत की कड़ी प्रतिक्रिया ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और वैश्विक श्रम नीति के केंद्र में ला खड़ा किया है। जानकारों का मानना है कि वेंस का यह बयान अमेरिका की घरेलू राजनीति और आगामी चुनावी रणनीतियों से प्रेरित हो सकता है, लेकिन इसका सीधा असर भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों और अमेरिका में बसे भारतीय समुदाय की भावनाओं पर पड़ता है। भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने नागरिकों के सम्मान और उनके योगदान की अनदेखी को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा।

इस पूरे विवाद ने एक बार फिर से अमेरिका की आव्रजन नीतियों और H-1B वीजा कार्यक्रम की प्रासंगिकता पर बहस को तेज कर दिया है। अमेरिका में कई कारोबारी संगठन और तकनीकी दिग्गज पहले ही यह चेतावनी दे चुके हैं कि यदि H-1B वीजा नीतियों को अत्यधिक कठोर बनाया गया या विदेशी कर्मचारियों को हतोत्साहित किया गया, तो इससे अमेरिकी कंपनियों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। भारत का यह रुख कि भारतीय पेशेवर ही अमेरिकी अर्थव्यवस्था को संभाल रहे हैं, इसी व्यापक आर्थिक वास्तविकता को दर्शाता है।

फिलहाल, इस मामले में आगे क्या कूटनीतिक कदम उठाए जाएंगे, इस पर दोनों देशों की सरकारों की निगाहें टिकी हुई हैं। हालांकि, भारत द्वारा 71 प्रतिशत की हिस्सेदारी का हवाला देते हुए दी गई यह स्पष्ट प्रतिक्रिया इस बात का संकेत है कि नई दिल्ली अपने पेशेवरों के अधिकारों और उनकी गरिमा की रक्षा के लिए हर स्तर पर ठोस रुख अपनाने को तैयार है। वंदे भारत न्यूज़ की यह रिपोर्ट उपलब्ध स्रोत जानकारी पर आधारित है और इसमें किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत राय या अनुमान शामिल नहीं है।