मंडला: खेल-खेल में रतनजोत के जहरीले बीज खाए, 7 बच्चों की बिगड़ी तबीयत; उल्टी-दस्त के बाद जिला अस्पताल में भर्ती

मंडला। मध्य प्रदेश के मंडला जिले से एक चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां जहरीले बीज खाने के कारण सात बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। महाराजपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सेमीकोल गांव में यह घटना उस समय हुई जब बच्चे आपस में खेल रहे थे और खेल-खेल में उन्होंने रतनजोत के बीज खा लिए। इन बीजों को खाने के कुछ ही देर बाद सभी बच्चों को गंभीर फूड प्वाइजनिंग (खाद्य विषाक्तता) के लक्षण दिखाई देने लगे। बच्चों को लगातार उल्टी और दस्त की शिकायत होने लगी, जिसके बाद उनके परिजनों में हड़कंप मच गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सभी सात बच्चों को तत्काल प्रभाव से इलाज के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें भर्ती कराकर चिकित्सकों की निगरानी में उपचार शुरू किया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बीमार हुए सात बच्चों में से पांच बच्चे एक ही परिवार के हैं, जबकि शेष दो बच्चे पड़ोस के बताए जा रहे हैं। ये सभी बच्चे सेमीकोल गांव में रहते हैं और घटना के वक्त वे गांव के पास ही आपस में खेल रहे थे। खेल के दौरान उनकी नजर रतनजोत के पौधे पर पड़ी और उन्होंने अनजाने में इसके बीजों को खाना शुरू कर दिया। छोटे बच्चों को इस बात का कोई आभास नहीं था कि वे जो बीज खा रहे हैं, वे कितने जहरीले और स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकते हैं। बीज खाने के कुछ ही समय बाद बच्चों ने पेट में तेज दर्द और बेचैनी की शिकायत करना शुरू कर दी। इसके बाद उन्हें बार-बार उल्टियां और दस्त लगने लगे, जिससे उनकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी।
बच्चों की इस अचानक बिगड़ती तबीयत को देखकर घर में मौजूद परिजन घबरा गए। जब परिजनों ने बच्चों से पूछताछ की तो पता चला कि उन्होंने खेलते समय रतनजोत के बीज खाए हैं। यह जानकारी मिलते ही परिजनों ने बिना किसी देरी के बच्चों को पहले स्थानीय स्तर पर प्राथमिक उपचार के लिए ले जाने का प्रयास किया, लेकिन हालत में सुधार न होता देख उन्हें सीधे जिला अस्पताल ले जाया गया। जिला अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने बच्चों की गंभीर स्थिति को देखते हुए तुरंत उन्हें भर्ती कर लिया और आवश्यक चिकित्सा प्रक्रिया शुरू की। चिकित्सकों द्वारा बच्चों को विषाक्तता से बाहर निकालने के लिए जरूरी दवाइयां और तरल पदार्थ दिए जा रहे हैं ताकि उनके शरीर से जहर का असर कम किया जा सके।
रतनजोत का पौधा ग्रामीण और वनीय क्षेत्रों में आम तौर पर पाया जाता है। इसके बीजों में ऐसे तत्व होते हैं जो मानव शरीर, विशेषकर छोटे बच्चों के लिए अत्यंत विषैले और हानिकारक सिद्ध हो सकते हैं। यदि इन बीजों का सेवन कर लिया जाए, तो यह गंभीर खाद्य विषाक्तता का रूप ले लेता है। इसके मुख्य लक्षणों में पेट में मरोड़, जी मिचलाना, लगातार उल्टी होना, दस्त लगना, शरीर में पानी की कमी होना और अत्यधिक कमजोरी महसूस होना शामिल है। समय रहते यदि उचित चिकित्सा न मिले, तो शरीर में पानी की भारी कमी (डिहाइड्रेशन) के कारण स्थिति और भी अधिक जटिल हो सकती है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाना अत्यंत आवश्यक होता है, क्योंकि देरी होने पर जान को भी खतरा हो सकता है।
महाराजपुर थाना क्षेत्र के सेमीकोल गांव में घटी इस घटना के बाद से पूरे इलाके में मातम और चिंता का माहौल व्याप्त है। जिन पांच बच्चों का संबंध एक ही परिवार से है, उस घर में कोहराम मचा हुआ है। परिजन अस्पताल में बच्चों के बिस्तर के पास बैठकर उनकी सलामती की दुआ कर रहे हैं। वहीं, पड़ोस के दो बच्चों के परिजन भी काफी सहमे हुए हैं और अस्पताल में डॉक्टरों से लगातार उनके स्वास्थ्य की जानकारी ले रहे हैं। गांव के अन्य लोगों ने भी इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चे स्वभाव से ही चंचल होते हैं और खेल-खेल में वे किसी भी चीज को मुंह में डाल लेते हैं, इसलिए अभिभावकों को हमेशा सतर्क रहने की जरूरत है।
इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों की सुरक्षा और अभिभावकों की सतर्कता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन की ओर से समय-समय पर ग्रामीणों को ऐसे जहरीले पौधों और बीजों के प्रति जागरूक करने की अपील की जाती है, लेकिन ग्रामीण अंचलों में इस तरह की जानकारी का अभाव अक्सर देखने को मिलता है। सेमीकोल गांव में हुई यह घटना अन्य अभिभावकों के लिए भी एक बड़ी चेतावनी है कि वे अपने बच्चों की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखें और उन्हें खुले में खेलते समय अनजान पौधों, फलों या बीजों को छूने या खाने से सख्ती से मना करें।
फिलहाल, जिला अस्पताल में भर्ती सभी सात बच्चों का इलाज जारी है। अस्पताल के चिकित्सा दल द्वारा बच्चों की निरंतर निगरानी की जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार, बच्चों को उल्टी और दस्त के कारण शरीर में पानी की कमी का सामना करना पड़ा था, जिसे दूर करने के लिए उन्हें आवश्यक उपचार दिया जा रहा है। बच्चों की वर्तमान स्थिति के बारे में चिकित्सकों द्वारा परिजनों को जानकारी दी जा रही है। यह मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है और प्रशासनिक स्तर पर भी इसकी जानकारी ली गई है। वंदे भारत न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार लाने के लिए अस्पताल में पूरी चिकित्सीय व्यवस्था जुटाई गई है और उम्मीद जताई जा रही है कि उचित उपचार से सभी बच्चे जल्द ही स्वस्थ होकर अपने घर लौट सकेंगे।

