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Mon, Oct 12, 2026Updated 9:48 AM IST
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रायपुर में नारी सुरक्षा को लेकर महिलाओं ने निकाला मार्च, मोतीबाग चौक पर पुलिस ने किया रोकने का प्रयास

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रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ लगातार बढ़ते जा रहे अपराधों के विरोध में रविवार को एक बड़ा मार्च निकाला गया। इस मार्च में शहर की सैकड़ों महिलाएं और युवतियां शामिल हुईं, जिन्होंने सड़कों पर उतरकर नारी सुरक्षा, सम्मान और उनके अधिकारों की मांग को लेकर जोरदार नारेबाजी की। यह मार्च रायपुर के महिला थाना चौक से शुरू हुआ था, लेकिन जब प्रदर्शनकारी महिलाएं मोतीबाग चौक पहुंचीं तो पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद वहां कुछ देर के लिए तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई, हालांकि महिलाएं अपनी मांगों को लेकर डटी रहीं।

रविवार को निकाले गए इस मार्च का मुख्य उद्देश्य समाज में महिलाओं और बच्चियों के प्रति बढ़ रही हिंसा, अपराध और असुरक्षा की भावना को लेकर प्रशासन तथा सरकार का ध्यान आकर्षित करना था। हाल के दिनों में न केवल रायपुर बल्कि पूरे राज्य में महिलाओं के खिलाफ होने वाली घटनाओं में चिंताजनक वृद्धि देखी गई है। इन्हीं घटनाओं से आहत होकर महिला संगठनों और आम नागरिकों ने मिलकर यह मार्च आयोजित किया। महिला थाना चौक से जैसे ही यह मार्च शुरू हुआ, महिलाओं और युवतियों ने हाथों में तख्तियां और बैनर पकड़ रखे थे, जिन पर नारी सुरक्षा, महिला सम्मान और उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा से जुड़े नारे लिखे हुए थे।

मार्च के दौरान महिलाओं ने एक स्वर में नारे लगाए और प्रशासन से सख्त कदम उठाने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि महिलाएं अब घरों में बैठकर अन्याय सहने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़कों पर उतरना उनकी मजबूरी है क्योंकि महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए जो कदम उठाए जाने चाहिए, वे पर्याप्त नहीं दिख रहे हैं। मार्च में शामिल युवतियों ने भी अपने भविष्य को लेकर चिंता व्यक्त की और कहा कि जब तक सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं को पूर्ण सुरक्षा नहीं मिलती, तब तक उनका सड़कों पर उतरना जारी रहेगा।

यह मार्च महिला थाना चौक से शुरू होकर शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरता हुआ आगे बढ़ रहा था। मार्च का रास्ता पूरी तरह से शांतिपूर्ण था और प्रदर्शनकारियों ने अनुशासन बनाए रखा था। लेकिन जैसे ही यह मार्च रायपुर के महत्वपूर्ण चौराहे मोतीबाग चौक के पास पहुंचा, वहां पहले से मौजूद पुलिस बल ने महिलाओं को आगे बढ़ने से रोक दिया। पुलिस ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था का हवाला देते हुए मार्च को वहीं रोकने का प्रयास किया। पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद महिला प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। महिलाओं ने पुलिस के इस रवैये पर आपत्ति जताई और कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के लिए सड़क पर आई हैं, ऐसे में उन्हें रोका जाना उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है।

मोतीबाग चौक पर पुलिस द्वारा मार्च को रोके जाने के बाद वहां काफी संख्या में लोग एकत्र हो गए। हालांकि, महिलाओं ने संयम बनाए रखा और शांतिपूर्ण तरीके से ही अपनी मांगें दोहराती रहीं। सूत्रों के अनुसार, पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन महिलाएं नारी सुरक्षा और सम्मान को लेकर अपनी मांगों पर अड़ी रहीं। उन्होंने मांग की कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में आरोपियों को त्वरित और कड़ी सजा मिलनी चाहिए। साथ ही, पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने की प्रक्रिया को और अधिक सरल व पारदर्शी बनाया जाए।

इस मार्च में शामिल महिलाओं ने यह भी रेखांकित किया कि बच्चियों के खिलाफ बढ़ते अपराध समाज के लिए एक गंभीर खतरे की घंटी है। उन्होंने मांग की कि स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था को बेहद पुख्ता किया जाए। महिलाओं ने कहा कि नारी सुरक्षा केवल एक नारा नहीं बल्कि हर महिला का मौलिक अधिकार है, जिसकी रक्षा की जिम्मेदारी राज्य और समाज दोनों की है। यदि समय रहते इन मुद्दों पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले समय में महिलाओं का आक्रोश और भी व्यापक रूप ले सकता है।

रायपुर में रविवार को निकाले गए इस मार्च ने एक बार फिर साबित कर दिया कि महिलाएं अपने अधिकारों और सुरक्षा को लेकर अब पहले से कहीं अधिक जागरूक और मुखर हो चुकी हैं। महिला थाना चौक से मोतीबाग चौक तक चले इस मार्च ने पूरे शहर का ध्यान खींचा। हालांकि पुलिस ने मोतीबाग चौक पर मार्च को रोक दिया, लेकिन महिलाओं द्वारा उठाई गई मांगों और उनके इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन ने प्रशासन के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन और सरकार महिलाओं की इन जायज मांगों पर क्या ठोस कदम उठाती है और नारी सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए क्या नीतियां लागू करती है। वंदे भारत न्यूज़ की यह रिपोर्ट महिलाओं के इस संघर्ष और उनके अधिकारों की लड़ाई को दर्शाती है।