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Sat, Oct 10, 2026Updated 5:24 PM IST
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बालाघाट: स्वामित्व योजना का काम करने से इनकार पर 7 पटवारी निलंबित, 72 को नोटिस और 3 का तबादला

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मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में स्वामित्व योजना के तहत आवंटित कार्यों को करने से इनकार करने वाले पटवारियों के खिलाफ जिला प्रशासन ने सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। इस कार्रवाई के तहत सात पटवारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, जबकि 72 पटवारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इसके अतिरिक्त, तीन पटवारियों को उनकी वर्तमान तैनाती से हटाकर अन्य स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है। यह कदम उन घटनाओं के बाद उठाया गया है, जिनमें पटवारियों ने सामूहिक रूप से कार्य बंद करने और शासकीय वॉट्सऐप ग्रुप छोड़ने जैसे कृत्य किए थे।

जिला प्रशासन द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार, पटवारियों ने सात अक्टूबर से स्वामित्व योजना से जुड़े अपने दायित्वों का निर्वहन करना बंद कर दिया था। इस दौरान उन्होंने न केवल सरकारी ड्यूटी से विरत रहने का निर्णय लिया, बल्कि आधिकारिक संवाद और दिशा-निर्देशों के लिए उपयोग किए जाने वाले शासकीय वॉट्सऐप ग्रुप्स को भी छोड़ दिया। सूत्रों के मुताबिक, कई पटवारियों ने सामूहिक अवकाश पर जाने का रास्ता अपनाया, जिसे प्रशासन ने अनुशासनहीनता और शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न करने के रूप में लिया। इस सामूहिक विरोध के मद्देनजर जिला प्रशासन ने बिना किसी देरी के कार्रवाई करते हुए दोषी पाए गए अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कदम उठाए हैं।

स्वामित्व योजना (SVAMITVA – Survey of Villages and Mapping with Improvised Technology in Village Areas) केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को उनके आवासीय भूमि का स्पष्ट और वैध स्वामित्व अधिकार प्रदान करना है। इस योजना के तहत आधुनिक तकनीक, विशेष रूप से ड्रोन सर्वेक्षण का उपयोग करके गांवों का सटीक मैपिंग किया जाता है। इसके माध्यम से ग्रामीणों को ‘स्वामित्व कार्ड’ या संपत्ति कार्ड दिए जाते हैं, जो उन्हें अपनी संपत्ति का आर्थिक लाभ उठाने, बैंकों से ऋण प्राप्त करने और भूमि संबंधी विवादों से बचने में सक्षम बनाता है। मध्य प्रदेश में इस योजना का क्रियान्वयन राजस्व विभाग और पंचायत विभाग के समन्वय से किया जा रहा है, जिसमें पटवारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। वे जमीनी स्तर पर सर्वेक्षण, दस्तावेजों के सत्यापन और रिकॉर्ड अपडेट करने के लिए जिम्मेदार होते हैं।

बालाघाट जिला प्रशासन ने पटवारियों की इस सामूहिक कार्यबहिष्कार को गंभीरता से लिया है, क्योंकि इससे राज्य सरकार और केंद्र सरकार की एक प्रमुख कल्याणकारी योजना के क्रियान्वयन में सीधी बाधा उत्पन्न हो रही थी। सात अक्टूबर से शुरू हुए इस विरोध के बाद प्रशासन ने स्थिति का आकलन किया और तुरंत कार्रवाई का निर्णय लिया। सात पटवारियों को निलंबित करने का फैसला इसलिए किया गया क्योंकि उन पर अनुशासनहीनता और सरकारी आदेशों की सीधी अवहेलना का आरोप लगा है। वहीं, जिन 72 पटवारियों को नोटिस दिया गया है, उनसे उनके व्यवहार और ड्यूटी से अनुपस्थित रहने के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया है। यदि उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो उनके खिलाफ भी आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

इसके साथ ही, तीन पटवारियों को उनके पुराने कार्यक्षेत्र से हटाकर नए स्थानों पर तैनात किया गया है। प्रशासन का मानना है कि कुछ मामलों में स्थानीय स्तर पर कार्यप्रणाली में सुधार लाने और जिम्मेदारी तय करने के लिए अधिकारियों का स्थानांतरण आवश्यक होता है। यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि स्वामित्व योजना का कार्य बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ सके और ग्रामीणों को समय पर उनके अधिकार मिल सकें।

मध्य प्रदेश में राजस्व विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों, विशेषकर पटवारियों की कार्यप्रणाली को लेकर समय-समय पर चर्चाएं होती रही हैं। पटवारी ग्रामीण भू-राजस्व प्रणाली की रीढ़ माने जाते हैं, और किसी भी भूमि संबंधी योजना की सफलता उनकी सक्रिय भागीदारी पर निर्भर करती है। हालांकि, जब सामूहिक रूप से ऐसे विरोध प्रदर्शन सामने आते हैं, तो जिला प्रशासन के पास कानून और नियमों के तहत सख्त कदम उठाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है, ताकि जनहित की योजनाएं प्रभावित न हों।

बालाघाट जिला प्रशासन की इस कार्रवाई से अन्य जिलों के राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों में भी यह संदेश गया है कि शासकीय कार्यों की उपेक्षा या सामूहिक अवकाश के नाम पर कार्यबहिष्कार को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि स्वामित्व योजना जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रमों में सहयोग देना सभी संबंधित कर्मचारियों का अनिवार्य दायित्व है।

वर्तमान में बालाघाट जिले में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है और निलंबित तथा नोटिस प्राप्त पटवारियों के स्थान पर वैकल्पिक व्यवस्था करके स्वामित्व योजना के लंबित कार्यों को पूरा करने की दिशा में प्रयास तेज कर दिए गए हैं। प्रशासन का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्रामीण लाभार्थियों को योजना का लाभ मिलने में किसी प्रकार की देरी न हो। यह पूरी घटना और उसके बाद हुई कार्रवाई दर्शाती है कि शासन-प्रशासन जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली किसी भी प्रकार की अड़चन को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है।