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Sat, Oct 10, 2026Updated 3:47 PM IST
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नर्मदापुरम: नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी रोहित भरदेले को पॉक्सो कोर्ट ने सुनाई 20 साल की उम्रकैद, शादी का झांसा देकर ले गया था ग्वालियर

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नर्मदापुरम। मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में नाबालिग लड़की से दुष्कर्म और अपहरण के अत्यंत सनसनीखेज मामले में विशेष न्यायालय (पॉक्सो एक्ट) ने एक बड़ा और कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने गुरुवार को इस मामले में आरोपी रोहित भरदेले को दोषी करार देते हुए उसे 20 वर्ष की उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही न्यायालय ने दोषी पर अर्थदंड भी लगाया है। यह फैसला नर्मदापुरम के विशेष पॉक्सो न्यायालय द्वारा सुनाया गया, जिसने पीड़ित नाबालिग लड़की को न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि पर गौर करें तो यह घटना बेहद दर्दनाक और संगीन है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी रोहित भरदेले ने पीड़ित नाबालिग लड़की को शादी का झांसा दिया था। शादी का भरोसा दिलाकर उसने मासूम लड़की को अपने साथ नर्मदापुरम से ग्वालियर तक ले जाने की साजिश रची और उसे बहला-फुसलाकर वहां ले गया। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि किस तरह आरोपी ने पूर्व नियोजित तरीके से नाबालिग का अपहरण किया और उसे उसके परिवार तथा सुरक्षित माहौल से दूर ले गया।

आरोपी रोहित भरदेले नाबालिग लड़की को ग्वालियर स्थित अपनी मौसी के घर ले गया था। सूत्रों के अनुसार, इसी मौसी के घर में रहते हुए आरोपी ने नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म की इस जघन्य वारदात को अंजाम दिया। शादी का झूठा वादा करके एक नाबालिग को उसके घर से दूर ले जाना और फिर किसी रिश्तेदार के घर में उसके साथ बलात्कार करना, कानून की नजर में अत्यंत गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। इस घटना ने न केवल पीड़िता की जिंदगी को तहस-नहस किया, बल्कि समाज में भी सुरक्षा और महिलाओं-बच्चियों के प्रति बढ़ते खतरों को लेकर गहरी चिंता पैदा की थी।

घटना के बाद जब इस मामले की जानकारी पीड़िता के परिजनों और संबंधित अधिकारियों को हुई, तो पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज किया। नाबालिग से जुड़े होने के कारण इस प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के साथ-साथ पॉक्सो (बाल यौन अपराधों से संरक्षण) अधिनियम के तहत भी सख्त धाराएं लगाई गईं। पॉक्सो एक्ट बच्चों को यौन अपराधों से बचाने और ऐसे अपराधों में शामिल दोषियों को कड़ी सजा सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया एक विशेष कानून है। इस कानून के तहत मामलों की सुनवाई के लिए विशेष न्यायालयों का गठन किया जाता है, ताकि पीड़ित बच्चों को जल्द और संवेदनशील तरीके से न्याय मिल सके।

नर्मदापुरम के विशेष पॉक्सो न्यायालय में इस मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद गुरुवार को अदालत ने अपना निर्णय सुनाया। न्यायाधीश ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और तथ्यों का गहन अवलोकन करने के बाद आरोपी रोहित भरदेले को अपहरण और नाबालिग से दुष्कर्म का दोषी पाया। अदालत ने कोई नरमी नहीं बरतते हुए दोषी को 20 वर्ष की उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके अतिरिक्त, न्यायालय ने दोषी पर अर्थदंड भी लगाया है, जो इस बात का स्पष्ट संदेश देता है कि ऐसे जघन्य अपराधों के लिए कानून में सख्त दंड का प्रावधान है और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।

विशेषज्ञों और कानूनी जानकारों का मानना है कि पॉक्सो अदालतों द्वारा सुनाए जाने वाले ऐसे कड़े फैसले समाज में एक मजबूत संदेश भेजते हैं। खासकर उन मामलों में जहां नाबालिग बच्चियों को शादी या अन्य प्रकार के लालच देकर फंसाया जाता है, वहां न्यायपालिका की यह सख्ती बेहद जरूरी है। नर्मदापुरम के इस फैसले ने यह साबित किया है कि यदि जांच एजेंसियां ठोस सबूत इकट्ठा करें और अभियोजन पक्ष मजबूती से केस लड़े, तो पॉक्सो एक्ट के तहत दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जा सकती है।

यह मामला मध्य प्रदेश में महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर चल रही बहस के बीच एक महत्वपूर्ण न्यायिक मिसाल के रूप में सामने आया है। राज्य में पिछले कुछ समय से पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामलों में तेजी से सुनवाई और कड़ी सजा सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है। नर्मदापुरम के विशेष न्यायालय द्वारा रोहित भरदेले को दी गई 20 साल की उम्रकैद की सजा इसी दिशा में उठाया गया एक ठोस कदम है।

अदालत के इस फैसले से पीड़ित नाबालिग लड़की और उसके परिजनों को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, ऐसे मामलों में पीड़िता को मानसिक और शारीरिक रूप से पूरी तरह उबरने में लंबा समय लगता है, जिसके लिए उन्हें निरंतर काउंसलिंग और सामाजिक सहयोग की आवश्यकता होती है। प्रशासन और संबंधित विभागों की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे पीड़िता की पहचान गुप्त रखते हुए उसके पुनर्वास और सुरक्षा की दिशा में आवश्यक कदम उठाएं।

कुल मिलाकर, नर्मदापुरम पॉक्सो कोर्ट का यह फैसला उन सभी अपराधियों के लिए एक कड़ी चेतावनी है, जो नाबालिग बच्चियों की मासूमियत का फायदा उठाकर उन्हें झांसे में लेते हैं और उनके साथ जघन्य अपराध करते हैं। 20 वर्ष की उम्रकैद और अर्थदंड की यह सजा यह स्पष्ट करती है कि कानून के हाथ लंबे हैं और बच्चियों के साथ होने वाले अपराधों में शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई जा रही है।