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Mon, Oct 12, 2026Updated 11:48 AM IST
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CEC के खिलाफ विपक्ष का सुप्रीम कोर्ट तक मार्च: राहुल गांधी ने किया नेतृत्व, 6 मेट्रो स्टेशन बंद; CJI सूर्यकांत ने खड़गे-राहुल से मिलने से किया इनकार

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नई दिल्ली। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के इस्तीफे की मांग को लेकर सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने संसद भवन से सुप्रीम कोर्ट तक एक बड़ा विरोध मार्च निकाला। इस मार्च में विपक्षी दलों के कई सांसदों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए सीईसी के पद से इस्तीफे की मांग की। हालांकि, जब विपक्षी नेताओं ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) संजीव खन्ना के स्थान पर कार्यरत न्यायमूर्ति बी.आर. सूर्यकांत से मुलाकात करने का प्रयास किया, तो उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी से मिलने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया।

विपक्षी दलों ने इस विरोध मार्च को ‘SIR’ (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के विरोध में आयोजित किया था। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में हेराफेरी और चुनाव आयोग की तरफ से अपनाए जा रहे तरीकों में पारदर्शिता का अभाव है। राहुल गांधी ने मार्च से पहले कहा कि लोकतंत्र को बचाने और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए यह लड़ाई जरूरी है। उनके साथ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे।

इस बड़े विरोध प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने राजधानी में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू कर दी थी। कानून-व्यवस्था बनाए रखने और यातायात को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने छह मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद कर दिए थे। इन स्टेशनों पर ट्रेनें रुक रही थीं, लेकिन यात्रियों को उतरने या चढ़ने की अनुमति नहीं दी गई थी। यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि प्रदर्शनकारियों की भीड़ को संवेदनशील क्षेत्रों की ओर बढ़ने से रोका जा सके।

स्रोत सामग्री के अनुसार, राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने की घोषणा की थी, जिसमें विपक्षी सांसदों ने उनका साथ दिया। मार्च के दौरान विपक्षी नेताओं ने हाथों में तख्तियां और बैनर पकड़े हुए थे, जिन पर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और चुनाव आयोग में सुधार की मांग लिखी हुई थी। विपक्षी सांसदों ने सरकार और चुनाव आयोग दोनों पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया।

जब यह मार्च सुप्रीम कोर्ट के समीप पहुंचा, तो कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी सहित विपक्षी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया से मिलकर अपनी शिकायतें पेश करने का अनुरोध किया। वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी.आर. सूर्यकांत हैं। हालांकि, सीजेआई सूर्यकांत ने विपक्षी नेताओं से मिलने से इनकार कर दिया। न्यायपालिका की स्वतंत्रता और स्थापित प्रक्रियाओं का हवाला देते हुए यह स्पष्ट किया गया कि ऐसे राजनीतिक मामलों में सीधे न्यायाधीशों से मुलाकात उचित नहीं होगी। यदि कोई कानूनी शिकायत है, तो उसे औपचारिक याचिका के माध्यम से न्यायालय के समक्ष पेश किया जाना चाहिए।

सीजेआई द्वारा मुलाकात से इनकार किए जाने के बाद विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट परिसर के बाहर ही धरना दिया और नारेबाजी की। राहुल गांधी ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विपक्ष अपनी आवाज उठाता रहेगा। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग का निष्पक्ष होना लोकतंत्र की बुनियादी शर्त है और अगर संस्थाएं दबाव में काम करेंगी तो देश का लोकतंत्र खतरे में पड़ जाएगा।

दिल्ली में विपक्ष के इस मार्च ने राजनीतिक पारा चढ़ा दिया है। सत्ता पक्ष की ओर से अभी तक इस मार्च पर कोई आधिकारिक विस्तृत प्रतिक्रिया स्रोत में उपलब्ध नहीं है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी दिनों में चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर संसद के अंदर और बाहर बहस तेज होगी।

गौरतलब है कि SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन का मुद्दा पिछले कुछ समय से विपक्ष के निशाने पर रहा है। विपक्षी पार्टियों का दावा है कि मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के नाम पर लाखों वास्तविक मतदाताओं के नाम काटे गए हैं, जबकि फर्जी नाम जोड़े गए हैं। इसी मुद्दे को आधार बनाकर आज सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला गया।

सुरक्षा के लिहाज से दिल्ली पुलिस ने मार्च के रूट पर भारी संख्या में बल तैनात किया था। बैरिकेडिंग के जरिए प्रदर्शनकारियों को निर्धारित रास्ते पर ही रोकने का प्रयास किया गया। छह मेट्रो स्टेशन बंद होने के कारण आम यात्रियों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कार्यालय जाने वाले लोगों और छात्रों को वैकल्पिक परिवहन का सहारा लेना पड़ा।

अंततः, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में निकला यह मार्च विपक्ष की एकजुटता का प्रदर्शन था। सीजेआई सूर्यकांत द्वारा मुलाकात से इनकार किए जाने के बावजूद, विपक्ष ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि वे चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों को लेकर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। आने वाले समय में यह देखना होगा कि इस विरोध प्रदर्शन का चुनाव आयोग और सरकार पर क्या असर पड़ता है।