गुरदासपुर: धान खरीद में कटौती और देरी के विरोध में किसानों ने NH-354 पर किया चक्का जाम, मरीज और स्कूली बसें फंसीं

वन्दे भारत न्यूज़, गुरदासपुर। पंजाब के गुरदासपुर जिले में धान की सरकारी खरीद प्रक्रिया में हो रही देरी और फसल की कीमतों में की जा रही कटौती के खिलाफ किसानों का गुस्सा सोमवार को सड़कों पर उतर आया। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के आह्वान पर किसानों ने कलानौर के पास राष्ट्रीय राजमार्ग 354 (NH-354) पर पूर्ण रूप से चक्का जाम कर दिया। इस दौरान किसानों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को लेकर भारी रोष व्यक्त किया। किसानों के इस प्रदर्शन के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात पूरी तरह से ठप हो गया, जिससे राहगीरों, मरीजों और स्कूली बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, किसानों का यह धरना-प्रदर्शन सुबह 11 बजे शुरू हुआ और शाम 5 बजे तक लगातार चला। संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा दिए गए आह्वान पर बड़ी संख्या में किसान अपने ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और अन्य वाहनों के साथ कलानौर क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग 354 पर एकत्रित हुए। किसानों ने सड़क पर बैठकर धान की खरीद और लिफ्टिंग प्रक्रिया को तेज करने की मांग को लेकर सरकार और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ तीखे नारे लगाए। किसानों का कहना था कि मंडियों में उनकी मेहनत की कमाई यानी धान की फसल को उचित दाम नहीं मिल रहा है और मनमाने ढंग से कटौती की जा रही है, जिसे वे किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं करेंगे।
इस चक्का जाम के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग 354 पर लगभग एक घंटे के लिए पूर्ण रूप से यातायात बाधित रहा। हालांकि धरने का समय सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक निर्धारित था, लेकिन इस बीच एक घंटे का पूर्ण चक्का जाम रखा गया ताकि सरकार और प्रशासन का ध्यान किसानों की समस्याओं की ओर आकर्षित किया जा सके। सड़क जाम होने के कारण दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। इस आंदोलन का सबसे ज्यादा असर आम राहगीरों और जरूरतमंद मरीजों पर पड़ा। एंबुलेंस और निजी वाहनों में सफर कर रहे मरीजों को अस्पताल पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, जिससे उनके परिजनों में काफी चिंता और परेशानी देखी गई।
इसके अलावा, स्कूल से घर लौट रहे बच्चों की बसें भी इस जाम में बुरी तरह फंस गईं। स्कूली बच्चों को वाहनों में घंटों बैठे रहना पड़ा, जिससे अभिभावकों में भी खासी चिंता व्याप्त हो गई। किसानों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य आम जनता, मरीजों या स्कूली बच्चों को परेशान करना नहीं है, बल्कि सरकार और प्रशासन की नीतियों के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराना है। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया जाएगा, तब तक उन्हें इस तरह के कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
किसानों की मुख्य मांगों में धान की खरीद प्रक्रिया को तत्काल तेज करना शामिल है। किसानों का आरोप है कि मंडियों में धान की लिफ्टिंग बहुत धीमी गति से हो रही है, जिसके कारण उन्हें अपनी फसल लेकर कई दिनों तक मंडियों में इंतजार करना पड़ रहा है। खुले आसमान के नीचे फसल रखने से बारिश या खराब मौसम की स्थिति में फसल खराब होने का खतरा बना रहता है। इसके साथ ही, किसानों ने धान की कीमतों में की जा रही कटौती का भी कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि लागत मूल्य बढ़ने के बावजूद उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं दिया जा रहा है, जो उनके लिए आर्थिक संकट का कारण बन रहा है।
संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के नेताओं ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि किसान पिछले लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से प्रशासन से गुहार लगा रहे थे, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। इसी के चलते आज राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम करने का फैसला लिया गया। मोर्चा ने चेतावनी दी है कि यदि धान की खरीद और लिफ्टिंग की प्रक्रिया में जल्द सुधार नहीं किया गया और कटौती का सिलसिला जारी रहा, तो किसानों को और बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने किसानों से बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास किया और यातायात को सुचारू बनाने की अपील की। हालांकि, किसानों ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक उन्हें उनकी मांगों को लेकर कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलता, वे अपना धरना जारी रखेंगे। शाम 5 बजे तक चले इस धरने के कारण पूरे दिन कलानौर और आसपास के क्षेत्रों में राष्ट्रीय राजमार्ग 354 पर यातायात व्यवस्था अस्त-व्यस्त रही।
गौरतलब है कि पंजाब में धान की खरीद का सीजन किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। राज्य की अर्थव्यवस्था और किसानों की आय का बड़ा हिस्सा इसी फसल पर निर्भर करता है। ऐसे में खरीद प्रक्रिया में देरी और कीमतों में कटौती जैसे मुद्दे हमेशा से किसान आंदोलनों का प्रमुख कारण रहे हैं। वन्दे भारत न्यूज़ की इस रिपोर्ट में दर्ज तथ्य उपलब्ध स्रोत सूचनाओं पर आधारित हैं। प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले में कोई औपचारिक लिखित बयान या भविष्य की कार्य योजना सार्वजनिक रूप से साझा नहीं की गई है। फिलहाल, किसानों का यह आंदोलन प्रशासन और सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

