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Sat, Oct 10, 2026Updated 11:31 AM IST
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देवा पारदी हिरासत में मौत मामला: एक साल बाद TI संजीत मावई को मिली जमानत, इंदौर जेल से होगी रिहाई

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वंदे भारत न्यूज़ डेस्क। मध्य प्रदेश के गुना जिले में पुलिस हिरासत में हुई देवा पारदी की मौत के बहुचर्चित मामले में आरोपी थाना प्रभारी (TI) संजीत मावई को शुक्रवार को जमानत मिल गई है। लगभग एक साल तक जेल में बंद रहने के बाद अदालत ने उनकी जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। इस फैसले के बाद अब वे शनिवार यानी आज इंदौर जेल से रिहा होंगे। यह मामला राज्य में पुलिस हिरासत में होने वाली मौतों और मानवाधिकारों को लेकर लगातार सुर्खियों में रहा है।

गुना जिले में देवा पारदी नामक व्यक्ति की पुलिस कस्टडी में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। मृतक देवा पारदी उस समय चर्चा में आया था जब उसकी शादी तय हो चुकी थी और वह दूल्हा बनने वाला था। बताया जाता है कि शादी की तैयारियों के बीच ही पुलिस ने उसे किसी मामले में हिरासत में लिया था। पुलिस कस्टडी के दौरान ही उसकी तबीयत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। एक युवक की शादी से ठीक पहले पुलिस हिरासत में मौत की खबर सामने आते ही पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई थी। स्थानीय लोगों और परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए हिरासत में मारपीट का संदेह जताया था।

इस घटना के बाद मृतक के परिजनों और सामाजिक संगठनों ने तीव्र विरोध प्रदर्शन किया था। पुलिस हिरासत में मौत के मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर कई दिनों तक धरना-प्रदर्शन चला। जनभावनाओं को देखते हुए और मामले की गंभीरता को समझते हुए प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए तत्कालीन थाना प्रभारी संजीत मावई को निलंबित कर दिया था। इसके बाद उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद संजीत मावई को इंदौर की जेल में भेजा गया, जहां वे पिछले एक साल से बंद थे।

शुक्रवार को अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद TI संजीत मावई को जमानत देने का आदेश पारित किया। एक साल से अधिक समय तक जेल में रहने के बाद उन्हें यह राहत मिली है। जमानत आदेश मिलने के बाद अब सभी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं और शनिवार को इंदौर जेल से उनकी रिहाई होना तय है। हालांकि, जमानत मिलने का अर्थ यह नहीं है कि उन पर लगे आरोप समाप्त हो गए हैं। अदालती प्रक्रिया अभी भी जारी रहेगी और मामले की सुनवाई निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ेगी।

मध्य प्रदेश में पुलिस हिरासत में मौत का मुद्दा हमेशा से संवेदनशील रहा है। देवा पारदी के मामले ने पुलिस की कार्यप्रणाली और हिरासत में लिए गए व्यक्तियों के अधिकारों पर कई सवाल खड़े किए थे। जब एक दूल्हे की शादी से ठीक पहले हिरासत में मौत हो जाती है, तो यह केवल एक कानूनी मामला नहीं रहता, बल्कि यह मानवीय संवेदनाओं और न्याय व्यवस्था पर विश्वास का विषय बन जाता है। इस घटना के बाद राज्य में पुलिस सुधारों और हिरासत में रखे गए लोगों की सुरक्षा को लेकर भी बहस छिड़ी थी।

बता दें कि पुलिस हिरासत में मौत के मामलों में उच्चतम न्यायालय और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के सख्त दिशा-निर्देश मौजूद हैं। इन दिशा-निर्देशों के अनुसार, हिरासत में लिए गए व्यक्ति के साथ किसी भी प्रकार की बर्बरता नहीं की जा सकती और उसकी स्वास्थ्य स्थिति की नियमित जांच अनिवार्य है। यदि हिरासत में किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है, तो उसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है। देवा पारदी मामले में भी इन्हीं मानकों के आधार पर जांच और कार्रवाई की गई थी।

TI संजीत मावई को जमानत मिलने के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस मामले का अंतिम निष्कर्ष क्या निकलता है। मृतक देवा पारदी के परिजन अभी भी न्याय की आस में हैं और उनका कहना है कि दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। वहीं, आरोपी पक्ष का अपना कानूनी बचाव है। अदालत में आगे चलने वाली सुनवाई में गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और पुलिस रिकॉर्ड जैसे तमाम साक्ष्यों की बारीकी से जांच की जाएगी।

इंदौर जेल प्रशासन द्वारा जमानत संबंधी कागजातों की पुष्टि के बाद शनिवार को संजीत मावई की रिहाई की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। वंदे भारत न्यूज़ इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और अदालती कार्यवाही की हर अपडेट पाठकों तक पहुंचाता रहेगा। पुलिस हिरासत में मौत जैसे गंभीर मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए अत्यंत आवश्यक है।