लुधियाना नगर निगम हाउस की बैठक में 82 करोड़ के मैकेनिकल स्वीपिंग टेंडर पर हंगामा, कांग्रेस पार्षद नकली नोटों की बोरी लेकर पहुंचे

लुधियाना। पंजाब के औद्योगिक शहर लुधियाना में सोमवार को नगर निगम के जनरल हाउस की बैठक का आयोजन किया गया। यह बैठक अपने शुरू होने से पहले ही विवादों और हंगामे के केंद्र में आ गई। बैठक में मुख्य मुद्दा शहर की सड़कों की मैकेनिकल स्वीपिंग यानी मशीनों से सफाई व्यवस्था के लिए प्रस्तावित 82 करोड़ रुपये के टेंडर को लेकर रहा। इस विशाल राशि के टेंडर का कांग्रेस पार्टी के पार्षदों ने कड़ा विरोध किया और बैठक स्थल के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस पार्षदों ने अपनी बात को अधिक प्रभावी ढंग से रखने के लिए एक अनोखा तरीका अपनाया और वे नकली नोटों की बोरी लेकर नगर निगम हाउस पहुंचे, जिससे पूरा माहौल गरमा गया।
जानकारी के अनुसार, लुधियाना नगर निगम द्वारा शहर की सड़कों को साफ-सुथरा रखने और यांत्रिक सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मैकेनिकल स्वीपिंग का एक बड़ा टेंडर जारी किया गया है। इस टेंडर की अनुमानित लागत करीब 82 करोड़ रुपये बताई जा रही है। नगर निगम के जनरल हाउस की सोमवार को होने वाली नियमित बैठक में इसी टेंडर पर चर्चा और मुहर लगने की संभावना थी। हालांकि, बैठक शुरू होने से पहले ही विपक्षी दल कांग्रेस के पार्षदों ने इस टेंडर प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
कांग्रेस पार्षदों का आरोप है कि 82 करोड़ रुपये की इतनी बड़ी राशि का टेंडर बिना पारदर्शिता के और जल्दबाजी में पास कराया जा रहा है। उनका कहना है कि इस टेंडर में आम जनता के गाढ़े पसीने की कमाई यानी करदाताओं के पैसों का दुरुपयोग होने की आशंका है। अपने इसी विरोध को दर्ज कराने के लिए कांग्रेस पार्षदों ने नगर निगम भवन के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन की सबसे खास बात यह रही कि पार्षद नकली नोटों से भरी एक बोरी लेकर वहां पहुंचे। नकली नोटों की बोरी दिखाने का उनका मकसद यह संदेश देना था कि यदि यह टेंडर इसी रूप में पास होता है, तो यह जनता के पैसे की बर्बादी के समान होगा। पार्षदों ने नारेबाजी करते हुए इस टेंडर को तत्काल वापस लेने या फिर इसकी पूरी प्रक्रिया की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की।
लुधियाना शहर पंजाब का सबसे बड़ा औद्योगिक और व्यापारिक केंद्र है। यहां की आबादी और वाहनों के भारी दबाव के कारण सड़कों की सफाई हमेशा से नगर निगम के लिए एक बड़ी चुनौती रही है। पारंपरिक सफाई व्यवस्था की सीमाओं को देखते हुए नगर निगम प्रशासन ने मैकेनिकल स्वीपिंग अर्थात मशीनों के जरिए सड़कों की सफाई कराने का निर्णय लिया था। मशीनों से सफाई कराने के पीछे प्रशासन का तर्क है कि इससे न केवल सफाई अधिक बेहतर और वैज्ञानिक तरीके से होगी, बल्कि सफाई कर्मचारियों पर पड़ने वाला शारीरिक बोझ भी कम होगा और शहर की छवि में भी सुधार आएगा। लेकिन जब इस काम के लिए 82 करोड़ रुपये के टेंडर की बात सामने आई, तो इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई।
जनरल हाउस की बैठक में इस टेंडर को लेकर तीखी बहस होने की पहले से ही उम्मीद जताई जा रही थी, जो प्रदर्शन के बाद और अधिक स्पष्ट हो गई। बैठक में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर जमकर हंगामा होने की पूरी संभावना थी। कांग्रेस पार्षदों ने साफ कर दिया था कि वे सदन के अंदर भी इस टेंडर का पुरजोर विरोध करेंगे और इसे किसी भी कीमत पर पास नहीं होने देंगे। दूसरी ओर, नगर निगम प्रशासन का पक्ष रहा है कि शहर की सफाई व्यवस्था को आधुनिक बनाना समय की मांग है और टेंडर की प्रक्रिया नियमों के तहत ही की गई है।
हालांकि, नकली नोटों की बोरी के साथ किए गए इस अनूठे प्रदर्शन ने नगर निगम हाउस की बैठक को एक नाटकीय मोड़ दे दिया। इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट हो गया है कि लुधियाना नगर निगम में सफाई व्यवस्था और उसके लिए आवंटित होने वाले भारी-भरकम बजट को लेकर राजनीतिक रस्साकशी तेज हो गई है। 82 करोड़ रुपये का यह टेंडर अब केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं रह गया है, बल्कि यह सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव का एक प्रमुख मुद्दा बन चुका है।
बता दें कि नगर निगम की बैठकों में इस तरह के टेंडर विवाद कोई नई बात नहीं हैं, लेकिन नकली नोटों की बोरी लाकर विरोध जताने का तरीका काफी असामान्य माना जा रहा है। इस पूरे मामले ने लुधियाना के नागरिकों के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का मानना है कि शहर की सफाई व्यवस्था सुधरनी चाहिए, लेकिन इसके लिए खर्च होने वाले सरकारी खजाने के पैसे का सही और पारदर्शी उपयोग होना अत्यंत आवश्यक है। फिलहाल, इस विवादित टेंडर पर नगर निगम हाउस की बैठक में क्या अंतिम फैसला लिया जाता है, इस पर पूरे शहर और राजनीतिक पार्टियों की निगाहें टिकी हुई हैं। स्रोत से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह मामला अभी विचाराधीन है और बैठक में इस पर हंगामा होना तय माना जा रहा था।

