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Sat, Oct 10, 2026Updated 4:38 PM IST
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ग्वालियर में 19 पटवारियों के निलंबन के विरोध में आंदोलन तेज, दूसरे दिन भी कलेक्ट्रेट परिसर में धरना जारी; कलेक्टर ने कहा- नोटिस के बाद हुई कार्रवाई

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वन्दे भारत न्यूज़, ग्वालियर। मध्य प्रदेश में राजस्व विभाग के पटवारियों और जिला प्रशासन के बीच चल रहा टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्वालियर जिले में 19 पटवारियों के निलंबन के खिलाफ पटवारियों का आक्रोश सड़कों पर उतर आया है। निलंबन की कार्रवाई के विरोध में जिले के करीब 300 पटवारी आंदोलन पर उतर आए हैं और उन्होंने कलेक्ट्रेट परिसर में धरना शुरू कर दिया है। यह धरना प्रदर्शन लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा। इस दौरान पटवारियों ने राजस्व संबंधी सभी कार्यों का बहिष्कार करने की घोषणा कर दी है, जिससे जिले में आम जनता के भू-राजस्व से जुड़े कामकाज प्रभावित होने की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

दरअसल, ग्वालियर जिला प्रशासन ने हाल ही में 19 पटवारियों को उनके कार्यक्षेत्र में लापरवाही बरतने के आरोपों में निलंबित कर दिया था। प्रशासन की इस एक साथ की गई बड़ी कार्रवाई के बाद पूरे जिले के पटवारी वर्ग में भारी रोष व्याप्त हो गया। पटवारियों का कहना है कि बिना उनकी बात सुने और बिना किसी ठोस आधार के उन्हें निलंबित किया गया है। इसी निलंबन के विरोध में पटवारियों ने संगठित होकर कलेक्ट्रेट परिसर में धरना देने का निर्णय लिया। पहले दिन से ही शुरू हुए इस आंदोलन ने दूसरे दिन और अधिक तेवर अख्तियार कर लिए, जब बड़ी संख्या में पटवारी कलेक्ट्रेट पहुंचे और उन्होंने नारेबाजी करते हुए प्रशासन के खिलाफ अपना गुस्सा व्यक्त किया।

आंदोलनकारी पटवारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक 19 पटवारियों का निलंबन वापस नहीं लिया जाता, तब तक उनका यह आंदोलन और राजस्व कार्यों का बहिष्कार जारी रहेगा। पटवारियों के हड़ताल पर चले जाने से जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में राजस्व विभाग का कामकाज पूरी तरह से ठप पड़ गया है। आम नागरिकों को खसरा, खातौनी, बी-1, नामांतरण, सीमांकन और अन्य राजस्व दस्तावेजों से जुड़े कामों के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पटवारी व्यवस्था का सबसे निचला और महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते हैं, जिनके बिना गांव और शहर स्तर पर भूमि संबंधी कोई भी सरकारी कार्य संपन्न नहीं हो पाता है। ऐसे में करीब 300 पटवारियों के एक साथ काम छोड़ देने से प्रशासन के सामने भी चुनौती खड़ी हो गई है।

इधर, इस पूरे मामले पर ग्वालियर की कलेक्टर ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया है कि पटवारियों के खिलाफ जो भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है, वह नियमों के तहत और पूर्ण रूप से उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए की गई है। कलेक्टर ने बताया कि निलंबित किए गए पटवारियों को पहले नोटिस दिए गए थे। इसके बावजूद जब उनके कार्यप्रदर्शन में अपेक्षित सुधार नहीं देखा गया और वे अपने दायित्वों के प्रति लापरवाही बरतते रहे, तब उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई। कलेक्टर ने यह भी रेखांकित किया कि प्रशासन की ओर से यह कदम मनमाने तरीके से नहीं, बल्कि पूर्व में जारी किए गए नोटिस और जांच के आधार पर उठाया गया है।

यह मामला केवल ग्वालियर जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि मध्य प्रदेश के अन्य जिलों में भी पटवारियों और प्रशासन के बीच तनाव की खबरें सामने आ रही हैं। राज्य के देवास जिले में भी पटवारियों की सेवा समाप्ति का मामला सामने आया है, जिसके कारण वहां के पटवारियों में भी असंतोष का माहौल बना हुआ है। देवास में हुई कार्रवाई की खबरें मिलने के बाद ग्वालियर के पटवारियों का आक्रोश और अधिक भड़क उठा है। पटवारियों को लगता है कि पूरे प्रदेश में उनके समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है और बिना उचित कारणों के उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा रही है।

ज्ञात हो कि पटवारी मध्य प्रदेश की राजस्व व्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। भूमि रिकॉर्ड का रखरखाव, फसल सर्वेक्षण, प्राकृतिक आपदाओं के दौरान नुकसान का आकलन और सरकार की कई कल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन पटवारियों के स्तर पर ही होता है। जब इतनी बड़ी संख्या में पटवारी एक साथ आंदोलन पर उतर आते हैं, तो इसका सीधा असर आम किसानों और ग्रामीण जनता पर पड़ता है। किसानों को समय पर अपने दस्तावेज नहीं मिल पाते, जिससे उन्हें बैंक ऋण, फसल बीमा और सरकारी लाभों से वंचित रहना पड़ सकता है।

वहीं, दूसरी ओर प्रशासन का तर्क है कि राजस्व कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करना अत्यंत आवश्यक है। यदि अधिकारी या कर्मचारी अपने कर्तव्यों का निर्वहन ठीक से नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर द्वारा नोटिस के बाद कार्रवाई किए जाने की दी गई सफाई से स्पष्ट है कि प्रशासन अभी अपने फैसले पर अडिग है।

फिलहाल, ग्वालियर कलेक्ट्रेट परिसर में पटवारियों का धरना दूसरे दिन भी पूरी ताकत के साथ जारी है। आंदोलनकारी पटवारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द नहीं मानी गईं, तो वे आंदोलन को और अधिक उग्र करेंगे। अब देखना यह होगा कि इस बढ़ते विवाद को सुलझाने के लिए जिला प्रशासन और पटवारी संघ के बीच क्या बातचीत होती है और क्या दोनों पक्ष कोई रास्ता निकाल पाते हैं, ताकि आम जनता के रुके हुए राजस्व कार्य फिर से सामान्य रूप से शुरू हो सकें। वन्दे भारत न्यूज़ इस पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और हर अपडेट को आप तक पहुंचाता रहेगा।