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Sun, Oct 11, 2026Updated 11:09 AM IST
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खनियांधाना में राशन घोटाले का आरोप: तीन बार अंगूठा लगवाने के बाद भी आदिवासी परिवारों को नहीं मिला राशन, ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी

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मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले की खनियांधाना तहसील में शासकीय उचित मूल्य की दुकान से राशन वितरण में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के गंभीर आरोप सामने आए हैं। तहसील के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत गताझलकई के आदिवासी परिवारों और ग्रामीणों ने दुकान के सेल्समैन पर मनमानी और धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए तीखा विरोध जताया है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें पिछले तीन महीनों से लगातार राशन वितरण के नाम पर बुलाकर उनके अंगूठे के निशान लिए जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें उनका हक का राशन नहीं दिया जा रहा है। इस मामले को लेकर गांव में भारी रोष व्याप्त है और ग्रामीणों ने प्रशासन द्वारा समय रहते कार्रवाई नहीं किए जाने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।

गताझलकई गांव के ग्रामीणों ने बताया कि शासकीय उचित मूल्य की दुकान पर सेल्समैन द्वारा पिछले तीन महीनों से एक ही तरीके से धोखाधड़ी की जा रही है। हर महीने राशन वितरण के दौरान लाभार्थियों को दुकान पर बुलाया जाता है और उन्हें यह कहकर अंगूठा लगवाया जाता है कि उनका राशन का वितरण हो गया है। हालांकि, अंगूठा लगवाने के बाद ग्रामीणों को न तो पूरा राशन दिया जाता है और न ही उन्हें इस बात की कोई जानकारी दी जाती है कि उनके खाते में कितना राशन दर्ज किया गया है। ग्रामीणों के अनुसार, कई परिवार ऐसे हैं जिन्हें पिछले तीन महीनों से एक दाना अनाज तक नहीं मिला है, जबकि सिस्टम में उनके नाम पर राशन उठाने की एंट्री दर्ज कर दी गई है।

इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में आदिवासी परिवार निवास करते हैं, जो अपनी आजीविका और भरण-पोषण के लिए मुख्य रूप से सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत मिलने वाले राशन पर निर्भर हैं। ऐसे में जब उन्हें उनका वैधानिक अधिकार का राशन ही नहीं मिल पा रहा है, तो इन गरीब और आदिवासी परिवारों के समक्ष भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि सेल्समैन उनकी अनपढ़ता और गरीबी का फायदा उठाकर सरकारी अनाज का गबन कर रहा है। जो अनाज गरीबों के पेट भरने के लिए सरकार द्वारा भेजा जाता है, वह बिचौलियों और भ्रष्ट कर्मचारियों की मिलीभगत से खुले बाजार में बेचा जा रहा है या अन्यत्र भेजा जा रहा है।

ग्राम पंचायत गताझलकई के निवासियों ने इस पूरे मामले को एक सुनियोजित राशन घोटाला करार दिया है। उनका कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब सेल्समैन पर इस तरह के आरोप लगे हैं। पहले भी कई मौकों पर ग्रामीणों ने इस संबंध में शिकायत करने का प्रयास किया था, लेकिन उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया। सेल्समैन पर आरोप है कि वह लाभार्थियों के साथ अभद्र व्यवहार करता है और यदि कोई व्यक्ति राशन की मांग करता है या सवाल पूछता है, तो उसे धमकाकर वापस भेज दिया जाता है। इस डर के कारण कई गरीब परिवार पिछले कुछ समय से चुपचाप अन्याय सह रहे थे, लेकिन अब जब मामला हद से गुजर गया है, तो पूरा गांव एकजुट होकर सड़क पर उतरने को तैयार है।

ग्रामीणों ने खनियांधाना तहसील प्रशासन, जिला आपूर्ति अधिकारी और शिवपुरी जिला कलेक्टर से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि सबसे पहले पिछले तीन महीनों का पूरा राशन सभी पात्र आदिवासी और गरीब परिवारों को बिना किसी कटौती के उपलब्ध कराया जाए। इसके अलावा, जिस सेल्समैन ने तीन बार अंगूठा लगवाकर सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी की है, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। ग्रामीणों की मांग है कि इस घोटाले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए ताकि यह पता चल सके कि पिछले तीन महीनों में कितना अनाज गायब हुआ है और इसमें किन-किन लोगों की मिलीभगत शामिल है।

आदिवासी परिवारों ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया और दोषी सेल्समैन के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। ग्रामीणों ने ऐलान किया है कि वे उचित मूल्य की दुकान का घेराव करेंगे और तहसील कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि गरीबों का हक मारने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। वंदे भारत न्यूज़ के संवाददाता के अनुसार, ग्रामीणों का यह गुस्सा सातवें आसमान पर है और वे किसी भी कीमत पर न्याय पाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत गरीबों को सस्ता राशन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है, लेकिन गताझलकई जैसे गांवों में सामने आ रही ऐसी घटनाएं प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोलती हैं। जब तक जमीनी स्तर पर निगरानी कड़ी नहीं होगी, ऐसे घोटाले रुकना मुश्किल है। फिलहाल, खनियांधाना तहसील प्रशासन और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। यह देखना होगा कि ग्रामीणों की इस शिकायत और आंदोलन की चेतावनी के बाद प्रशासन कब और क्या कार्रवाई करता है।