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अनूपपुर: कलेक्ट्रेट परिसर में प्रतिबंधित क्षेत्र के बावजूद ज्ञापन देने पर पटवारी संघ नेताओं पर FIR दर्ज, SDM के निर्देश पर नायब तहसीलदार ने की शिकायत

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अनूपपुर। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में पटवारी संघ के नेताओं के खिलाफ पुलिस ने प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। यह कार्रवाई 8 अक्टूबर को कलेक्ट्रेट परिसर में बिना पूर्व अनुमति के ज्ञापन सौंपने के मामले में की गई है। उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन द्वारा 1 अक्टूबर को ही कलेक्ट्रेट सहित कई सरकारी कार्यालयों के परिसरों को प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया गया था और वहां धारा 163 लागू कर दी गई थी। इसके बावजूद पटवारी संघ के नेताओं ने नियमों का उल्लंघन करते हुए ज्ञापन सौंपा, जिसके बाद यह मामला सामने आया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, उप-जिलाधिकारी (SDM) के निर्देश पर नायब तहसीलदार ने इस संबंध में पुलिस थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने पटवारी संघ के नेताओं के विरुद्ध मामला पंजीबद्ध कर लिया है। यह घटनाक्रम जिले के राजस्व अमले और जिला प्रशासन के बीच चल रहे तनाव को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, कलेक्टर ने 1 अक्टूबर को एक आदेश जारी कर कलेक्ट्रेट परिसर और अन्य प्रमुख सरकारी कार्यालयों को प्रतिबंधित इलाका घोषित किया था। इस आदेश का मुख्य उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में कामकाज को सुचारू रूप से चलाना और बिना अनुमति के होने वाले प्रदर्शनों या भीड़भाड़ को रोकना था।

धारा 163 के तहत किसी भी स्थान पर पांच या उससे अधिक व्यक्तियों के एकत्र होने पर रोक लगाई जाती है। इस धारा का उद्देश्य शांति व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी प्रकार के अवैध जमावड़े को रोकना होता है। प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि यदि कोई संगठन या व्यक्ति ज्ञापन देना चाहता है, तो उसे पहले सक्षम अधिकारी से लिखित अनुमति लेनी होगी। हालांकि, 8 अक्टूबर को पटवारी संघ के नेताओं और सदस्यों ने इन निर्देशों को दरकिनार करते हुए कलेक्ट्रेट परिसर में पहुंचकर ज्ञापन सौंप दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों और उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पटवारी संघ के नेता अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन देने कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। चूंकि पूरा परिसर प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया जा चुका था और धारा 163 लागू थी, इसलिए उनका बिना अनुमति के वहां एकत्र होना और ज्ञापन सौंपना सीधे तौर पर प्रशासनिक आदेशों का उल्लंघन माना गया। इस घटना की जानकारी जब उप-जिलाधिकारी (SDM) को दी गई, तो उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए नायब तहसीलदार को निर्देश दिया कि वे इस संबंध में पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं।

इसके बाद नायब तहसीलदार ने संबंधित पुलिस थाने में पहुंचकर पटवारी संघ के नेताओं के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया कि 1 अक्टूबर के कलेक्टर के आदेश और धारा 163 के तहत लगी रोक के बावजूद आरोपियों ने बिना अनुमति के कलेक्ट्रेट परिसर में प्रवेश किया और ज्ञापन सौंपा। पुलिस ने नायब तहसीलदार की शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर ली है और मामले की जांच शुरू कर दी है।

यह पहली बार नहीं है जब पटवारियों और प्रशासन के बीच किसी मुद्दे को लेकर टकराव की स्थिति बनी हो। राजस्व विभाग के पटवारी समय-समय पर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर ज्ञापन और प्रदर्शन करते रहे हैं। उनकी मांगों में कार्यभार कम करने, वेतन विसंगतियां दूर करने और अन्य सेवा शर्तों में सुधार जैसे मुद्दे शामिल होते हैं। हालांकि, वर्तमान मामले में मुख्य मुद्दा उनकी मांगें नहीं, बल्कि प्रतिबंधित क्षेत्र में बिना अनुमति के प्रवेश करना और धारा 163 का उल्लंघन करना है।

जिला प्रशासन का रुख इस मामले में काफी सख्त रहा है। कलेक्टर द्वारा 1 अक्टूबर को जारी किए गए आदेश का उद्देश्य सरकारी कार्यालयों की सुरक्षा और गरिमा को बनाए रखना था। प्रशासन का मानना है कि यदि बिना अनुमति के इस तरह के जमावड़े की छूट दे दी गई, तो भविष्य में अन्य संगठन भी इसी तरह का रास्ता अपना सकते हैं, जिससे सरकारी कामकाज प्रभावित होगा।

वहीं, पटवारी संघ की ओर से इस FIR पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। यह स्पष्ट नहीं है कि संघ के नेता इस प्राथमिकी के खिलाफ कोई कानूनी कदम उठाएंगे या फिर अपनी मांगों को लेकर कोई अन्य मार्ग अपनाएंगे। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और अब आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।

अनूपपुर जिले में इस घटना के बाद राजस्व अमले में हड़कंप की स्थिति है। पटवारियों पर दर्ज हुई इस FIR ने अन्य सरकारी कर्मचारी संगठनों का भी ध्यान खींचा है। जानकारों का मानना है कि यह मामला प्रशासन और कर्मचारी संगठनों के बीच भविष्य में होने वाले संवाद और प्रदर्शनों की प्रकृति को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह देखना होगा कि इस प्रकरण में आगे क्या कार्रवाई होती है।