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Sun, Oct 11, 2026Updated 9:20 AM IST
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समस्तीपुर: जिला परिषद के हेड क्लर्क गोपाल कृष्ण दास का बंद कमरे में मिला शव, फोन नहीं उठाने पर परिवार को हुआ था शक

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बिहार के समस्तीपुर जिले से एक सनसनीखेज खबर सामने आई है। शहर के काशीपुर मोहल्ले में शनिवार को जिला परिषद कार्यालय में पदस्थापित हेड क्लर्क गोपाल कृष्ण दास का शव उनके बंद कमरे से बरामद किया गया। इस घटना की जानकारी मिलते ही पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और लोगों की भीड़ मौके पर जुट गई। सरकारी कर्मचारी की इस तरह अचानक मौत होने से सहकर्मियों और स्थानीय लोगों में गहरा सदमा व्याप्त है।

मृतक गोपाल कृष्ण दास समस्तीपुर जिला परिषद कार्यालय में हेड क्लर्क के महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत थे। वे मूल रूप से बिहार के मधेपुरा जिले के निवासी थे। सरकारी सेवा में होने के कारण वे समस्तीपुर शहर के काशीपुर मोहल्ले में एक किराये के मकान में रहते थे। प्राप्त जानकारी के अनुसार, वे इस किराये के आवास में अकेले ही रहते थे। उनका परिवार मधेपुरा में ही था। अकेले रहने के कारण उनकी दिनचर्या और उनसे जुड़ी हर बात की जानकारी तुरंत परिवार तक नहीं पहुंच पाती थी, जो इस घटना में एक अहम पहलू साबित हुआ।

घटना की विस्तृत जानकारी देते हुए सूत्रों ने बताया कि शनिवार को जब गोपाल कृष्ण दास के परिजनों ने उनसे संपर्क करने का प्रयास किया, तो उन्होंने अपना फोन नहीं उठाया। परिजनों ने कई बार उन्हें फोन लगाया, लेकिन दूसरी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। फोन न उठाने और लगातार अनुत्तरित कॉल्स को देखते हुए परिवार के सदस्यों को कुछ अनहोनी होने का गहरा शक हो गया। चूंकि वे समस्तीपुर में अकेले रहते थे, इसलिए परिजनों की चिंता और बढ़ गई। इसके बाद परिवार वालों ने समस्तीपुर में उनके किराये के मकान पर पहुंचकर जांच करने का निर्णय लिया या वहां मौजूद लोगों से संपर्क साधा।

जब उनके किराये के मकान का दरवाजा खोला गया, तो अंदर का दृश्य बेहद चौंकाने वाला था। गोपाल कृष्ण दास अपने कमरे में मृत अवस्था में पड़े हुए मिले। कमरा अंदर से बंद था, जिसके चलते दरवाजा खोलने में भी समय लगा। बंद कमरे में हेड क्लर्क का शव मिलने की खबर जैसे ही काशीपुर मोहल्ले में फैली, आसपास के लोग तेजी से मौके पर पहुंचने लगे। किसी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी की इस प्रकार एकांत में मौत होने से इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं और पूरे मोहल्ले में सनसनी का माहौल बन गया।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन को भी मामले की जानकारी दी गई। पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और शव को कमरे से बाहर निकालकर उसे कब्जे में लिया। प्रथम दृष्टया मौत के स्पष्ट कारणों का तुरंत पता नहीं चल सका है। यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है कि उनकी मौत प्राकृतिक कारणों से हुई है, किसी स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति का परिणाम है, या फिर इसके पीछे कोई अन्य कारण है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही और पुख्ता कारणों का पता चल सकेगा।

गोपाल कृष्ण दास जिला परिषद कार्यालय में हेड क्लर्क के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे थे। एक हेड क्लर्क के रूप में उनकी भूमिका कार्यालय के दैनिक कामकाज, फाइलों के संधारण और प्रशासनिक कार्यों को सुचारू रूप से चलाने में अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। उनके अचानक निधन से जिला परिषद कार्यालय में भी शोक की लहर दौड़ गई है। उनके सहकर्मी और अन्य अधिकारी इस घटना से स्तब्ध हैं। मूल रूप से मधेपुरा के रहने वाले गोपाल कृष्ण दास अपने पीछे परिवार छोड़ गए हैं, जिन पर इस दुखद घटना से वज्रपात हुआ है।

अकेले रहने वाले सरकारी कर्मचारियों और बुजुर्गों की सुरक्षा और नियमित जांच का मुद्दा एक बार फिर इस घटना के बाद चर्चा में आ गया है। यदि वे अकेले नहीं रहते या उनके साथ कोई होता, तो शायद समय रहते मदद मिल सकती थी। फोन न उठाने पर परिवार को जो शक हुआ, उसी के आधार पर दरवाजा खोलने की प्रक्रिया शुरू हुई और घटना का पता चल सका।

समस्तीपुर पुलिस अब इस पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आखिरी बार गोपाल कृष्ण दास को किसने और कब जीवित देखा था। इसके अलावा, उनके कमरे से कोई संदिग्ध वस्तु या सुसाइड नोट तो नहीं मिला है, इसकी भी तलाशी ली जा रही है। हालांकि, अभी तक ऐसी कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है जो किसी संदेह को बल दे। फिलहाल, सभी निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं, जिसके आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि जिला परिषद के हेड क्लर्क गोपाल कृष्ण दास की मौत वास्तव में कैसे हुई। वंदे भारत न्यूज़ इस पूरे मामले पर पुलिस प्रशासन और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अपडेट पर नजर बनाए हुए है।