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Mon, Oct 12, 2026Updated 9:49 AM IST
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पटसारा दुर्गा मंदिर में नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ, मिथिला धाम से आए श्रीओमप्रकाश जी महाराज ने सुनाया भागवत महत्व

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बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के बंदरा प्रखंड अंतर्गत पटसारा दुर्गा मंदिर में रविवार से नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का विधिवत शुभारंभ हो गया है। इस पावन अवसर पर मिथिला धाम से पधारे कथावाचक श्रीओमप्रकाश जी महाराज ने व्यासपीठ से आसीन होकर कथा की शुरुआत की। पहले दिन उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत कथा के महत्व और इसके श्रवण से होने वाले आध्यात्मिक लाभों के बारे में विस्तार से बताया। कथा के पहले दिन से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे पूरे मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण छा गया।

पटसारा दुर्गा मंदिर क्षेत्र में आयोजित यह नौ दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए एक विशेष आस्था का केंद्र बना हुआ है। रविवार को जब कथावाचक श्रीओमप्रकाश जी महाराज ने व्यासपीठ संभाला, तो मंदिर परिसर में मौजूद सभी भक्तजन करबद्ध होकर उनकी वाणी सुनने के लिए तत्पर हो गए। श्रीओमप्रकाश जी महाराज मिथिला धाम से यहां पधारे हैं, जो अपने आप में इस आयोजन की धार्मिक गरिमा और महत्ता को बढ़ाता है। मिथिला धाम की साधना परंपरा और वहां के कथावाचकों की ख्याति पूरे बिहार और देश में फैली हुई है, ऐसे में उनके द्वारा कथा का वाचन श्रद्धालुओं के लिए किसी सौभाग्य से कम नहीं माना जा रहा है।

श्रीमद्भागवत कथा के पहले दिन कथावाचक श्रीओमप्रकाश जी महाराज ने मुख्य रूप से भागवत के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने व्यासपीठ से संबोधित करते हुए बताया कि श्रीमद्भागवत गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की कला और मोक्ष प्राप्ति का सबसे सरल मार्ग है। उन्होंने कहा कि कलियुग में जब चारों ओर विकारों और सांसारिक मोह-माया का प्रभाव बढ़ चुका है, ऐसे समय में भागवत कथा का श्रवण ही एकमात्र ऐसा साधन है जो मनुष्य को भगवान के चरणों से जोड़ सकता है। भागवत कथा के श्रवण मात्र से व्यक्ति के पूर्व जन्मों के पापों का नाश होता है और मन को असीम शांति प्राप्त होती है। उन्होंने भक्तों से अपील की कि वे इन नौ दिनों तक नियमित रूप से कथा स्थल पर आएं और पूरी श्रद्धा के साथ कथा का श्रवण करें।

इस नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के आयोजन को लेकर पटसारा गांव सहित पूरे बंदरा प्रखंड के लोगों में गजब का उत्साह देखा जा रहा है। पहले दिन से ही भक्तों की भीड़ इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि क्षेत्रवासियों की धर्म और अध्यात्म में कितनी गहरी आस्था है। सुबह से ही लोग स्नान-ध्यान करके, साफ-सुथरे वस्त्र पहनकर पटसारा दुर्गा मंदिर पहुंचने लगे थे। महिलाएं, बुजुर्ग, युवा और बच्चे सभी वर्ग के लोग इस कथा में शामिल होने के लिए उत्सुक दिखे। मंदिर परिसर में बैठने की व्यवस्था की गई थी, लेकिन भक्तों की संख्या अधिक होने के कारण कई लोगों को बाहर बैठकर भी कथा सुननी पड़ी।

धार्मिक आयोजनों में प्रसाद वितरण और भंडारे का विशेष महत्व होता है। पटसारा दुर्गा मंदिर में चल रही इस कथा के दौरान भी श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद और भोजन की समुचित व्यवस्था आयोजन समिति और स्थानीय ग्रामीणों द्वारा की गई है। गांव के लोग स्वयंसेवक के रूप में सेवा कार्य में जुटे हुए हैं। कोई मंदिर परिसर की साफ-सफाई में लगा है, तो कोई आने वाले भक्तों को बैठने की जगह दिखा रहा है। इस सामूहिक प्रयास ने पूरे आयोजन को एक जन-उत्सव का रूप दे दिया है।

बंदरा प्रखंड का पटसारा दुर्गा मंदिर अपनी धार्मिक और ऐतिहासिक महत्ता के लिए जाना जाता है। मां दुर्गा की आराधना का यह केंद्र हमेशा से ही श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक रहा है। ऐसे प्रतिष्ठित मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन होने से आसपास के दर्जनों गांवों के लोग भी यहां आ रहे हैं। नौ दिनों तक चलने वाली इस कथा में आगामी दिनों में भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, गोवर्धन पूजा, रासलीला और अन्य अनेक प्रसंगों का विस्तृत वर्णन किया जाएगा। कथावाचक श्रीओमप्रकाश जी महाराज अपनी मधुर वाणी और गहन शास्त्रीय ज्ञान के माध्यम से इन प्रसंगों को जीवंत करेंगे, ऐसा श्रद्धालुओं को विश्वास है।

मुजफ्फरपुर जिले में धार्मिक आयोजनों का एक लंबा इतिहास रहा है। बंदरा प्रखंड जैसे क्षेत्रों में मंदिरों को केंद्र मानकर होने वाले ऐसे आयोजन न केवल लोगों को धर्म और संस्कृति से जोड़ते हैं, बल्कि समाज में आपसी सौहार्द और भाईचारे को भी मजबूत करते हैं। पटसारा दुर्गा मंदिर में शुरू हुई यह नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा भी इसी परंपरा का एक सशक्त हिस्सा है। पहले दिन की सफलता और भक्तों के उत्साह को देखते हुए यह माना जा रहा है कि आने वाले आठ दिनों में कथा श्रवण करने वालों की संख्या में और भी अधिक वृद्धि होगी। स्थानीय ग्रामीणों और आयोजन समिति ने सभी धर्मप्रेमी जनता से इस पुनीत अवसर पर अधिक से अधिक संख्या में पटसारा दुर्गा मंदिर पहुंचकर कथा का लाभ उठाने और भगवान की भक्ति में लीन होने की अपील की है।