कंगना रनोट ने इलॉन मस्क और स्टारलिंक विवाद पर दिया बड़ा बयान, कमल हासन का किया समर्थन; बोलीं- कोई भी अरबपति किसी देश की नीतियां तय नहीं कर सकता

वंदे भारत न्यूज़ डेस्क। बॉलीवुड की प्रमुख अभिनेत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से राज्यसभा सांसद कंगना रनोट ने एक बार फिर राष्ट्रीय नीतियों और वैश्विक अरबपतियों के प्रभाव को लेकर अपनी स्पष्ट राय रखी है। कंगना रनोट ने टेस्ला और स्पेसएक्स के संस्थापक इलॉन मस्क तथा भारत में उनकी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा ‘स्टारलिंक’ को लाइसेंस मिलने में हो रही देरी को लेकर चल रही ताजा बहस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। इस दौरान उन्होंने दक्षिण भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और राज्यसभा सांसद कमल हासन द्वारा दिए गए हालिया बयान का खुलकर समर्थन किया है। कंगना ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी अरबपति को किसी भी देश की नीतियां तय करने का अधिकार नहीं होना चाहिए। यह मामला अब राजनीतिक और तकनीकी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
दरअसल, पिछले कुछ समय से भारत में इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवा ‘स्टारलिंक’ को परिचालन के लिए आवश्यक लाइसेंस और स्पेक्ट्रम आवंटन को लेकर लगातार बहस छिड़ी हुई है। भारतीय दूरसंचार नियामक और सरकार की ओर से स्टारलिंक को लाइसेंस देने की प्रक्रिया में देरी हो रही है, जिसको लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चाएं हो रही हैं। इसी संदर्भ में जब यह मुद्दा संसदीय और सार्वजनिक पटल पर आया, तो अभिनेता और राज्यसभा सांसद कमल हासन ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा था कि किसी भी निजी अरबपति या कॉर्पोरेट घराने को किसी संप्रभु राष्ट्र की नीतियों को निर्धारित करने या उन पर दबाव बनाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। कमल हासन के इस बयान ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं और अब कंगना रनोट ने उनके इसी रुख का समर्थन किया है।
भाजपा सांसद कंगना रनोट ने कमल हासन के बयान से सहमति जताते हुए कहा कि एक लोकतांत्रिक देश होने के नाते भारत की नीतियां यहां की जनता और उसकी चुनी हुई सरकार द्वारा तय की जाती हैं, न कि किसी विदेशी अरबपति द्वारा। कंगना ने जोर देकर कहा कि चाहे वह इलॉन मस्क हों या दुनिया का कोई भी अन्य धनकुबेर, किसी भी व्यक्ति को किसी देश की संप्रभुता और उसकी नीतिगत ढांचे में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि तकनीकी विकास और व्यापारिक हितों के नाम पर राष्ट्रीय सुरक्षा और नीतिगत स्वायत्तता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। कंगना का यह बयान ऐसे समय में आया है जब स्टारलिंक को भारत में स्पेक्ट्रम आवंटन के तरीके—नीलामी बनाम प्रशासनिक आवंटन—को लेकर दूरसंचार क्षेत्र में पहले से ही मतभेद चल रहे हैं।
गौरतलब है कि इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स लंबे समय से भारत में अपनी स्टारलिंक सेवा शुरू करने का प्रयास कर रही है। यह सेवा सैटेलाइट के माध्यम से दुनिया के सबसे दूरस्थ और ग्रामीण इलाकों में भी उच्च गति वाला इंटरनेट प्रदान करने का दावा करती है। हालांकि, भारत सरकार और संबंधित नियामक प्राधिकरणों ने अभी तक स्टारलिंक को वाणिज्यिक संचालन के लिए अंतिम लाइसेंस प्रदान नहीं किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस देरी के पीछे कई तकनीकी, नियामक और सुरक्षा संबंधी कारण बताए जा रहे हैं। भारत में दूरसंचार कंपनियों का एक वर्ग यह मांग करता रहा है कि सैटेलाइट स्पेक्ट्रम का आवंटन भी मौजूदा मोबाइल स्पेक्ट्रम की तरह नीलामी के माध्यम से होना चाहिए, जबकि इलॉन मस्क की कंपनी और वैश्विक सैटेलाइट ऑपरेटर्स इसे प्रशासनिक रूप से आवंटित करने की वकालत कर रहे हैं। यही कारण है कि लाइसेंसिंग की प्रक्रिया में अपेक्षित समय से अधिक देरी हो रही है।
इस पूरे विवाद में कंगना रनोट का कमल हासन के बयान का समर्थन करना इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि दोनों ही फिल्मी पृष्ठभूमि से आते हैं और वर्तमान में राज्यसभा सांसद के रूप में देश की संसदीय व्यवस्था का हिस्सा हैं। हालांकि दोनों की राजनीतिक विचारधाराएं और पार्टियां भिन्न हैं, लेकिन राष्ट्रीय नीतियों और देश की संप्रभुता के मुद्दे पर दोनों नेताओं का एक समान रुख सामने आया है। कमल हासन ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि वे किसी भी प्रकार के कॉर्पोरेट या अरबपति दबाव के खिलाफ हैं, और अब कंगना रनोट ने भी इसी बात को दोहराते हुए इलॉन मस्क और स्टारलिंक के संदर्भ में सीधी टिप्पणी की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे विशाल और तेजी से बढ़ते डिजिटल बाजार में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं का आना एक बड़ा बदलाव ला सकता है, लेकिन इसके लिए नियामक ढांचे का मजबूत होना और राष्ट्रीय हितों का संरक्षण सर्वोपरि है। कंगना रनोट की इस प्रतिक्रिया ने इस बात को और बल दिया है कि संसद सदस्यों के बीच इस बात को लेकर एक आम सहमति बन रही है कि विदेशी तकनीकी कंपनियों को भारत में कारोबार करने की पूरी स्वतंत्रता होनी चाहिए, लेकिन शर्तें और नीतियां भारत की सरकार ही तय करेगी। फिलहाल, इलॉन मस्क या स्पेसएक्स की ओर से कंगना रनोट और कमल हासन के इन बयानों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, भारत सरकार की ओर से भी स्टारलिंक को लाइसेंस दिए जाने की कोई निश्चित समयसीमा अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है। यह मामला आने वाले समय में संसद और सार्वजनिक बहसों में और अधिक गरमा सकता है।

