लुधियाना नगर निगम हाउस की बैठक में हाई वोल्टेज ड्रामा: FCC सदस्य दो बोरियों में 82 करोड़ रुपये के नकली नोट लेकर पहुंचे, पार्षद के निधन पर बैठक स्थगित

पंजाब के लुधियाना शहर में आज नगर निगम हाउस की बैठक के दौरान एक अत्यंत नाटकीय और चर्चित घटनाक्रम देखने को मिला। गुरु नानक देव भवन में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में वित्त एवं अनुबंध समिति (F&CC) के सदस्यों ने एक अनोखे तरीके से विरोध प्रदर्शन किया, जिसने पूरे सदन का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। जानकारी के अनुसार, बैठक शुरू होने से पहले ही जब सदस्यों की एंट्री हो रही थी, उसी दौरान F&CC के सदस्य दो बड़ी बोरियों में भरकर करीब 82 करोड़ रुपये के नकली नोट सदन के अंदर ले आए। यह दृश्य देखकर सदन में मौजूद अन्य पार्षदों और अधिकारियों के बीच हड़कंप मच गया। यह विरोध प्रदर्शन नगर निगम की वित्तीय स्थिति और कार्यप्रणाली को लेकर असंतोष जताने के उद्देश्य से किया गया था।
लुधियाना नगर निगम की नियमित बैठक आज गुरु नानक देव भवन में निर्धारित समय पर बुलाई गई थी। यह भवन शहर की प्रमुख सार्वजनिक इमारतों में से एक है, जहां अक्सर निगम की महत्वपूर्ण बैठकें और सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। आज की बैठक में शहर के विकास कार्यों, बजट आवंटन और अन्य प्रशासनिक मुद्दों पर चर्चा होनी थी। हालांकि, बैठक का एजेंडा शुरू होने से पहले ही जो दृश्य सामने आया, उसने पूरी कार्यवाही की दिशा ही बदल दी। वित्त एवं अनुबंध समिति, जिसे संक्षेप में F&CC कहा जाता है, नगर निगम की सबसे महत्वपूर्ण समितियों में से एक है। इस समिति का मुख्य कार्य निगम के वित्तीय लेनदेन, ठेकों और बजट से जुड़े मामलों की जांच और सिफारिश करना होता है। ऐसे में इस समिति के सदस्यों द्वारा ही इस तरह का विरोध प्रदर्शन करना निगम के भीतर चल रहे आंतरिक मतभेदों और वित्तीय प्रबंधन को लेकर गहरी चिंताओं की ओर इशारा करता है।
सूत्रों के मुताबिक, जैसे ही सदन के दरवाजे खुले और सदस्यों का प्रवेश शुरू हुआ, F&CC के कुछ सदस्य अपने साथ दो भारी बोरियां लेकर अंदर आए। जब इन बोरियों को खोला गया, तो उनमें नोटों की गड्डियां दिखाई दीं। बाद में स्पष्ट हुआ कि ये नोट असली नहीं, बल्कि नकली थे, लेकिन इनका कुल मूल्य 82 करोड़ रुपये बताया गया। सदस्यों ने इन नकली नोटों को सदन के बीच में रखकर अपना विरोध दर्ज कराया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं है कि 82 करोड़ रुपये का यह आंकड़ा किस आधार पर तय किया गया या यह राशि किसी विशेष परियोजना, बजट घाटे या कथित वित्तीय अनियमितता से सीधे तौर पर जुड़ी है या नहीं। सदस्यों ने इस प्रतीकात्मक विरोध के माध्यम से क्या विशिष्ट मांगें रखीं, इसका पूरा ब्योरा अभी तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।
इस हाई वोल्टेज ड्रामे के कारण सदन का माहौल पूरी तरह से बदल गया। बैठक में शामिल होने आए अन्य पार्षदों, नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध दर्ज कराने का एक अनोखा तरीका माना, जबकि कई अन्य ने सदन की गरिमा को बनाए रखने की अपील करते हुए इस तरह के प्रदर्शन पर सवाल उठाए। यह घटना इस बात का भी संकेत देती है कि लुधियाना नगर निगम के भीतर पार्षदों और विभिन्न समितियों के बीच वित्तीय नीतियों और खर्चों को लेकर गंभीर मतभेद चल रहे हैं, जो अब खुले सदन में इस तरह के नाटकीय रूप में सामने आ रहे हैं।
हालांकि, इस विरोध प्रदर्शन और सदन में हुए हंगामे के बीच बैठक को आगे बढ़ाने की संभावनाएं तब समाप्त हो गईं, जब एक दुखद खबर सदन तक पहुंची। बैठक के दौरान ही सूचना मिली कि नगर निगम के एक पार्षद का निधन हो गया है। पार्षद के निधन की खबर मिलते ही सदन में शोक की लहर दौड़ गई। इस दुखद घटना के मद्देनजर नगर निगम की आज की बैठक को तत्काल प्रभाव से स्थगित करने का निर्णय लिया गया। दिवंगत पार्षद के नाम और उनके निधन के कारणों के बारे में उपलब्ध स्रोत में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन उनके निधन के कारण सदन की पूरी कार्यवाही रोक दी गई और शोक व्यक्त किया गया।
लुधियाना नगर निगम पंजाब के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण नगर निगमों में से एक है। शहर की जनसंख्या और औद्योगिक महत्व को देखते हुए यहां के नगर निगम का बजट और कार्यप्रणाली हमेशा से चर्चा का विषय रही है। F&CC के सदस्यों द्वारा 82 करोड़ रुपये के नकली नोटों के साथ किया गया यह विरोध प्रदर्शन न केवल स्थानीय राजनीति में, बल्कि पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गया है। यह घटना नगर निगम की वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े करने वाले विरोध के रूप में देखी जा रही है। फिलहाल, बैठक स्थगित होने के कारण इस विरोध प्रदर्शन पर कोई औपचारिक चर्चा या प्रस्ताव पारित नहीं हो सका है। यह देखना होगा कि अगली बैठक में इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाया जाता है और नगर निगम का प्रशासन इस विरोध का कैसे जवाब देता है।

