Sat, 10 Oct 20265:24 PM
Sat, Oct 10, 2026Updated 5:24 PM IST
होम › छत्तीसगढ़

दुर्ग में फर्जी चुनाव अधिकारी बनकर साइबर ठगी: मतदाता सूची में नाम सुधारने का भेजा लिंक, DGM के खाते से 6.25 लाख रुपये उड़ाए

WhatsAppFacebookX

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में साइबर अपराधियों ने एक नई और बेहद शातिर वारदात को अंजाम दिया है। मतदाता सूची में नाम सुधारने की प्रक्रिया के नाम पर एक फर्जी चुनाव अधिकारी ने जिले के एक डीजीएम (डिप्टी जनरल मैनेजर) को अपना शिकार बना लिया है। आरोपित ने पीड़ित को पिता का नाम सुधारने के लिए एक लिंक भेजा था। जैसे ही पीड़ित ने उस लिंक पर क्लिक करके फॉर्म भरना शुरू किया, उनके बैंक खाते से 6.25 लाख रुपये गायब हो गए। इस पूरे मामले में पीड़ित की शिकायत पर भिलाई-3 थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत अपराध दर्ज कर लिया है और मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।

वन्दे भारत न्यूज़ को प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना दुर्ग जिले के भिलाई क्षेत्र की है। पीड़ित व्यक्ति पेशे से किसी संस्थान या कंपनी में डीजीएम के पद पर कार्यरत हैं। उनके पास कुछ समय पहले एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को चुनाव आयोग का अधिकारी बताकर अपनी पहचान स्थापित की। बातचीत के दौरान उस फर्जी अधिकारी ने पीड़ित को बताया कि मतदाता सूची में उनके पिता के नाम में कोई त्रुटि या गलती दर्ज है, जिसे सुधारने की आवश्यकता है। चुनाव संबंधी मामलों की गंभीरता और एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते पीड़ित ने उस व्यक्ति की बातों पर विश्वास कर लिया।

आरोपित ने पीड़ित को भरोसे में लेने के बाद कहा कि इस सुधार प्रक्रिया के लिए उन्हें एक विशेष आवेदन पत्र या फॉर्म भरना होगा। इसके लिए उसने पीड़ित के मोबाइल फोन पर एक लिंक भेजा। पीड़ित को यह बताया गया कि यह लिंक चुनाव आयोग की आधिकारिक प्रक्रिया का हिस्सा है और इसे खोलकर मांगी गई जानकारी दर्ज करनी होगी। जब पीड़ित ने उस लिंक पर क्लिक किया, तो उनके सामने एक फॉर्म खुला जो दिखने में बिल्कुल वैध और सरकारी प्रक्रिया जैसा लग रहा था। पीड़ित ने बिना किसी संदेह के उस फॉर्म में अपनी जानकारी भरनी शुरू कर दी।

हालांकि, वह लिंक वास्तव में चुनाव आयोग का नहीं, बल्कि साइबर अपराधियों द्वारा तैयार किया गया एक फिशिंग लिंक था। जैसे ही पीड़ित ने फॉर्म में अपनी जानकारी दर्ज करना शुरू किया, उनकी बैंकिंग जानकारी या ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) संबंधित डेटा सीधे ठगों के सर्वर तक पहुंच गया। कुछ ही क्षणों के भीतर पीड़ित के बैंक खाते से 6.25 लाख रुपये निकाल लिए गए। जब पीड़ित के मोबाइल पर बैंक से रुपये कटने का मैसेज आया, तब उन्हें इस पूरी ठगी का एहसास हुआ। उन्होंने तुरंत अपने बैंक से संपर्क किया और इसके बाद स्थानीय पुलिस थाने में इसकी शिकायत दर्ज कराई।

भिलाई-3 थाना पुलिस ने पीड़ित डीजीएम की शिकायत के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने इस साइबर ठगी के मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318 उपधारा (4) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है। यह धारा मुख्य रूप से धोखाधड़ी और साइबर अपराध से जुड़े मामलों में लगाई जाती है। थाना प्रभारी और जांच टीम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत साइबर सेल को भी इसकी जानकारी दी है ताकि रुपये के लेनदेन के रास्ते का पता लगाया जा सके और ठगों तक जल्द से जल्द पहुंचा जा सके।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान सबसे पहले उस फोन नंबर और लिंक की जांच की जा रही है जिसका इस्तेमाल ठगों ने पीड़ित को फंसाने के लिए किया था। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि क्या यह लिंक किसी अन्य व्यक्ति को भी भेजा गया है या यह केवल एक टारगेटेड हमला था। चूंकि पीड़ित एक उच्च पद पर कार्यरत अधिकारी हैं, इसलिए यह माना जा रहा है कि ठगों ने सोशल इंजीनियरिंग के जरिए पहले उनकी जानकारी जुटाई होगी और फिर चुनाव आयोग जैसे संवेदनशील विषय का उपयोग करके उन्हें निशाना बनाया।

यह घटना छत्तीसगढ़ और विशेषकर दुर्ग-भिलाई क्षेत्र में बढ़ते साइबर अपराधों की एक और चेतावनी है। हाल के वर्षों में ठगों ने अपने तरीकों में काफी बदलाव किया है। पहले जहां लॉटरी या बैंक खाता अपडेट करने के नाम पर ठगी होती थी, वहीं अब ठग सरकारी योजनाओं, चुनाव प्रक्रियाओं, मतदाता सूची सुधार और आधार कार्ड अपडेट जैसे बेहद संवेदनशील और विश्वसनीय विषयों का सहारा ले रहे हैं। चुनाव आयोग का नाम लेकर ठगी का यह तरीका लोगों में दहशत पैदा करने वाला है, क्योंकि मतदाता सूची से जुड़े मामलों में लोग बिना सोचे-समझे जल्दबाजी में कदम उठा लेते हैं।

पुलिस और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अज्ञात व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक पर क्लिक करने से बचें। चाहे कॉल करने वाला खुद को किसी भी सरकारी विभाग, चुनाव आयोग, बैंक या पुलिस का अधिकारी क्यों न बताए, किसी भी संदिग्ध लिंक पर अपनी व्यक्तिगत या वित्तीय जानकारी कभी साझा नहीं करनी चाहिए। यदि कोई व्यक्ति मतदाता सूची या किसी अन्य सरकारी दस्तावेज में सुधार के लिए फोन करता है, तो उसकी जानकारी को आधिकारिक वेबसाइट या संबंधित सरकारी कार्यालय में जाकर ही सत्यापित करना चाहिए।

फिलहाल, भिलाई-3 थाना पुलिस इस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि 6.25 लाख रुपये किस खाते में ट्रांसफर हुए हैं और उस खाते को किसने खोला है। साइबर ठगी के ऐसे मामलों में समय रहते शिकायत दर्ज कराना बहुत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इससे बैंक खातों को फ्रीज करवाकर रकम वापस मिलने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। पीड़ित डीजीएम ने समय रहते पुलिस को सूचना दी है, जिससे जांच एजेंसियों को ठगों का सुराग लगाने में मदद मिल सकती है। वन्दे भारत न्यूज़ इस मामले की आगे की जांच और पुलिस कार्रवाई पर नजर बनाए हुए है।