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Sun, Oct 11, 2026Updated 10:25 AM IST
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बालोद: पानी की मांग पर आंदोलन कर रहे ग्रामीणों को पुलिस ने लिया अभिरक्षा में, माता-पिता की रिहाई के लिए 40 बच्चे 10 किमी पैदल चलकर थाने पहुंचे

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बालोद। वंदे भारत न्यूज़। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में पानी की समस्या को लेकर चल रहा ग्रामीणों का आंदोलन शनिवार को उस समय एक भावुक और गंभीर मोड़ ले गया, जब उनके छोटे-छोटे बच्चों ने अपने माता-पिता की रिहाई की मांग को लेकर लगभग 10 किलोमीटर की पैदल यात्रा तय की। आड़ेझर गांव के करीब 40 बच्चे पैदल चलते हुए सीधे पुलिस थाने पहुंच गए और वहीं धरने पर बैठ गए। बच्चों की यह हिम्मत और उनकी मासूमियत देखकर प्रशासनिक अमला भी सकते में आ गया। यह पूरा मामला बालोद जिले के आड़ेझर गांव से जुड़ा है, जहां ग्रामीण पिछले तीन दिनों से पानी की मांग को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे थे।

जानकारी के अनुसार, आड़ेझर गांव में पेयजल की भारी किल्लत से ग्रामीण लंबे समय से परेशान हैं। पानी की इसी बुनियादी समस्या के समाधान की मांग को लेकर गांव के लोगों ने तीन दिन पहले शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू किया था। ग्रामीणों का कहना था कि उन्हें पीने और दैनिक उपयोग के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। इस समस्या को लेकर वे लगातार प्रशासन से गुहार लगा रहे थे और सड़क पर उतरकर अपनी बात रख रहे थे। हालांकि, शनिवार सुबह स्थिति तब बदल गई जब पुलिस प्रशासन ने आंदोलन कर रहे ग्रामीणों को अभिरक्षा में ले लिया। पुलिस ने आंदोलनकारियों को हिरासत में लेकर उन्हें समझाने-बुझाने का प्रयास शुरू किया, ताकि वे अपना आंदोलन वापस ले लें, लेकिन ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे।

जब ग्रामीणों को पुलिस अभिरक्षा में लिए जाने की खबर गांव तक पहुंची, तो वहां मौजूद उनके बच्चों में बेचैनी फैल गई। अपने माता-पिता को पुलिस द्वारा ले जाए जाने की सूचना मिलते ही आड़ेझर गांव के लगभग 40 बच्चों ने एक साथ फैसला किया कि वे अपने परिजनों को छुड़ाने के लिए खुद पुलिस थाने जाएंगे। इसके बाद इन बच्चों ने बिना किसी भय के लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पैदल तय की। यह मार्च ग्रामीण इलाकों से होते हुए सीधे पुलिस थाने तक पहुंचा। इतनी लंबी दूरी तय करने के बाद भी बच्चों के हौसले पस्त नहीं हुए। थाने पहुंचते ही सभी बच्चे वहीं जमीन पर बैठ गए और अपने माता-पिता को छोड़ने की मांग करते हुए धरना शुरू कर दिया।

बच्चों के इस अनोखे और भावुक विरोध प्रदर्शन ने पुलिस अधिकारियों के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी। एक तरफ पुलिस ग्रामीणों को समझाने का प्रयास कर रही थी, वहीं दूसरी तरफ 40 बच्चों का थाने में धरने पर बैठ जाना प्रशासन के लिए चिंता का विषय बन गया। बच्चों का स्पष्ट कहना था कि जब तक उनके माता-पिता को नहीं छोड़ा जाएगा, वे यहीं बैठे रहेंगे। पुलिस ने बच्चों को भी समझाने की कोशिश की, लेकिन वे अपनी जिद पर अड़े रहे। देर शाम तक चली इस मशक्कत के बावजूद ग्रामीण मानने को तैयार नहीं हुए और उनका संघर्ष जारी रहा।

यह घटना छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में पेयजल संकट की गंभीरता को भी उजागर करती है। आड़ेझर गांव के निवासियों के लिए पानी की समस्या कोई नई नहीं है, लेकिन प्रशासन द्वारा आंदोलनकारियों को अभिरक्षा में लिए जाने के तरीके ने मामले को अधिक संवेदनशील बना दिया। बच्चों द्वारा 10 किलोमीटर की पैदल यात्रा करना और थाने में धरने पर बैठना यह दर्शाता है कि ग्रामीणों में अपनी मांगों को लेकर कितनी व्याकुलता है और वे किस हद तक जाने को तैयार हैं।

बालोद जिला प्रशासन और पुलिस विभाग के अधिकारी देर शाम तक इस मामले को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने के प्रयास में जुटे रहे। पुलिस की ओर से ग्रामीणों को बार-बार समझाने की कोशिश की जा रही थी कि वे आंदोलन समाप्त करें और प्रशासनिक स्तर पर उनकी समस्याओं के समाधान के लिए बातचीत का रास्ता अपनाएं। हालांकि, ग्रामीणों ने साफ कर दिया था कि जब तक पानी की व्यवस्था को लेकर ठोस आश्वासन नहीं मिलता, वे पीछे नहीं हटेंगे। बच्चों के इस मार्च ने पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस संवेदनशील मुद्दे पर क्या ठोस कदम उठाता है।