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Sat, Oct 10, 2026Updated 6:32 PM IST
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बारवाह: जयंती माता मंदिर क्षेत्र में तेंदुए की सक्रियता से दहशत, पुलिस बैठक में सुरक्षा का मुद्दा उठा; लोगों ने खुले में मांस बिक्री पर रोक की मांग की

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मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के बारवाह क्षेत्र में वन्यजीवों और मानवीय बस्तियों के बीच बढ़ते टकराव को लेकर स्थानीय स्तर पर गंभीर चिंता व्यक्त की जा रही है। हाल ही में जयंती माता मंदिर क्षेत्र में एक तेंदुए की सक्रियता देखे जाने के बाद स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं में भय का माहौल व्याप्त हो गया है। इस संवेदनशील मुद्दे पर शुक्रवार शाम को बारवाह थाना परिसर में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान विस्तार से चर्चा हुई। यह बैठक मुख्य रूप से आगामी नवदुर्गा महोत्सव, दशहरा और रावण दहन पर्व को शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने के उद्देश्य से बुलाई गई थी, लेकिन मंदिर क्षेत्र में तेंदुए की मौजूदगी के मामले ने इस बैठक में प्रमुखता से जगह बनाई।

बैठक में शामिल स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने पुलिस प्रशासन के समक्ष अपनी चिंताएं स्पष्ट शब्दों में रखीं। लोगों का कहना था कि जयंती माता मंदिर क्षेत्र में तेंदुए की सक्रियता किसी भी बड़ी दुर्घटना को आमंत्रण दे सकती है। विशेषकर त्योहारी सीजन में जब मंदिर परिसर और उसके आसपास भारी संख्या में श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों का जमावड़ा होता है, ऐसे में किसी हिंसक वन्यजीव की उपस्थिति अत्यंत खतरनाक साबित हो सकती है। नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि इस दिशा में तत्काल ठोस कदम उठाए जाएं ताकि जान-माल के किसी भी प्रकार के नुकसान को रोका जा सके।

इस बैठक के दौरान एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दा भी उभरकर सामने आया, जिस पर स्थानीय लोगों ने एकजुटता से अपनी आवाज बुलंद की। लोगों ने कहा कि क्षेत्र में खुले में मांस की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जानी चाहिए। स्थानीय निवासियों का तर्क था कि खुलेआम मांस बिक्री के कारण वन्यजीव, विशेषकर तेंदुए जैसे मांसाहारी जीव, रिहायशी और धार्मिक स्थलों की ओर आकर्षित होते हैं। मांस की गंध और उसकी सहज उपलब्धता वन्यजीवों को जंगलों से बाहर निकलकर शहरी या अर्ध-शहरी क्षेत्रों में आने के लिए प्रेरित करती है। लोगों ने स्पष्ट रूप से मांग की कि यदि नवदुर्गा महोत्सव और दशहरे जैसे बड़े त्योहारों के दौरान जनसुरक्षा सुनिश्चित करनी है, तो खुले में मांस बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी अनिवार्य है।

पुलिस प्रशासन द्वारा आयोजित इस बैठक में केवल वन्यजीव संबंधी खतरे पर ही नहीं, बल्कि त्योहारों की समग्र तैयारियों पर भी विस्तृत चर्चा की गई। आगामी नवदुर्गा महोत्सव, दशहरा और रावण दहन पर्व को बिना किसी अप्रिय घटना के संपन्न कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। इसके लिए शुक्रवार शाम को थाना परिसर में बुलाई गई इस बैठक में सुरक्षा, यातायात, स्वच्छता और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं पर गहन मंथन किया गया। अधिकारियों ने त्योहारों के दौरान कानून व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए।

यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने पर भी बैठक में विशेष जोर दिया गया। दशहरा और रावण दहन के अवसर पर शहर में भारी वाहनों और पैदल यात्रियों की भीड़ को देखते हुए पुलिस ने ट्रैफिक डायवर्जन और पार्किंग की उचित व्यवस्था पर चर्चा की। इसके अलावा, त्योहारी सीजन में सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छता बनाए रखने और भीड़भाड़ वाले इलाकों में साफ-सफाई के पुख्ता इंतजाम करने पर भी सहमति बनी। सुरक्षा व्यवस्था के तहत संवेदनशील और अति-संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस बल की तैनाती, गश्त बढ़ाने और आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया दल को सतर्क रखने के निर्देश दिए गए।

जयंती माता मंदिर क्षेत्र में तेंदुए की सक्रियता के मुद्दे पर चर्चा के दौरान यह बात भी सामने आई कि वन विभाग और पुलिस प्रशासन को मिलकर काम करना होगा। हालांकि, वन विभाग की तरफ से इस बैठक में क्या ठोस कदम उठाने का आश्वासन दिया गया, इस बारे में अभी तक पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं हो पाई है। स्थानीय लोगों ने यह भी सुझाव दिया कि मंदिर क्षेत्र और उसके आसपास पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था की जाए और सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं, ताकि किसी भी वन्यजीव की गतिविधि पर पहले से नजर रखी जा सके।

कुल मिलाकर, बारवाह थाना परिसर में आयोजित यह बैठक आगामी त्योहारों की सुरक्षा तैयारियों के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर उत्पन्न हुए वन्यजीव संकट को लेकर भी काफी महत्वपूर्ण साबित हुई। लोगों द्वारा खुले में मांस बिक्री पर रोक लगाने की मांग ने इस बात को रेखांकित किया है कि वन्यजीवों के मानवीय बस्तियों में प्रवेश के पीछे कई मानवीय कारण भी जिम्मेदार होते हैं, जिन पर नियंत्रण पाना प्रशासन के साथ-साथ समाज की भी जिम्मेदारी है। अब देखना यह होगा कि पुलिस और संबंधित प्रशासनिक विभाग इन मांगों और सुझावों पर कितनी तेजी से और कितने प्रभावी ढंग से अमल करते हैं, ताकि नवदुर्गा महोत्सव और दशहरा का पर्व पूर्ण रूप से शांति और सुरक्षा के वातावरण में संपन्न हो सके।