केनरा बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन ने बैंक हड़ताल के तरीकों पर जताया विरोध, कहा- ग्राहकों का विश्वास बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता; नवंबर में होगा राज्यस्तरीय सम्मेलन

पटना। वंदे भारत न्यूज़। बिहार की राजधानी पटना में केनरा बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (सीबीओओ) की ओर से एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में बैंकों में होने वाली हड़तालों और यूनियनों की नीतियों को लेकर संगठन का स्पष्ट रुख सामने आया। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) द्वारा बार-बार हड़ताल बुलाए जाने के तरीकों पर असहमति जताते हुए कहा कि इससे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में ग्राहकों का विश्वास कमजोर हो रहा है। इसके साथ ही यह भी घोषणा की गई कि आगामी नवंबर महीने में संगठन का राज्यस्तरीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें संगठन की भविष्य की रणनीतियों और बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए केनरा बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (सीबीओओ) के महामंत्री नवीन सिंह ने विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि यूएफबीयू की ओर से 11वें वेतन संशोधन और अन्य मांगों को लेकर जो हड़ताल बुलाई गई है, उसकी मांगों को लेकर उनकी चिंताएं हैं, लेकिन हड़ताल के तरीकों से वे पूरी तरह सहमत नहीं हैं। नवीन सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनका मानना है कि बार-बार हड़ताल करने से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में ग्राहकों का विश्वास बुरी तरह प्रभावित होता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बैंकिंग सेवाएं जनता से सीधे जुड़ी हुई हैं और ग्राहकों का विश्वास बनाए रखना किसी भी हाल में जरूरी है। जब बार-बार कामकाज ठप होता है, तो आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है, जिसका सीधा असर बैंकों की छवि पर पड़ता है।
बैंकिंग क्षेत्र में 11वें वेतन संशोधन का मुद्दा पिछले काफी समय से चर्चा में रहा है। बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों की विभिन्न यूनियनें वेतनमान में बढ़ोतरी और अन्य सेवा शर्तों में सुधार की मांग करती रही हैं। इन मांगों को पूरा कराने के लिए यूएफबीयू जैसे मंच समय-समय पर हड़ताल का रास्ता अपनाते रहे हैं। हालांकि, केनरा बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के महामंत्री नवीन सिंह ने यह रेखांकित किया कि मांगों को उठाना जायज है, लेकिन उसके लिए अपनाए जाने वाले तरीकों पर पुनर्विचार की आवश्यकता है। उनका कहना था कि हड़ताल के अलावा भी बातचीत और अन्य लोकतांत्रिक तरीकों से मांगों को सरकार और प्रबंधन के समक्ष प्रभावी ढंग से रखा जा सकता है। बार-बार की हड़ताल से न केवल बैंकों के दैनिक कार्यों में बाधा आती है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक लेनदेन की प्रक्रिया भी प्रभावित होती है, जिसका खामियाजा अंततः आम उपभोक्ताओं और व्यापारियों को भुगतना पड़ता है।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में ग्राहकों के विश्वास को बनाए रखने की चुनौती पर प्रकाश डालते हुए एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि आज के समय में निजी क्षेत्र के बैंक तेजी से अपने पैर पसार रहे हैं। ऐसे परिदृश्य में यदि सरकारी बैंक अपनी सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित नहीं कर पाते हैं, तो ग्राहक स्वाभाविक रूप से वैकल्पिक विकल्पों की ओर रुख करने लगते हैं। नवीन सिंह ने कहा कि केनरा बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन हमेशा से इस बात का पक्षधर रहा है कि कर्मचारियों और अधिकारियों के हितों की रक्षा होनी चाहिए, लेकिन इसकी कीमत पर ग्राहक सेवा से कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए। बैंकों का मुख्य उद्देश्य जनता को निर्बाध और बेहतर वित्तीय सेवाएं प्रदान करना है, और हर उस कदम का विरोध किया जाएगा जो इस मूल उद्देश्य में बाधक बनता हो।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह भी जानकारी दी गई कि संगठन की ओर से आगामी नवंबर महीने में एक बड़े राज्यस्तरीय सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। इस सम्मेलन में बिहार भर से केनरा बैंक के अधिकारी शामिल होंगे। यह सम्मेलन इसलिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें वर्तमान बैंकिंग परिस्थितियों, यूनियन की नीतियों, 11वें वेतन संशोधन की प्रगति और अधिकारियों के सामने आ रही व्यावहारिक समस्याओं पर खुलकर चर्चा की जाएगी। एसोसिएशन के अनुसार, इस राज्यस्तरीय सम्मेलन के माध्यम से अधिकारियों की एकजुटता को और मजबूत किया जाएगा तथा भविष्य की कार्ययोजना तैयार की जाएगी, ताकि संगठन अपने सदस्यों के हितों की बेहतर तरीके से रक्षा कर सके और साथ ही बैंकिंग व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में भी अपना योगदान दे सके।
पटना में आयोजित इस प्रेस कॉन्फ्रेंस ने बैंकिंग जगत में हड़ताल की संस्कृति और ग्राहक सेवा के बीच के संतुलन पर एक नई बहस को जन्म दिया है। केनरा बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन का यह रुख दर्शाता है कि बैंक अधिकारियों का एक वर्ग अब बार-बार की हड़तालों से इतर, अधिक रचनात्मक और ग्राहक-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने की वकालत कर रहा है। महामंत्री नवीन सिंह ने अंत में दोहराया कि एसोसिएशन हमेशा अधिकारियों के कल्याण और बैंकिंग प्रणाली की मजबूती के लिए प्रतिबद्ध रहेगा। नवंबर में होने वाला राज्यस्तरीय सम्मेलन इस दिशा में एक अहम कदम साबित होगा, जिसमें बिहार के सभी जिलों से आए अधिकारी मिलकर एक ठोस और व्यावहारिक राय तैयार करेंगे।

