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Sat, Oct 10, 2026Updated 4:40 PM IST
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पति की मौत के बाद सदमे में तीन माह की बच्ची संग भटकी महिला, देवास पुलिस ने कराया इलाज और विदिशा पहुंचाया

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देवास। मध्य प्रदेश के देवास जिले में मानवीय संवेदनाओं का एक बेहतरीन उदाहरण सामने आया है, जहां स्थानीय पुलिस ने पति की अचानक हुई मौत के गहरे सदमे से जूझ रही एक असहाय महिला और उसकी मात्र तीन माह की बीमार मासूम बच्ची की मदद कर उनके परिजनों तक सुरक्षित पहुंचाने का कार्य किया है। इस घटनाक्रम में देवास जिले के बागली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बीएनपी थाना पुलिस की सक्रियता और संवेदनशीलता ने न केवल एक बीमार शिशु की जान बचाई, बल्कि एक टूटी हुई मां को भी उसके घर लौटने का रास्ता दिखाया। वंदे भारत न्यूज़ की इस विशेष रिपोर्ट में इस पूरी घटना का विस्तृत ब्योरा प्रस्तुत किया जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित महिला हाल ही में अपने पति की मृत्यु के कारण गहरे मानसिक आघात और सदमे से गुजर रही थी। पति के निधन के बाद पैदा हुई अवसादग्रस्त स्थिति में महिला ने अपनी महज तीन महीने की दूधमुंही बच्ची को गोद में लिया और बिना किसी को बताए अपना घर छोड़कर निकल गई। मानसिक रूप से विक्षिप्त और दुखी अवस्था में वह भटकते हुए एक यात्री बस में सवार हो गई। यह बस उसे भटकाते हुए देवास जिले तक ले आई। महिला के पास न तो कोई पहचान पत्र था, न पर्याप्त धन और न ही कोई ऐसा व्यक्ति जो उस मार्गदर्शन करता कि उसे कहां जाना है। वह केवल अपनी मासूम बच्ची के साथ अनजान रास्तों पर भटक रही थी।

इसी दौरान, देवास जिले के जामगोद क्षेत्र के समीप बीएनपी थाना पुलिस को नियमित गश्त के दौरान यह महिला सड़क किनारे अपनी छोटी सी बच्ची के साथ असहाय हालत में मिली। पुलिसकर्मियों ने जब महिला से बात करने का प्रयास किया, तो उसकी स्थिति देखकर तुरंत समझ आ गया कि वह किसी गंभीर मानसिक तनाव से गुजर रही है। सबसे चिंताजनक बात यह थी कि महिला की गोद में मौजूद तीन माह की बच्ची की तबीयत काफी खराब थी। शिशु बीमार थी और उसे तत्काल चिकित्सीय सहायता की आवश्यकता थी। बीएनपी थाना पुलिस ने बिना समय गंवाए त्वरित कार्रवाई करते हुए पहले महिला और उसकी बीमार बच्ची को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।

पुलिस ने मानवीय आधार पर प्राथमिकता देते हुए सबसे पहले बीमार मासूम बच्ची के इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित की। बच्ची को चिकित्सकीय देखभाल उपलब्ध कराई गई ताकि उसकी बिगड़ती तबीयत को नियंत्रित किया जा सके। इसके साथ ही, पुलिस ने इस ठंड और कठिन परिस्थिति में भटक रही महिला और उसकी बच्ची के लिए साफ कपड़ों और भोजन की समुचित व्यवस्था की। कई घंटों से भूखी-प्यासी और परेशान महिला को जब पुलिस द्वारा भोजन और कपड़े दिए गए, तो उसकी स्थिति में कुछ सुधार आया। पुलिसकर्मियों ने एक जिम्मेदार नागरिक की तरह व्यवहार करते हुए महिला को ढांढस बंधाया और उसके विश्वास को जीतने का प्रयास किया।

महिला को सहज करने के बाद, बीएनपी थाना पुलिस ने उसके बारे में विस्तृत जानकारी जुटाने का कार्य शुरू किया। पुलिस ने महिला से धैर्यपूर्वक पूछताछ की और उसके द्वारा दी गई अधूरी और अस्पष्ट जानकारी के आधार पर उसके मूल निवास स्थान का पता लगाने का प्रयास किया। काफी मशक्कत और छानबीन के बाद पुलिस को यह जानकारी प्राप्त हुई कि महिला का संबंध विदिशा जिले से है। यह पता चलते ही देवास पुलिस ने तुरंत विदिशा जिले की पुलिस से संपर्क स्थापित किया और इस पूरे मामले की जानकारी साझा की। दोनों जिलों की पुलिस के बीच समन्वय स्थापित कर महिला और उसकी बच्ची को सुरक्षित रूप से विदिशा भेजने की योजना बनाई गई।

देवास पुलिस ने केवल विदिशा पुलिस को सूचना देकर अपना दायित्व समाप्त नहीं समझा, बल्कि उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि महिला और उसकी तीन माह की बच्ची सुरक्षित रूप से विदिशा पहुंच जाएं। उचित व्यवस्था के तहत महिला को विदिशा के लिए रवाना किया गया, जहां उसे उसके परिजनों या संबंधित अधिकारियों के सुपुर्द किया जाना था। पुलिस की इस तत्परता से एक अनाथ होती बच्ची और विधवा मां को सुरक्षित ठिकाना मिल सका।

देवास जिले की बीएनपी थाना पुलिस की इस सराहनीय और संवेदनशील पहल की सभी स्तरों पर प्रशंसा हो रही है। आम तौर पर पुलिस को केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने वाली एजेंसी के रूप में देखा जाता है, लेकिन इस घटना ने साबित किया कि मध्य प्रदेश पुलिस जनसेवा और मानवीय सहायता के प्रति भी पूरी तरह से कटिबद्ध है। बीएनपी थाना पुलिस ने जिस प्रकार से एक बीमार शिशु का इलाज कराया, महिला को कपड़े और भोजन उपलब्ध कराया और उसे उसके गृह जिले विदिशा तक सुरक्षित पहुंचाने की व्यवस्था की, वह पुलिसिंग के उत्कृष्ट मानकों को दर्शाता है। इस पूरी घटना ने यह संदेश दिया है कि मुश्किल समय में पुलिस एक अभिभावक और रक्षक की भूमिका में आकर समाज के कमजोर वर्गों की ढाल बन सकती है।