इंग्लैंड में तरनतारन के युवक की मौत: 17 दिन बाद गांव पहुंचा शव, 15 साल पहले गया था विदेश

तरनतारन। पंजाब के तरनतारन जिले के गांव नौशहरा ढाला में उस समय गहरा मातम पसर गया, जब रोजगार और बेहतर भविष्य की तलाश में करीब 15 साल पहले इंग्लैंड गए 38 वर्षीय युवक गुरबिंदर सिंह उर्फ गोल्डी का पार्थिव शरीर शुक्रवार को उनके पैतृक गांव पहुंचा। गुरबिंदर सिंह की मौत 22 सितंबर को इंग्लैंड में हो गई थी। उनकी मृत्यु के बाद शव को भारत लाने की प्रक्रिया में 17 दिनों का लंबा समय लगा। इस दौरान परिवार और गांव के लोग लगातार इंतजार करते रहे। अंततः शुक्रवार को शव गांव पहुंचने पर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरबिंदर सिंह गोल्डी मूल रूप से तरनतारन जिले के गांव नौशहरा ढाला के निवासी थे। वे करीब 15 साल पहले अपने सपनों को साकार करने, परिवार को आर्थिक रूप से मजबूती प्रदान करने और एक बेहतर भविष्य की आस में इंग्लैंड गए थे। विदेश जाकर उन्होंने वहां मेहनत की और अपना जीवन स्थापित किया। इंग्लैंड में रहते हुए वे अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह कर रहे थे। गुरबिंदर सिंह एक 10 साल की बेटी के पिता थे। उनकी अचानक हुई मौत ने न केवल उनके परिवार को बल्कि पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया है। उनकी 10 वर्षीय बेटी ने अभी तक अपने पिता के जाने के दुख को पूरी तरह समझना शुरू ही किया होगा, लेकिन पिता का साया हमेशा के लिए उसके सिर से उठ गया है।
गुरबिंदर सिंह की मौत 22 सितंबर को इंग्लैंड में हुई थी। हालांकि, स्रोत में उनकी मृत्यु के सटीक कारणों का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, इसलिए यह अनिश्चित बना हुआ है कि उनका निधन किस परिस्थिति या बीमारी के कारण हुआ। मौत की खबर मिलने के बाद परिजनों और गांव वालों को भारी सदमा लगा। इसके बाद शव को इंग्लैंड से भारत लाने की कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू की गई। विदेश से किसी व्यक्ति का शव उसके पैतृक देश लाने की प्रक्रिया अक्सर काफी जटिल और समय लेने वाली होती है। इसमें संबंधित देश के दूतावास, स्थानीय प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और एयरलाइंस की कई औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं। इन सभी प्रक्रियाओं को पूरा करने में 17 दिन का समय लग गया।
परिवार के लिए ये 17 दिन अत्यंत कष्टदायी और मानसिक पीड़ा से भरे रहे। एक तरफ अपने प्रियजन को खोने का गहरा दुख था, तो दूसरी तरफ उनके अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार के लिए शव के आने का लंबा इंतजार करना पड़ रहा था। आखिरकार, सभी कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद गुरबिंदर सिंह का शव शुक्रवार को उनके पैतृक गांव नौशहरा ढाला पहुंचा। जैसे ही शव गांव में लाया गया, वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। परिजनों का विलाप सुनकर हर किसी का दिल भर आया। गांव के लोगों ने भी इस दुख की घड़ी में परिवार का साथ दिया और शोक संवेदना व्यक्त की।
गुरबिंदर सिंह गोल्डी की कहानी पंजाब के उन हजारों युवाओं की कहानी से मिलती-जुलती है, जो एक बेहतर जीवन और आर्थिक अवसरों की तलाश में विदेशों का रुख करते हैं। पंजाब से बड़ी संख्या में युवा यूरोप, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों में जाते हैं। कई बार ये युवा विदेशों में सफलता प्राप्त करते हैं और अपने परिवारों को सहारा देते हैं, लेकिन कुछ मामलों में ऐसी दुखद घटनाएं सामने आती हैं जो परिवारों को तोड़कर रख देती हैं। गुरबिंदर सिंह भी ऐसे ही एक युवा थे, जिन्होंने 15 साल पहले अपने गांव और परिवार को छोड़कर इंग्लैंड का रास्ता चुना था। उनका उद्देश्य अपने परिवार का जीवन स्तर ऊंचा उठाना था।
गांव नौशहरा ढाला में गुरबिंदर सिंह की मौत की खबर फैलते ही मातमी सन्नाटा पसर गया था। वे गांव में गोल्डी के नाम से जाने जाते थे और उनकी पहचान एक मेहनती व्यक्ति के रूप में थी। 38 वर्ष की अपेक्षाकृत कम उम्र में उनका इस तरह चले जाना उनके परिचितों और रिश्तेदारों के लिए पचा पाना मुश्किल हो रहा है। विशेष रूप से उनकी 10 साल की बेटी के लिए यह बहुत बड़ी क्षति है, जिसके भविष्य से पिता का मार्गदर्शन और सहयोग हमेशा के लिए छिन गया है।
शव गांव पहुंचने के बाद अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कर दी गईं। गांव के लोग और रिश्तेदार उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए जुटे। 17 दिनों के लंबे और कष्टदायी इंतजार के बाद परिजनों को अंतिम दर्शन का अवसर मिला। यह घटना एक बार फिर इस कड़वी सच्चाई को सामने लाती है कि विदेशों में रहने वाले भारतीयों की मृत्यु होने पर उनके शवों को स्वदेश लाने की प्रक्रिया में आने वाली देरी परिवारों के लिए दोहरे दुख का कारण बनती है। तरनतारन जिले के नौशहरा ढाला गांव के लिए यह दिन अत्यंत दुखद रहा, जहां एक बेटा 15 साल बाद अपने घर तो लौटा, लेकिन जीवित नहीं, बल्कि एक पार्थिव शरीर के रूप में।

