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Sun, Oct 11, 2026Updated 6:47 PM IST
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चंडीगढ़ डंप से कचरा हटाने की डेडलाइन 15 नवंबर तय: हाईकोर्ट ने कहा- मामला खत्म करना जरूरी, कमिश्नर ने सौंपा हलफनामा

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चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ के डड्डूमाजरा डंप यार्ड में जमा कचरे के पहाड़ को साफ करने और शहर की कचरा प्रबंधन व्यवस्था को दुरुस्त करने के मामले में एक महत्वपूर्ण सुनवाई की। इस दौरान हाईकोर्ट ने डंप यार्ड से बचे हुए कचरे को पूरी तरह से हटाने के लिए 15 नवंबर की स्पष्ट समयसीमा तय कर दी है। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि इस लंबित मामले को अब जल्द से जल्द खत्म करना बेहद जरूरी हो गया है, ताकि शहर के निवासियों को कचरे के ढेर से उत्पन्न होने वाली समस्याओं से स्थायी राहत मिल सके।

इस मामले में पिछली सुनवाई के दौरान पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ नगर निगम के कमिश्नर अमित कुमार को निर्देश दिए थे कि वह शहर की वर्तमान कचरा प्रोसेसिंग क्षमता, डड्डूमाजरा डंप यार्ड में बचे हुए कचरे को साफ करने की निर्धारित समयसीमा और इस बात की पुख्ता गारंटी के संबंध में विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराएं कि भविष्य में कचरे को किसी अन्य स्थान पर अनधिकृत रूप से डंप नहीं किया जाएगा। इन निर्देशों के अनुपालन में कमिश्नर अमित कुमार ने हाईकोर्ट के समक्ष अपना आधिकारिक हलफनामा दायर किया है, जिसमें उन्होंने अदालत को अवगत कराया है कि डड्डूमाजरा में जमा पुराने कचरे की बायोमाइनिंग का कार्य पूर्ण रूप से पूरा कर लिया गया है।

कमिश्नर द्वारा दायर किए गए हलफनामे में दी गई जानकारी के अनुसार, डड्डूमाजरा डंप यार्ड में वर्षों से पड़े लीगेसी वेस्ट यानी पुराने कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करने के लिए बायोमाइनिंग की प्रक्रिया अपनाई गई थी, जिसे अब सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। बायोमाइनिंग एक ऐसी तकनीक है जिसके माध्यम से डंप यार्ड में लंबे समय से जमा कचरे को छांटकर उसमें से उपयोगी सामग्री, मिट्टी और अन्य तत्वों को अलग किया जाता है, जिससे कचरे का कुल आयतन काफी कम हो जाता है और पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को भी नियंत्रित किया जा सकता है।

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए यह स्पष्ट संदेश दिया है कि डड्डूमाजरा में कचरे का विशाल पहाड़ बन जाना शहर के लिए एक गंभीर समस्या रही है और अब इस मामले को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाकर इसे हमेशा के लिए खत्म करना अत्यंत आवश्यक है। अदालत ने 15 नवंबर की जो डेडलाइन तय की है, वह चंडीगढ़ नगर निगम और प्रशासन के लिए कचरा मुक्त डंप यार्ड सुनिश्चित करने की दिशा में एक अंतिम अवसर के रूप में देखी जा रही है।

चंडीगढ़ जैसे योजनाबद्ध शहर में कचरा निस्तारण की व्यवस्था को लेकर उठते रहे सवाल और डड्डूमाजरा डंप यार्ड की बदहाल स्थिति को लेकर नागरिकों और पर्यावरणविदों की ओर से लगातार चिंता जताई जाती रही है। डंप यार्ड में कचरे का अत्यधिक जमाव न केवल भूमिगत जल को प्रदूषित करने का खतरा पैदा करता है, बल्कि इसके कारण उत्पन्न होने वाली दुर्गंध और मीथेन जैसी गैसें आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी एक बड़ा खतरा साबित होती हैं। यही कारण है कि हाईकोर्ट ने इस जनहित के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए नगर निगम से ठोस और समयबद्ध कार्रवाई की मांग की है।

हाईकोर्ट ने कमिश्नर अमित कुमार से यह भी स्पष्ट रूप से जानना चाहा था कि शहर में प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले नए कचरे को संसाधित करने के लिए मौजूदा कचरा प्रोसेसिंग क्षमता पर्याप्त है या नहीं। यदि क्षमता कम है, तो उसे बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। इसके अलावा, अदालत ने इस बात पर भी सख्ती दिखाई कि पुराने कचरे को हटाने के बाद नए कचरे को डड्डूमाजरा या शहर के किसी अन्य हिस्से में खुले में डंप करने की प्रवृत्ति पर पूरी तरह से रोक लगनी चाहिए।

अब जबकि कमिश्नर ने अपने हलफनामे में पुराने कचरे की बायोमाइनिंग पूरी होने की पुष्टि कर दी है, तो आगामी दिनों में नगर निगम के सामने सबसे बड़ी चुनौती 15 नवंबर की डेडलाइन से पहले बची हुई प्रक्रियाओं को पूर्ण करने और हाईकोर्ट द्वारा पूछे गए सभी सवालों का संतोषजनक उत्तर देने की होगी। वंदे भारत न्यूज़ की इस रिपोर्ट के अनुसार, चंडीगढ़ प्रशासन और नगर निगम के अधिकारी अब इस डेडलाइन को पूरा करने के लिए युद्धस्तर पर काम कर रहे हैं, ताकि हाईकोर्ट के आदेशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जा सके और डड्डूमाजरा को कचरे के पहाड़ से मुक्त कराया जा सके।