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Sun, Oct 11, 2026Updated 6:46 PM IST
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तरनतारन में टीबी मुक्त भारत अभियान की शुरुआत, 8 पंचायतों के सरपंच और 5 टीबी विजेताओं को किया गया सम्मानित

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तरनतारन। पंजाब के तरनतारन जिले में क्षय रोग (टीबी) जैसी गंभीर बीमारी के पूर्ण उन्मूलन की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से संयुक्त रूप से J.O.S.H. (जोश)-टीबी मुक्त भारत अभियान की औपचारिक शुरुआत की गई है। इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य जिले को पूरी तरह से टीबी मुक्त बनाना और समाज में इस बीमारी को लेकर फैली भ्रांतियों तथा जागरूकता की कमी को दूर करना है। कार्यक्रम के दौरान उन आठ पंचायतों के सरपंचों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया, जिन्होंने अपने-अपने गांवों को टीबी मुक्त घोषित करवाने में अहम भूमिका निभाई है। इसके साथ ही, पांच ऐसे व्यक्तियों को भी मंच पर बुलाकर सम्मानित किया गया जिन्होंने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और सही उपचार से इस जानलेवा बीमारी को मात दी है और अब वे पूरी तरह स्वस्थ जीवन जी रहे हैं।

इस अभियान की शुरुआत के अवसर पर आयोजित किए गए विशेष समारोह में जिला टीबी टीम के सदस्यों ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया। इन सभी टीम सदस्यों को उनके द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्य और टीबी उन्मूलन के प्रति उनकी अथक मेहनत के लिए सम्मानित किया गया। जानकारी के अनुसार, इस कार्यक्रम में जिले के उपायुक्त राहुल ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। उन्होंने टीबी मुक्त घोषित की गई आठ पंचायतों के सरपंचों, बीमारी को हराकर पूरी तरह स्वस्थ हुए पांच टीबी विजेताओं (TB Winners) और जिला टीबी टीम के समर्पित सदस्यों को सम्मानित किया। उपायुक्त राहुल ने इस अवसर पर जिले को टीबी मुक्त बनाने के लिए चलाए जा रहे अभियान की सराहना करते हुए सभी ग्रामीणों और स्वास्थ्य कर्मचारियों से इस दिशा में और अधिक सहयोग करने की अपील की।

J.O.S.H. (जोश)-टीबी मुक्त भारत अभियान की शुरुआत तरनतारन जिले के लिए एक ऐतिहासिक पहल मानी जा रही है। यह अभियान केवल सरकारी स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए पंचायती राज संस्थाओं और स्थानीय समुदाय को भी इसमें पूरी तरह से जोड़ा गया है। आठ पंचायतों का टीबी मुक्त होना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि यदि स्थानीय नेतृत्व, स्वास्थ्य विभाग और ग्रामीण जनता मिलकर काम करें तो टीबी जैसी गंभीर बीमारी को जड़ से खत्म किया जा सकता है। इन पंचायतों के सरपंचों को सम्मानित करने का उद्देश्य अन्य गांवों के प्रतिनिधियों को भी प्रेरित करना है, ताकि वे भी अपने क्षेत्रों में टीबी उन्मूलन के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं।

कार्यक्रम में सम्मानित किए गए पांच टीबी विजेताओं (TB Winners) की कहानी समाज के लिए एक बहुत बड़ी प्रेरणा है। ये वे लोग हैं जिन्हें कभी टीबी जैसी गंभीर बीमारी ने घेर लिया था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। नियमित उपचार, डॉक्टरों की सलाह का पालन और अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर उन्होंने इस बीमारी को पूरी तरह से हरा दिया। इन्हें ‘टीबी विजेता’ का नाम देकर सम्मानित करने का मुख्य उद्देश्य यह संदेश देना है कि टीबी कोई लाइलाज बीमारी नहीं है और सही समय पर पहचान व उचित इलाज से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। इन विजेताओं की मौजूदगी ने कार्यक्रम में शामिल अन्य लोगों और मरीजों को नई उम्मीद और हौसला दिया है।

तरनतारन जिले में टीबी के उन्मूलन के लिए जिला टीबी टीम लगातार महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। इस टीम के सदस्य गांव-गांव जाकर लोगों को इस बीमारी के लक्षणों, बचाव के उपायों और सरकार द्वारा दी जा रही मुफ्त सुविधाओं के बारे में जागरूक कर रहे हैं। टीम के सदस्यों को सम्मानित करके उनके मनोबल को बढ़ाया गया है, ताकि वे आगे भी इसी लगन और समर्पण के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते रहें। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का मानना है कि J.O.S.H. अभियान के तहत स्क्रीनिंग, जांच और उपचार की प्रक्रिया को और अधिक तेज किया जाएगा, जिससे कोई भी मरीज बिना इलाज के न रहे।

भारत सरकार ने पूरे देश को टीबी मुक्त बनाने का एक बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया हुआ है। इसी राष्ट्रीय लक्ष्य की पूर्ति के लिए राज्य और जिला स्तर पर विभिन्न अभियान चलाए जा रहे हैं। तरनतारन में शुरू किया गया J.O.S.H.-टीबी मुक्त भारत अभियान इसी राष्ट्रीय मिशन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस अभियान के माध्यम से न केवल मरीजों का समय पर पता लगाया जा रहा है, बल्कि उन्हें पोषण सहायता और सामाजिक सुरक्षा से भी जोड़ा जा रहा है।

कुल मिलाकर, तरनतारन जिले में J.O.S.H.-टीबी मुक्त भारत अभियान की शुरुआत और आठ पंचायतों के टीबी मुक्त होने का जश्न, जिले के स्वास्थ्य इतिहास में एक सुनहरा अध्याय है। उपायुक्त राहुल के मार्गदर्शन में हुए इस कार्यक्रम ने यह साबित कर दिया है कि प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, पंचायत प्रतिनिधि और आम जनता के सामूहिक प्रयासों से टीबी जैसी बीमारी को जड़ से उखाड़ फेंकना संभव है। अब जिले के अन्य गांवों और पंचायतों से भी इसी प्रकार की सफलता की उम्मीद की जा रही है, ताकि पूरा तरनतारन जिला जल्द से जल्द टीबी मुक्त घोषित किया जा सके।